नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी में अनधिकृत तरीके से छापे मारने के आरोपी मिजोरम कैडर के एक वरिष्ठ आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। उन पर कई लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने और एक विदेशी नागरिक से पैसे मांगने का आरोप है।
विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) मनु गोयल खरब ने आईपीएस शंकर चौधरी को जमानत देने से इनकार करते हुए एक आदेश में कहा कि आवेदक द्वारा किए गए अपराध ‘‘न्याय प्रणाली की ईमानदारी को कमजोर करते हैं, लोगों का भरोसा खत्म करते हैं और पुलिस की छवि भी खराब करते हैं।’’
यह मामला 21 से 29 नवंबर, 2023 के बीच की गई कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है, जब चौधरी मिजोरम में पुलिस अधीक्षक (नारकोटिक्स) के तौर पर तैनात थे, और उन्होंने दिल्ली में मिजोरम पुलिस द्वारा किए गए इन छापों पर नजर रखी थी।
अदालत ने 28 फरवरी के आदेश में कहा, “रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों और सामग्री, खासकर गृह मंत्रालय के कहने पर की गई सतर्कता जांच और अपराधों की गंभीरता को देखते हुए, इस अदालत की राय है कि यह आवेदक (आईपीएस अधिकारी) को अग्रिम जमानत देने का सही मामला नहीं है।”
अभियोजन पक्ष के अनुसार, चौधरी, दिल्ली में मौजूद रहते हुए, एक टीम की अगुवाई कर रहे थे जिसने कथित तौर पर बिना कानूनी अधिकार के छापे मारे, पंचनामा जैसे जरूरी दस्तावेज तैयार किए बिना तलाशी और जब्ती की और कई लोगों को बिना किसी औपचारिक गिरफ्तारी या तय समय के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए हिरासत में लिया।
अदालत ने कहा कि कथित तौर पर सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि चौधरी 26 नवंबर, 2023 को तड़के हैरिसन नामक व्यक्ति के घर में घुस रहे हैं और करीब दो घंटे बाद निकल रहे हैं। फुटेज में कथित तौर पर हैरिसन को एक लॉकर और दो बैग लिए हुए देखा जा सकता है।
उसे वसंत विहार स्थित मिजोरम हाउस ले जाया गया था जहां वह 26 नवंबर से 29 नवंबर तक रहा।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि चौधरी ने हैरिसन को बिना औपचारिक गिरफ्तारी के 72 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा और इसी तरह मिजोरम में दर्ज मादक पदार्थों के मामलों में अन्य लोगों को भी हिरासत में रखा।
भाषा वैभव नरेश
नरेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
