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Saturday, 24 January, 2026
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पंजाब केसरी पर क्यों पड़े छापे? स्याही, जिन और ‘विच हंट’ का पूरा मामला

पंजाब केसरी का आरोप है कि केजरीवाल पर एक रिपोर्ट छापने के बाद आप सरकार एजेंसियों के ज़रिए उसे निशाना बना रही है. 10 से 15 जनवरी के बीच समूह की चार संपत्तियों पर छापे पड़े.

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चंडीगढ़: सुप्रीम कोर्ट ने इस हफ्ते पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वह पंजाब केसरी के प्रकाशन के खिलाफ कोई भी ज़बरदस्ती की कार्रवाई न करे. दरअसल मीडिया समूह ने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर्यावरण प्रदूषण के बहाने उसके प्रिंटिंग प्रेस बंद करने की धमकी देकर उसके संपादकों को “डरा-धमका” रही है.

पंजाब के राज्यपाल को दी गई दो अर्ज़ियों में, पंजाब केसरी समूह के 93-वर्षीय प्रधान संपादक विजय चोपड़ा ने आरोप लगाया कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पर एक खबर प्रकाशित करने के बाद उनके कारोबार पर छापे डालकर “जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है”, यानी “टार्गेटेड विच हंट” किया जा रहा है.

वहीं, सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह समूह अखबार चलाने की आड़ में खाद्य, आबकारी और प्रदूषण से जुड़े कई कानूनों का उल्लंघन कर रहा है और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का उनके पत्रकारिता कार्य से कोई लेना-देना नहीं है.

दिप्रिंट ने टिप्पणी के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव और आबकारी के वित्त आयुक्त डी.के. तिवारी से संपर्क किया. उन्होंने कहा कि मामला अदालत में लंबित है (सब ज्यूडिस), इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.

पंजाब सरकार ने शुक्रवार को जारी एक बयान में अखबार समूह के खिलाफ किसी भी तरह की दुश्मनी से इनकार किया.

दिप्रिंट आपको यहां सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और पंजाब के प्रमुख हिंदी दैनिक के बीच चल रहे इस टकराव को समझा रहा है.

छापे

10 जनवरी से 15 जनवरी के बीच, एक हफ्ते से भी कम समय में, पंजाब केसरी समूह की चार संपत्तियों पर, जिसमें तीन प्रिंटिंग प्रेस और एक होटल शामिल है—प्रदूषण नियंत्रण और आबकारी विभाग ने छापे मारे.

होटल को बंद करने के आदेश आबकारी नियमों के उल्लंघन का हवाला देकर दिए गए, जबकि प्रिंटिंग प्रेस पर प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाते हुए उन्हें बंद करने के आदेश दिए गए. आदेश के बाद कम से कम एक प्रेस की बिजली आपूर्ति भी काट दी गई.

तीन एफआईआर दर्ज की गईं. इनमें से दो एफआईआर में प्रेस के कर्मचारियों पर अधिकारियों को अपना काम करने से रोकने का आरोप लगाया गया. तीसरी एफआईआर होटल मालिकों, चोपड़ा परिवार, के खिलाफ दर्ज की गई, जिसमें होटल बार से बिना ज़रूरी होलोग्राम और क्यूआर कोड की जिन की दो बोतलें मिलने की बात कही गई. इसके अलावा, बार से सैकड़ों बोतलें एक्सपायर्ड ड्राफ्ट बीयर की भी बरामद हुईं, इसे भी एफआईआर में आरोप के तौर पर शामिल किया गया.

सह-मालिक अमित चोपड़ा के अनुसार, ये सभी पाबंदियां आप सरकार अखबार को दबाव में लाने और पंजाब के अन्य मीडिया हाउसों को सबक सिखाने के लिए लगा रही है.

चोपड़ा ने दिप्रिंट से बातचीत में कहा, “संदेश साफ है—या तो लाइन पर चलो, वरना…”

केजरीवाल से जुड़ी खबर

चोपड़ा ने कहा कि उनकी परेशानी तब शुरू हुई, जब पंजाब केसरी ने बीजेपी के उस आरोप की खबर छापी, जिसमें कहा गया था कि केजरीवाल को चंडीगढ़ में पंजाब सरकार सचिवालय के पास एक बड़ा सरकारी आवास आवंटित किया जा रहा है. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि टिप्पणी के लिए संपर्क करने पर आप ने उनसे यह खबर न छापने को कहा, लेकिन अखबार ने पार्टी का पक्ष शामिल करते हुए खबर प्रकाशित कर दी. इसके बाद अखबार में सरकारी विज्ञापन बंद हो गए.

इसके बाद, चोपड़ा के अनुसार, सरकार को यह लगने लगा कि अखबार कोई “बड़ा खुलासा” छापने वाला है, “एक सुबह उन्हें डर था कि ऐसी कोई खबर छप रही है. सलिए उन्होंने हमारे अखबारों की डिलीवरी के लिए जा रहे वाहनों को फिजिकल तौर पर रोक दिया.”

उन्होंने आगे कहा, “पुलिस ने वैन रोकीं, उनकी जांच की और जब अखबारों में उन्हें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला, तो वैन को जाने दिया. इसके कारण कई जगहों पर अखबार बिल्कुल नहीं पहुंच पाया या देर से पहुंचा. सरकार ने यह कहकर एक मामूली बहाना दिया कि वह हथियार और ड्रग्स की तलाश कर रहे थे.”

चोपड़ा ने आगे कहा, “इसके बाद अगले एक-दो महीनों तक, पंजाब में सत्ता संभाल रहे लोगों की तरफ से हमें कई बार अनुरोध मिले कि कौन-सी खबरें नहीं छापनी चाहिए, लेकिन हम अपने फैसले पर डटे रहे और खबरों का चयन पूरी तरह संपादकीय आधार पर किया. तभी उन्होंने हमें डराने के लिए कई सरकारी एजेंसियों को हमारे पीछे लगा दिया.”

‘सब कुछ बेकाबू हो गया’

अमित चोपड़ा के अनुसार, हालात तब पूरी तरह बिगड़ गए जब अखबार ने दिल्ली विधानसभा में आप नेता आतिशी के कथित बयान को प्रकाशित किया. बीजेपी के मुताबिक, आतिशी ने सत्र के दौरान गुरु तेग बहादुर के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी. हालांकि, आतिशी ने इस आरोप से इनकार किया है.

राज्यपाल को दी गई अपनी अर्जी में विजय चोपड़ा ने 10 जनवरी से शुरू होकर एक हफ्ते से भी कम समय में हुई घटनाओं का पूरा क्रम बताया.

11 जनवरी को, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने जालंधर में चोपड़ा परिवार के स्वामित्व वाले एक होटल पर छापा मारा. अगले दिन जीएसटी विभाग और फिर आबकारी विभाग ने होटल पर छापा डाला. 12 जनवरी को, फैक्ट्री विभाग ने लुधियाना और जालंधर में पंजाब केसरी के प्रिंटिंग प्रेस पर एक साथ छापे मारे.

13 जनवरी को, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने जालंधर के होटल पर छापा मारा और आबकारी विभाग ने होटल के शराब लाइसेंस को रद्द करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया. 14 जनवरी को होटल का शराब लाइसेंस रद्द कर दिया गया और उसकी बिजली काट दी गई. 15 जनवरी को लुधियाना और जालंधर के प्रिंटिंग प्रेस पर फिर से छापे पड़े—इस बार पीपीसीबी द्वारा.

चोपड़ा ने कहा, “यह पहले से सोची-समझी, योजनाबद्ध कार्रवाई थी, जिसका एकमात्र मकसद हमें निशाना बनाना और हमारी आवाज़ दबाना था. सरकार को भले ही अचानक जांच करने का अधिकार हो, लेकिन जिस तरीके से यह सब किया गया, वह चौंकाने वाला है.”

उन्होंने कहा, “उनकी टीमें दीवारें फांद रही थीं, हमारे लोगों को पीट रही थीं, ताले तोड़ रही थीं.” एक मामले में, उन्होंने दावा किया कि टीम ने सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड करने वाला टूल भी काटकर अपने साथ ले लिया.

चोपड़ा ने आगे बताया, “हम जैसा दिखाया जा रहा है, वैसा शराब का कारोबार नहीं करते. हमने पिछले साल जालंधर में सभी ज़रूरी अनुमतियों और लाइसेंस के साथ एक होटल खोला था. उसे चलाने का ठेका सरोवर ग्रुप को दिया गया था. होटल बार के लिए शराब लाइसेंस हमें आप सरकार के कार्यकाल में ही मिले थे.”

उन्होंने आगे कहा, “होटल पर छापा मारने वाली आबकारी टीम ने कहा कि शराब सही जगह पर स्टोर नहीं की गई थी. उन्होंने बीयर के क्रेट्स को एक्सपायर्ड बताया और दो जिन की बोतलें बिना क्यूआर कोड के पाईं और यह सब छापे वाले दिन ही हमें कारण बताओ नोटिस देने और अगले दिन लाइसेंस रद्द करने के लिए काफी था.”

