नई दिल्ली: लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एल. निशिकांत सिंह, जो मणिपुर के जातीय संघर्ष पर खुलकर बोलते रहे हैं और 2023 में सोशल मीडिया पर यह कहने के लिए आलोचना झेल चुके हैं कि “म्यांमार से 300 लुंगी पहने कुकी आतंकवादी मणिपुर में घुसे और राज्य में अपने साथियों के साथ मिलकर घर जलाए”, अब उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री का सलाहकार (समन्वय) नियुक्त किया गया है.
नियुक्ति के तुरंत बाद कई कुकी से जुड़े सोशल मीडिया पेजों ने इस फैसले की निंदा की और इसे “खतरनाक परिणाम वाला कदम” बताया.
इन समूहों ने ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति पर सवाल उठाए, जिसने उनके मुताबिक “एक समुदाय के खिलाफ गलत जानकारी फैलाई” और जो “पक्षपाती” रहा है. खासकर ऐसे राज्य में, जो सामान्य स्थिति में लौटने की कोशिश कर रहा है लेकिन अभी भी संवेदनशील बना हुआ है. इन समूहों ने सिंह की नियुक्ति को मणिपुर की शांति प्रक्रिया के लिए झटका बताया.
रविवार को दिप्रिंट से बात करते हुए सिंह ने कहा कि पुरानी बातों को “बीती बात” मान लेना चाहिए.
उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ “कुछ नकारात्मक बातें” ही उछाली जा रही हैं, जबकि कुकी समुदाय के लोगों की मदद करने के कई उदाहरणों को नजरअंदाज किया जा रहा है.
सिंह ने कहा कि राज्य में शांति और भाईचारा बहाल करना उनकी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि कुकी और मैतेई दोनों को साथ आकर शांति सुनिश्चित करनी चाहिए और “राष्ट्र निर्माण” की दिशा में काम करना चाहिए.
उन्होंने कहा, “सामान्य स्थिति बहाल करना प्राथमिकता है. इससे मणिपुर विकास की राह पर आगे बढ़ेगा. यह राष्ट्रीय एकता में योगदान देगा.”
उन्होंने कहा कि लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिशें पहले ही शुरू हो चुकी हैं. “जमीन पर काम शुरू हो चुका है. मुख्यमंत्री सभी समुदायों तक पहुंच बना रहे हैं. उनका पहला दौरा जिरीबाम था. हम हमार गांव भी गए और हमार भाइयों के परिजनों से मिले, जो पीड़ित थे. हमने मैतेई भाइयों और बहनों से भी मुलाकात की. हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि लोगों से बातचीत हो.”
कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स ने पिछले अक्टूबर में सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तारीफ में लिखा गया एक लेख भी साझा किया. आरोप लगाया गया कि मणिपुर के मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में उनकी नियुक्ति संघ से कथित जुड़ाव के कारण हुई है. यह लेख ‘100 Years of RSS: Its Contribution to the Nation, Northeast India and Manipur’ शीर्षक से ऑर्गेनाइजर में प्रकाशित हुआ था.
इन आरोपों पर सिंह ने कहा, “मैं आरएसएस या किसी अन्य संगठन से जुड़ा नहीं हूं. जो अच्छा काम करता है, मैं उसकी सराहना करता हूं. उन्होंने अच्छा काम किया, इसलिए मैंने लिखा. इसका मतलब यह नहीं है कि मैं उनसे जुड़ा हूं.”
1958 में मणिपुर में जन्मे सिंह 1979 में भारतीय सेना में शामिल हुए और जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की 9वीं बटालियन में गए. सितंबर 2015 में वह मणिपुर के दूसरे लेफ्टिनेंट जनरल बने.
फरवरी 2010 में भारतीय मेडिकल मिशन पर हमले के बाद उन्होंने अफगानिस्तान में बचाव अभियान का नेतृत्व भी किया. स्वतंत्रता के बाद वह पूर्वोत्तर से तीसरे लेफ्टिनेंट जनरल हैं. उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम.फिल की डिग्री ली है. उन्हें दो बार विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है.
सिंह के अनुसार, अपनी नई भूमिका में वह मुख्यमंत्री को सुरक्षा व्यवस्था, पुनर्वास की प्राथमिकताओं और चरणबद्ध स्थिरीकरण पर सलाह देंगे. उन्होंने कहा, “मकसद यह है कि जमीनी हकीकत का पेशेवर आकलन किया जाए, जो राजनीतिक दबाव से मुक्त हो.”
17 फरवरी को हुई कैबिनेट बैठक के फैसले के बाद सिंह और अन्य लोगों की नियुक्ति की गई. आदेश में कहा गया कि ये नियुक्तियां जनहित में एक साल के लिए तत्काल प्रभाव से की जा रही हैं. सिंह के अलावा ओइनाम सुनील सिंह को मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार और कृष्णानंद समुराइलाटपम शर्मा को नीति मामलों का सलाहकार नियुक्त किया गया है. दोनों मैतेई समुदाय से हैं.
