बेंगलुरु, 26 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में मूल निवास (डोमिसाइल) आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री सी.एन. अश्वथ नारायण ने कहा है कि कर्नाटक मूल के छात्रों को 25 प्रतिशत आरक्षण देना अनिवार्य है । यह अखिल भारतीय कोटा के तहत चुने गए छात्रों के अतिरिक्त है।
बुधवार को विश्वविद्यालय के कुलपति को लिखे पत्र में मंत्री ने कहा कि अगर अखिल भारतीय कोटा के तहत चुने गए छात्रों को मूल निवास आरक्षण के तहत माना जाता है तो यह प्राकृतिक न्याय का ‘‘उल्लंघन’’ होगा।
नारायण ने यह भी कहा कि उन्होंने इस संबंध में कुछ दिन पहले भी एक पत्र लिखा था।
मंत्री ने कहा, ‘‘विशाखापत्तनम, रायपुर, कोलकाता एवं अन्य स्थानों पर स्थित इसी प्रकार के संस्थानों में 25 प्रतिशत मूल निवास आरक्षण का पालन किया जा रहा है। 2020 में पेश किए गए संशोधनों के अनुसार कर्नाटक में भी इसका पालन किया जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि इसके मद्देनजर शैक्षणिक वर्ष 2022-23 में कुल उपलब्ध 180 सीट में से 45 छात्रों को मूल निवास आरक्षण के तहत प्रवेश दिया जाना चाहिए।
मंत्री ने कहा, ‘‘’लेकिन, यह पता चला है कि अखिल भारतीय कोटा के तहत चुने गए 13 छात्रों को भी मूल निवास आरक्षण की श्रेणी में शामिल किया गया था इसलिए, केवल 32 छात्रों को मूल निवास आरक्षण के तहत प्रवेश दिया गया। इसके परिणामस्वरूप राज्य के 13 छात्रों को अपने अवसर गंवाने पड़े।’’
मंत्री ने कहा कि शैक्षणिक वर्ष 2023-24 के लिए 240 सीटें उपलब्ध हैं और इनमें से 60 छात्रों को मूल निवास आरक्षण के तहत प्रवेश दिया जाना चाहिए।
भाषा शफीक पवनेश
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