Wednesday, 25 May, 2022
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प्रयागराज में अमानवीयता- पैसे न चुका पाने पर निजी अस्पताल ने बिना पेट सिले बच्ची को बाहर निकाला, मौत

बच्ची के चाचा के मुताबिक, इस ऑपरेशन के लिए अस्पताल ने 5 लाख रुपये मांगे थे लेकिन महज़ 2 लाख ही दे पाये थे. इस वजह से अस्पताल ने इलाज रोक दिया जिसके बाद बच्ची की मौत हो गई.

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लखनऊ : यूपी के प्रयागराज जिले से अमानवीयता के का मामला सामने आया है. यहां के एक निजी अस्पताल पर 3 साल की बच्ची के इलाज में लापरवाही का आरोप है. दरअसल बच्ची के इलाज के लिए पूरी रकम दे पाने में परिवार ने असमर्थता जाहिर की, जिसके बाद 3 साल की बच्ची का पेट सिले बिना ही उसे बाहर कर दिया गया. पैसों के बिना इलाज के अभाव में बच्ची की मौत हो गई.

बच्चे के चाचा सूरज मिश्रा ने दिप्रिंट को बताया कि तीन साल की बेटी को पेट में दर्द था जिसके बाद उसके इलाज के लिए प्रयागराज के धूमनगंज के रावतपुर के एक बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. कुछ दिन बाद बच्ची के पेट का ऑपरेशन किया गया. ऑपरेशन में बच्ची के टांके नहीं सिले गए. इसका कारण था कि बच्ची का परिवार मांगी हुई रकम नहीं जमा कर पाया. बच्ची के चाचा के मुताबिक, इस ऑपरेशन के लिए अस्पताल की ओर से 5 लाख रुपये मांगे गए लेकिन उनका परिवार महज़ 2 लाख रुपये ही दे पाया. इस वजह से अस्पताल ने इलाज रोक दिया जिसके बाद बच्ची की मौत हो गई.

अस्पताल की ओर से परिवार के आरोपों को गलत बताया गया है. निजी अस्पताल के संचालक यूनाइटेड ग्रुप के पीआरओ की ओर से दिए गए बयान में कहा गया है कि बच्ची को इस तरह के हालत में नहीं भेजा गया जैसा कि पैरेंट्स आरोप लगा रहे हैं. इसके अलावा इलाज में 1.25 लाख रुपये का खर्च आया था जबकि पैरेंट्स की ओर से 6,370 रुपये ही चुकता किए गए जिसकी रसीद अस्पताल के पास है.

सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़ा पोस्ट वायरल होते ही प्रयागराज के डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए एक जांच टीम बना दी है. इसमें एडीएम सिटी और जिले के सीएमओ की संयुक्त टीम पूरे घटनाक्रम की जांच करेंगे साथ ही डीएम ने यह भी कहा है इस पूरे घटनाक्रम के हर पहलुओं की सही से जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी.

दूसरी ओर बच्ची के पिता की तहरीर पर कौशांबी पुलिस ने अस्पताल के एक डाॅक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. बच्ची का परिवार कौशांबी का रहने वाला है.

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1 टिप्पणी

  1. pathaksic1985@gmail.com यह गलत है कि किसी बीमारी के पास पैसे ना हो तो उसकी जान ले लै ना अस्पताल वालों को समझना चाहिए और उनका इलाज कर उनसे इंस्टॉलमेंट में भी पेमेंट नहीं जा सकती

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