‘तटस्थता साबित करनी होगी’
सुरक्षा तंत्र से जुड़े अधिकारियों ने दिप्रिंट को बताया कि एल. निशिकांत सिंह एक सम्मानित अधिकारी हैं और मणिपुर की नब्ज समझते हैं.
एक अधिकारी ने कहा, “उन्होंने सैन्य खुफिया में काम किया है. उनके पास समझ और अनुभव है. वह राज्य में तैनात रह चुके हैं और जगह को अच्छी तरह जानते हैं.” लेकिन अधिकारी ने यह भी कहा कि अब सिंह को “यह साबित करना होगा कि वह तटस्थ हैं.”
उन्होंने कहा, “उन्हें लोगों का भरोसा जीतना होगा और दिखाना होगा कि वह पूरे राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, किसी एक समुदाय का नहीं. उनका सेवा रिकॉर्ड मजबूत है और उनका अनुभव उपयोगी साबित हो सकता है.”
एक दूसरे अधिकारी ने इस नियुक्ति को नए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह की ओर से सकारात्मक संकेत बताया. उन्होंने कहा कि यह दोनों पक्षों के समुदायों तक पहुंच बनाने और “सही कदम” उठाने की कोशिश है.
उन्होंने कहा, “लेफ्टिनेंट जनरल सिंह की नियुक्ति को विवादित माना जा सकता है, लेकिन वह सक्षम अधिकारी हैं और उन्हें जमीनी अनुभव है. इसके अलावा नई सरकार का इरादा रचनात्मक लगता है, क्योंकि मुख्यमंत्री सभी समुदायों से संवाद कर रहे हैं और सही दिशा में बढ़ रहे हैं. इस नियुक्ति से शांति प्रक्रिया पटरी से नहीं उतरनी चाहिए.”
‘एक झटका’
कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी के प्रवक्ता लुन किपगेन ने सिंह की नियुक्ति की आलोचना की.
उन्होंने कहा कि मणिपुर के मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में “एक कट्टर व्यक्ति” को नियुक्त करना खतरनाक है. सरकार को ऐसे व्यक्ति को चुनते समय सावधान रहना चाहिए था जो “तटस्थ” हो और कुकी समुदाय के खिलाफ साफ तौर पर पक्षपाती न दिखता हो.
दिप्रिंट से बात करते हुए किपगेन ने कहा कि सैन्य पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को नियुक्त करना, और वह भी ऐसा जिसने कुकी समुदाय को उग्रवादी कहा हो, शांति प्रक्रिया के लिए बड़ा झटका है और हालात को फिर से वहीं ले जाएगा जहां से शुरुआत हुई थी. उन्होंने कहा कि इस नियुक्ति से नई सरकार की मंशा पर संदेह होता है.
उन्होंने कहा, “यह कोई छिपी बात नहीं है कि संघर्ष के दौरान वह कुकी समुदाय के खिलाफ पक्षपाती दिखे. उनकी टिप्पणियों ने आग में घी डालने का काम किया. अगर सरकार लोगों में भरोसा पैदा करना चाहती थी, तो उसे किसी तटस्थ व्यक्ति को चुनना चाहिए था. शायद दिल्ली से किसी को, न कि ऐसे व्यक्ति को जिसे अशांति बढ़ाने वाला माना जाता है.”
किपगेन के मुताबिक, सिंह एक सम्मानित अधिकारी हैं और लोगों में उनकी इज्जत है, लेकिन कुकी समुदाय को लेकर उनके पुराने बयान इस नियुक्ति को विवादित बनाते हैं.
उन्होंने कहा, “सरकार को ऐसे सैन्य पृष्ठभूमि वाले सलाहकार की जरूरत क्यों है, जिसने हमारे समुदाय के बारे में ऐसे बयान दिए. उन्होंने गलत जानकारी फैलाई और अशांति बढ़ाई. सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए.”
एक दूसरे कुकी नेता ने भी इस नियुक्ति को “सबसे विवादित फैसलों में से एक” बताया, जो चल रही शांति कोशिशों को पीछे ले जा सकता है.
उन्होंने आरोप लगाया, “जब सुगनू में कुकी-जो कॉलोनी को अरामबाई तेंगोल, यूएनएलएफ, पीएलए और अन्य के संयुक्त दल ने जलाया था, तब फर्जी जानकारी फैलाने वाले वही थे.”
उन्होंने कहा, “वह लगातार कुकी समुदाय के खिलाफ ट्वीट करते रहते हैं. ऐसे व्यक्ति से हम कैसे उम्मीद करें कि वह कुकी समुदाय और शांति के लिए काम करेंगे. इतने महत्वपूर्ण समय पर सरकार ने ऐसा फैसला क्यों लिया. इससे हमें सरकार की मंशा पर शक होता है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: मिलिए नीरज गोयत से—मुक्केबाज़ी, विवाद और शोहरत के बीच जीते दोहरी ज़िंदगी
