बेंगलुरु, पांच फरवरी (भाषा) कर्नाटक मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को फर्जी खबरों को रोकने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई)-संचालित सोशल मीडिया एनालिटिकल सॉल्यूशन (एसएमएएस) को मंजूरी दे दी।
राज्य सरकार के मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में 67.20 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली एसएमएएस परियोजना को मंजूरी दी गई।
उन्होंने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया, ‘‘सरकार अब एसएमएएस के माध्यम से सोशल मीडिया सामग्री की जांच करेगी।’’
पाटिल ने कहा कि इससे आतंकी संगठनों द्वारा की जाने वाली भर्ती पर भी नजर रखी जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि एसएमएएस फर्जी खबरों के प्रसार को रोकने और सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद करेगा।
पाटिल ने कहा कि यह सिर्फ तथ्यों की जांच में ही नहीं, बल्कि गलत सूचना के मूल स्रोत की पहचान करने में भी सहायक है।
उन्होंने कहा कि मुख्यधारा के मीडिया के डिजिटल मंच जांच के दायरे में नहीं आएंगे। इसमें कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा और यह पूरी तरह से एआई द्वारा संचालित होगा।
पाटिल ने बताया कि कृत्रिम मेधा आधारित तकनीक सोशल मीडिया से उत्पन्न होने वाले तीव्र खतरों का पता लगाने और उनका मुकाबला करने में सहायक हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘एआई बाल तस्करी, मानहानिकारक पोस्ट और आतंकवादियों की भर्तियों का पता लगाने में मददगार साबित हो सकता है।’’
भाषा धीरज संतोष
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