scorecardresearch
Saturday, 10 January, 2026
होमदेशकर्नाटक : पारिवारिक पेंशन के लिए दो साल से दफ्तरों के चक्कर लगा रहे 85 वर्षीय वृद्ध

कर्नाटक : पारिवारिक पेंशन के लिए दो साल से दफ्तरों के चक्कर लगा रहे 85 वर्षीय वृद्ध

Text Size:

मंगलुरु (कर्नाटक), आठ जनवरी (भाषा) तटीय कर्नाटक के निवासी 85 वर्षीय वासु कोटयन पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने के लिए दो साल से भी अधिक समय से एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन नौकरशाही की उदासीनता के चलते उन्हें अभी तक पेंशन मिलनी शुरू नहीं हुई है।

कोटयन की पत्नी वरिजा कोटयन ने सुरत्कल स्थित विद्यादायिनी प्राथमिक विद्यालय में 36 साल अध्यापन कार्य किया और दिसंबर, 2013 में वह सेवानिवृत्त हो गईं। उन्हें करीब एक दशक तक पेंशन मिली और जनवरी-2023 में उनका निधन हो गया।

नियमों के मुताबिक, वासु कोटयन परिवार पेंशन के हकदार बन गए और उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ 23 मार्च, 2023 को मंगलुरु में प्रखंड शिक्षा अधिकारी के पास एक आवेदन पत्र जमा किया जिसे सिफारिश के साथ महालेखाकार के पास भेज दिया गया।

हालांकि, कोटयन का आरोप है कि कई बार संपर्क करने के बावजूद आवेदन पर कोई जवाब नहीं मिला। वह आठ बार बेंगलुरु में महालेखाकार कार्यालय गए और तीन बार आवेदन पत्र जमा किया और सात बार रिमाइंडर का पत्र भेजा।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने एक नॉमिनी की अनुपस्थिति और संयुक्त फोटोग्राफ नहीं होने का हवाला देते हुए आगे कार्यवाही नहीं की, जबकि मृत्यु प्रमाण पत्र और संयुक्त फोटोग्राफ आदि पहले ही जमा किए जा चुके हैं।

कोटयन ने बताया कि एक बार तो महालेखाकार कार्यालय द्वारा मृतक वरिजा कोटयन के नाम पर एक पंजीकृत पत्र भेजा गया जोकि वापस चला गया क्योंकि इसे प्राप्त करने के लिए हस्ताक्षर की आवश्यकता थी। “ क्या एक मृत व्यक्ति के लिए पंजीकृत पत्र प्राप्त करना संभव है।”

थक हार कर कोटयन ने जनवरी, 2025 में उडुपी स्थित मानवाधिकार संरक्षण फाउंडेशन से संपर्क किया जिसने इस मामले को महालेखाकार कार्यालय के समक्ष उठाया। इसके बाद महालेखाकार कार्यालय ने 11 अगस्त, 2025 को जिला कोषागार, मंगलुरु को पत्र लिखा और परिवार पेंशन मंजूर करने के लिए पेंशन के कागजात मांगे। कोटयन का कहना है कि इसके बावजूद, चार महीने बाद भी कोई पेंशन जारी नहीं की गई।

फाउंडेशन के ट्रस्टी डाक्टर रवींद्रनाथ शानबाग ने कहा कि अदालत का स्पष्ट आदेश है कि एक नॉमिनी की अनुपस्थिति में परिवार पेंशन, पात्र सदस्यों को दिया जाना चाहिए। फाउंडेशन ने इस मामले को केंद्रीय वित्त मंत्रालय के समक्ष उठाया है और कोटयन को तत्काल न्याय देने की मांग की है।

भाषा

सं, राजेंद्र रवि कांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments