बाली, 16 नवंबर (भाषा) जी-20 देशों ने बुधवार को विश्व समुदाय से धन शोधन तथा आतंकवाद के वित्त पोषण से प्रभावी रूप से निपटने के अपने प्रयासों को तेज करने के लिए कहा।
समूह ने वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर खरा उतरने की प्रतिबद्धता भी दोहरायी।
यहां दो दिवसीय जी-20 शिखर सम्मेलन के समापन पर जारी एक संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया है कि समूह सभी सदस्यों को एफएटीएफ के मानकों को प्रभावी तरीके से लागू करने तथा उन्हें अपनाने के लिए सहयोग मजबूत करने के वास्ते प्रेरित करता है।
घोषणापत्र में कहा गया है, ‘‘हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए धन शोधन, आतंकवाद के वित्त पोषण तथा विध्वंसक गतिविधियों के वित्त पोषण के प्रसार से प्रभावी रूप से निपटने के अपने प्रयास तेज करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं।’’
एफएटीएफ धन शोधन, आतंकवाद के वित्त पोषण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता से जुड़े अन्य खतरों से निपटने के लिए 1989 में स्थापित एक अंतर सरकारी संस्था है।
घोषणापत्र के अनुसार, जी-20 सदस्यों ने पेरिस स्थित एफएटीएफ की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर खरा उतरने तथा इन खतरों से निपटने के लिए वैश्विक कार्रवाई की अगुवाई करने के लिए अपने ‘एफएटीएफ स्टाइल रीजनल बॉडीज’ की ओर अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी।
इसमें कहा गया है, ‘‘हम वर्चुअल संपत्तियों खासतौर से ‘‘यात्रा नियम’’ और लाभकारी स्वामित्व की पारदर्शिता में अंतरराष्ट्रीय मानकों के क्रियान्वयन को बढ़ावा देने तथा व्यवस्थागत भ्रष्टाचार तथा और पर्यावरणीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई में उनकी भूमिका को पहचानने के लिए एफएटीएफ की पहलों का स्वागत करते हैं।’’
इंडोनेशिया ने बुधवार को बाली शिखर सम्मेलन के समापन के साथ ही आने वाले साल के लिए भारत को जी-20 की अध्यक्षता सौंपी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए गर्व की बात बताया।
जी-20 में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) शामिल हैं।
भाषा गोला माधव
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