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Wednesday, 25 February, 2026
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जेएलएफ में वक्ताओं ने माना: अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरे के बावजूद चुप्पी अधिक खतरनाक

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जयपुर, 19 जनवरी (भाषा) देश के मौजूदा हालात में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर मंडरा रहे संकट के मुद्दे पर काफी विचारोत्तेजक वाद-विवाद हुआ और मुद्दे के पक्ष और विपक्ष में बोलने वाले वक्ताओं ने मत भिन्नता के बावजूद इस बात पर सहमति जताई कि तमाम तरह के खतरों के बावजूद चुप्पी की स्थिति सबसे अधिक खतरनाक है।

उन्नीसवें जयपुर साहित्य महोत्सव (जेएलएफ) के अंतिम दिन विभिन्न वक्ताओं ने ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक खतरनाक विचार है’ विषय के पक्ष और विपक्ष में अपने अपने विचार रखे।

मुद्दे के पक्ष में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता आशीष गवांडे, भारत में जन्मे ब्रिटिश इतिहासकार, प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ शोधकर्ता और ‘व्हाट इज फ्री स्पीच’ किताब के लेखक फारा डाभोइवाला, पूर्व राज्यसभा सदस्य और पूर्व नौकरशाह पवन के वर्मा तथा शिवसेना (उबाठा) की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने विचार पुरजोर तरीके से रखे।

विषय के विरोध में अपने विचार रखने वालों में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कविता को एक विषय के तौर पर पढ़ाने वाली ऐलिस आस्वल्ड, ब्रिटिश पत्रकार, व्यंग्यकार और जानी-मानी टेलीविजन हस्ती इयान डेविड हिस्लोप, अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत नवतेज सरना तथा ऑस्ट्रेलिया में भारत के पूर्व उच्चायुक्त नवदीप सूरी ने अपने विचार रखे।

आशीष गवांडे ने ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक खतरनाक विचार है’ के पक्ष में बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि यदि यह आजादी केवल कुछ लोगों को हासिल है, तो यह एक खतरनाक विचार है। उन्होंने कहा कि केवल कुछ लोगों के हाथों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होने से युवा नेता उमर खालिद जैसे लोगों को सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है।

लेखक और पूर्व नौकरशाह पवन वर्मा ने कहा, ‘‘आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक खतरनाक विचार है। हमें इस पर बहस करते हुए संदर्भ को ध्यान में रखना होगा।’’ उन्होंने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद का नाम लिए बिना कहा, ‘‘ क्या आप बिना जमानत के जेल में रहना चाहेंगे।’’

उन्होंने मीडिया के संदर्भ में कहा कि सच्चाई को सामने रखने वाले वक्ताओं को टीवी पर होने वाली बहसों में एंकर ही दूसरे पक्ष के साथ मिलकर दरकिनार कर देते हैं।

उन्होंने कहा,‘‘ इसीलिए मैं कहता हूं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक खतरनाक विचार है।’’

वर्मा ने कहा, ‘‘मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में यकीन रखता हूं, यह एक अच्छा विचार है, लेकिन यह तेजी से खतरनाक होता जा रहा है, फिर चाहे अमेरिका हो, यहां या कहीं और।’’

भाषा नरेश

नरेश दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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