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कोझिकोड, सात फरवरी (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शनिवार को अंग प्रतिरोपण के लिए निजी अस्पतालों की ओर से वसूली जाने वाली भारी-भरकम फीस को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य सरकार तय समय में आधुनिक अस्पताल स्थापित करेगी।
मुख्यमंत्री कोझिकोड के चेवायूर में प्रस्तावित ‘केरल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट’ (केआईओटीटी) की आधारशिला रखने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केआईओटीटी ‘देश का पहला समर्पित ‘अंग प्रतिरोपण अस्पताल’ होगा।
उन्होंने कहा कि केआईओटीटी की परिकल्पना आम लोगों के लिए किफायती और सुलभ उन्नत अंग प्रतिरोपण सर्जरी प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।
विजयन ने कहा कि केआईओटीटी की स्थापना स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सबसे अनुकरणीय पहलों में से एक होगी, जिससे केरल देश के बाकी हिस्सों के लिए एक आदर्श बन जाएगा।
उन्होंने रेखांकित किया कि ऐसे समय में जब स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, अंग प्रतिरोपण सर्जरी का महत्व बहुत बढ़ गया है।
विजयन ने कहा कि अलग-अलग निजी अस्पताल एक ही इलाज के लिए अलग-अलग शुल्क लेते हैं, जिससे यह आम लोगों की पहुंच में नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि इन बातों को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों ने एक विशेष अस्पताल की स्थापना का प्रस्ताव दिया था।
विजयन ने उम्मीद जताई कि अस्पताल का निर्माण कार्य निर्धारित समय के भीतर पूरा हो जाएगा। उन्होंने कार्य को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के लिए सभी हितधारकों से सहयोग मांगा।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने कहा कि यह दिन ‘‘केरल के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर’’ के रूप में दर्ज होगा।
यह अस्पताल चेवायूर स्थित त्वचा रोग अस्पताल के परिसर में 20 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा।
एक बयान के मुताबिक अस्पताल का निर्माण दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण की लागत 299 करोड़ रुपये होगी, जिसमें उपकरणों के लिए अतिरिक्त 99 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
इसके मुताबिक पहले चरण में, अस्पताल में आईसीयू और हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) सुविधाओं सहित 350 बिस्तर, एक डायलिसिस केंद्र और 10 ऑपरेशन थिएटर होंगे।
बयान के मुताबिक इसमें 14 विशिष्ट विभाग और प्रभाग होंगे, और आठ मंजिला इमारत प्रतिरोपण के क्षेत्र में चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र और अनुसंधान केंद्र के रूप में भी कार्य करेगी।
भाषा धीरज संतोष
संतोष
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