बेंगलुरु: कर्नाटक के मंगलुरु में शनिवार को एक व्यक्ति और उसकी 11 साल की बेटी को कथित तौर पर बीफ ले जाते हुए रोका गया. बाद में जिला पुलिस ने पिता के खिलाफ “बिना बिल के” मांस ले जाने को लेकर मामला दर्ज किया.
मंगलुरु के पुलिस आयुक्त सुधीर कुमार रेड्डी के बयान में कहा गया, “अधिकृत स्थान से बिना किसी बिल के अवैध रूप से बीफ ले जाने वालों को रोकना पुलिस का कर्तव्य है. मोरल पुलिसिंग और बीफ परिवहन—दोनों के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे.”
मंगलुरु पुलिस के अनुसार, अब्दुल सत्तार मुल्लरपटना और उनकी 11 साल की बेटी शनिवार सुबह दोपहिया वाहन से लगभग 35 पैकेटों में करीब 19 किलो बीफ ले जा रहे थे. इसी दौरान तटीय शहर के बाजपे इलाके की मलाली नर्लापडावी रोड पर उन्हें रोका गया.
बताया गया कि सुमित भंडारी (21) और रजत नाइक (30) नाम के दो लोगों ने अपनी टाटा सूमो गाड़ी से पिता-बेटी की दोपहिया को रोक लिया. इसके चलते वे गिर पड़े और बच्ची के पैर में बाइक के गर्म साइलेंसर से जलने की चोट आई.
इसके बाद भंडारी और नाइक ने कथित तौर पर सत्तार से मारपीट की, जिसके बाद वह मौके से भाग गए.
मंगलुरु पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, “सुमित (भंडारी) और रजत (नाइक) को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था. उनसे अलग-अलग पूछताछ की गई.”
11 साल की बच्ची का बयान अस्पताल में दर्ज किया गया. उसने कहा कि रास्ता रोकने वाले दोनों लोगों ने उसके पिता की पिटाई की.
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कर्नाटक में मोरल पुलिसिंग की घटनाएं बढ़ी हुई हैं. दक्षिणी राज्य के कई जिलों में ‘लव जिहाद’ के आरोपों और अन्य सामुदायिक हमलों को लेकर जोड़ों पर हमले के कई मामले सामने आए हैं.
कर्नाटक के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील तटीय जिलों में ऐसे तनाव लंबे समय से बने रहे हैं, जहां खुद को ‘गौ रक्षक’ बताने वाले और अन्य सतर्कतावादी अक्सर कानून अपने हाथ में लेते रहे हैं.
सितंबर में, कुछ स्वयंभू सतर्कतावादी समूहों ने बेलगावी जिले के कगवाड़ के पास एक ट्रक को रोका, ड्राइवर को बाहर घसीटा, उसकी पिटाई की और फिर ट्रक में आग लगा दी. आरोप था कि ट्रक पड़ोसी तेलंगाना में बीफ मांस ले जा रहा था.
2021 में तत्कालीन बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने कर्नाटक प्रिवेंशन ऑफ स्लॉटर एंड प्रिज़र्वेशन ऑफ कैटल एक्ट पारित किया था. इस कानून के तहत 13 साल से कम उम्र के पशुओं के वध पर 3 से 7 साल की जेल या 50,000 रुपये से 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
इस कानून में उन लोगों के “सद्भावना में किए गए कार्यों” के संरक्षण का प्रावधान भी है, जो पशुओं को वध से बचाने के लिए कार्रवाई करते हैं, जिसे सतर्कतावादियों को संरक्षण देने के कदम के रूप में देखा गया.
हालांकि, सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले इस कानून को रद्द करने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने अब तक इसमें कोई बदलाव नहीं किया है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक गोवा, केरल और तेलंगाना जैसे पड़ोसी राज्यों को बीफ की आपूर्ति करता है. राज्य ने 2019-20 में यूएई, कतर देशों को करीब 25 लाख डॉलर का बीफ निर्यात भी दर्ज किया था.
उसी वित्तीय वर्ष में कर्नाटक से चमड़ा (लेदर) निर्यात लगभग 82.5 लाख डॉलर रहा.
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