इसके बाद, चोपड़ा ने कहा कि प्रदूषण बोर्ड ने यह कहते हुए उल्लंघन पाया कि होटल की लॉन्ड्री में इस्तेमाल किया गया साबुन वाला पानी पर्यावरण के लिए ज़हरीला है. “पूरी कार्रवाई लोहड़ी की छुट्टियों के दौरान हुई, इसलिए हमारे पास बचाव की तैयारी तक का समय नहीं था.”

उन्होंने कहा, “उन दो कथित अनधिकृत जिन की बोतलों और बीयर की बोतलों के लिए मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. लाइसेंस रद्द होने और प्रदूषण बोर्ड की कार्रवाई के बाद कुछ ही घंटों में होटल की बिजली काट दी गई. हमने जनरेटर से होटल चलाने की कोशिश की, लेकिन हमें वह भी नहीं करने दिया गया. आखिरकार हमें होटल के मेहमानों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा.”

संपर्क करने पर जालंधर की पुलिस आयुक्त धनप्रीत कौर ने कहा कि उन्हें एफआईआर दर्ज होने की जानकारी नहीं है और वह इसकी जांच करेंगी.

‘उल्लंघन को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता’

पंजाब सरकार ने पंजाब केसरी अखबार समूह के खिलाफ किसी भी तरह की बदले की कार्रवाई से इनकार करते हुए अपने बयान में कहा कि “जालंधर के होटल में की गई आबकारी कार्रवाई के दौरान बिना मंज़ूरी वाली जगहों पर रखी गई 800 से ज्यादा शराब की बोतलें जब्त की गईं.”

बयान में आगे कहा गया कि “अनिवार्य आबकारी होलोग्राम और क्यूआर कोड के बिना शराब की बोतलें मिलीं” और यह भी कि “दस्तावेज़ी सबूत मिले हैं कि एक्सपायर हो चुकी ड्राफ्ट बीयर को इंसानों के पीने लायक न रहने के बावजूद कई दिनों तक ग्राहकों को बेचा गया.” सरकार ने दावा किया कि शराब लाइसेंस का निलंबन “पूरी तरह तय प्रक्रिया के अनुसार” किया गया.

सरकार ने यह भी कहा कि होटल से लॉन्ड्री में इस्तेमाल होने वाले रसायन बिना किसी ट्रीटमेंट के ज़मीन और सीवर में छोड़े जा रहे थे और होटल चलाने के लिए ज़रूरी अनुमति 31 मार्च 2025 को खत्म हो चुकी थी.

हालांकि, चोपड़ा ने उनके तीन प्रिंटिंग प्रेस पर लक्षित कार्रवाई का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “श्रम और फैक्ट्री विभाग के अलावा, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमों ने लुधियाना और जालंधर में ऐसे छापे मारे, जैसे यह किसी दुश्मन देश में किया गया बहु-शहर सैन्य अभियान हो. उनके मुताबिक, अखबार छापने में इस्तेमाल होने वाली स्याही सही तरीके से बाहर नहीं निकाली जा रही है, जबकि मेरा मानना है कि यह पर्यावरण के लिए ज़हरीली नहीं है.”

पीपीसीबी, जालंधर के क्षेत्रीय अधिकारी ने दिप्रिंट द्वारा भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया.

शुक्रवार को सरकार की ओर से जारी नोट में कहा गया कि श्रम और फैक्ट्री विभाग की जांच में “श्रम कानूनों, सुरक्षा मानकों और वैधानिक रिकॉर्ड रखने की शर्तों के गंभीर और बार-बार उल्लंघन” सामने आए.

नोट में आगे कहा गया, “इन जांच रिपोर्टों से आबकारी, पर्यावरण और श्रम से जुड़े मामलों में नियमों की लगातार अनदेखी का एक पैटर्न सामने आया है…जब कई वैधानिक प्राधिकरण तारीखों, धाराओं और हस्ताक्षरों के साथ लिखित रूप में उल्लंघन दर्ज करते हैं, तो कार्रवाई वैकल्पिक नहीं रहती. यह एक कानूनी जिम्मेदारी होती है.”

‘धर-पकड़’

हालांकि, चोपड़ा ने सरकारी कार्रवाई के समय और पूरे ऑपरेशन के तरीके पर सवाल उठाए.

उन्होंने कहा, “तो इतने सालों तक हम जो कुछ कर रहे थे, वह सब ठीक और कानूनी था और कुछ ही दिनों में वही सब अनधिकृत या अवैध कैसे हो गया? पंजाब में कितने दूसरे होटलों को उसी दिन बंद करने का आदेश दिया गया, जिस दिन पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उल्लंघन मिला? अगर यह लक्षित ‘धर-पकड़’ नहीं है, तो फिर क्या है?”

चोपड़ा ने आगे आरोप लगाया कि सरकार चाहती थी कि समूह अपना कामकाज बंद कर दे और अखबार की छपाई रोक दे—ऐसा तो आपातकाल के दौरान भी नहीं हुआ था. उन्होंने कहा, “इस मोड़ पर हमने फैसला किया कि किसी भी कीमत पर अखबार की छपाई बंद नहीं करेंगे और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे, तभी हमने पहली बार खुलकर बात की, राज्यपाल को ज्ञापन दिया और अदालत का रुख किया.”

राज्यपाल को दिए गए अखबार के ज्ञापन से राजनीतिक हलचल मच गई और विपक्षी दल अखबार के समर्थन में आ गए और आप सरकार पर हमलावर हो गए.

सरकार ने “लक्षित हमले” के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चोपड़ा परिवार का दावा “कई वैधानिक प्राधिकरणों द्वारा कानून के तहत की गई कार्रवाई से ध्यान भटकाने की कोशिश” है.

उत्पीड़न के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने कहा कि प्रेस की आज़ादी की आड़ में श्रम, सुरक्षा और पर्यावरण कानूनों के पालन को रोका नहीं जा सकता.

पंजाब सरकार ने “पहले से तय विच-हंट” के दावे को भी खारिज किया.

सरकार ने कहा, “विभिन्न विभागों की एक साथ की गई कार्रवाई सिर्फ यह दिखाती है कि उल्लंघन लंबे समय से बिना कार्रवाई के पड़े थे. कानून के तहत की गई कार्रवाई, भले ही देर से हो, सिर्फ इसलिए प्रेरित नहीं हो जाती कि उसे आखिरकार लागू किया गया.”

पंजाब सरकार के विज्ञापनों को लेकर लगाए गए आरोप पर राज्य ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक विज्ञापन कोई अधिकार नहीं हैं और इन्हें नियामकीय जांच से बचने के लिए ढाल की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

चोपड़ा ने कहा, “हम पंजाब का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अखबार हैं. तो सरकार की सूचना फैलाने की नीति क्या है? क्या उसे सबसे ज्यादा पहुंच वाले मीडियम को विज्ञापन नहीं देना चाहिए, बजाय सिर्फ उन लोगों को देने के जो उसकी बात मानें?”

पुराना मीडिया समूह

जालंधर स्थित यह समूह पंजाब केसरी, जगबानी और हिंद समाचार प्रकाशित करता है. पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को दिए गए ज्ञापनों पर विजय चोपड़ा के अलावा अविनाश और अमित चोपड़ा के भी हस्ताक्षर हैं.

इस अखबार की शुरुआत स्वतंत्रता सेनानी लाला जगत नारायण ने की थी, जो लाला लाजपत राय से जुड़े थे. आज़ादी से पहले, नारायण भाई परमानंद की हिंदी साप्ताहिक पत्रिका आकाशवाणी के संपादक बने और स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण कई बार जेल गए.

1949 में जगत नारायण ने जालंधर, पंजाब से उर्दू दैनिक अखबार हिंद समाचार शुरू किया और 1966 में हिंदी दैनिक पंजाब केसरी की शुरुआत की. 1978 में समूह ने पंजाबी अखबार जगबानी भी शुरू किया.

पंजाब में उग्रवाद के दौर में यह अखबार आतंकवादियों के विरोध में खड़ा रहा और 1981 में जगत नारायण की हत्या कर दी गई. उनके बाद जिम्मेदारी संभालने वाले रमेश की भी 1984 में हत्या कर दी गई. रमेश की मौत के बाद उनके भाई विजय चोपड़ा, जो पद्म श्री सम्मानित हैं, ने कमान संभाली.

आगे क्या

मामला अब अदालत में है. मंगलवार को शीर्ष अदालत ने मौखिक उल्लेख के बाद अखबार की याचिका पर सुनवाई की और आदेश दिया कि हिंदी दैनिक की छपाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे.

इससे पहले समूह ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया था, जहां सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया गया था. इसके बाद समूह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की क्योंकि उन्हें कामकाज बंद होने का डर था और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई थी.

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि अखबार की छपाई बिना किसी बाधा के जारी रहेगी.

शुक्रवार को हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए अखबार समूह को पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई से जुड़े मामलों में राहत के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का रुख करने को कहा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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