इंदौर: इंदौर में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के स्थानीय नेता कई महीनों से शिकायत कर रहे हैं कि जिला स्तर के अधिकारी उन्हें दरकिनार कर सीधे भोपाल से आदेश ले रहे हैं. इससे अहम हालात में चुने हुए जनप्रतिनिधि हाशिए पर चले जाते हैं. वरिष्ठ पार्टी नेताओं का कहना है कि यह स्थिति काफी समय से बनी हुई है. भागीरथपुरा जल प्रदूषण संकट के दौरान यह बात साफ तौर पर सामने आई, जिसे वे पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई के भीतर के ढांचागत तनाव को उजागर करने वाला मानते हैं.
राज्य मंत्री और बीजेपी के इंदौर विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने पानी प्रदूषण संकट सामने आने से पहले ही इस मुद्दे को उठाया था. खबरों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में एक समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से कहा था, “अधिकारी आपका नाम लेकर हमें डराते हैं.”
इंदौर में बीजेपी की कमांड सिस्टम और जटिल हो जाती है क्योंकि मुख्यमंत्री खुद जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं—यानी वह पार्टी के ऐसे पदाधिकारी हैं, जिनके पास पार्षदों और यहां तक कि विधायकों पर भी सर्वोच्च अधिकार होता है. प्रभारी मंत्री बीजेपी का एक आंतरिक संगठनात्मक पद होता है, जो पार्टी द्वारा दिया जाता है और जिसका कोई कानूनी या प्रशासनिक अधिकार नहीं होता.
लेकिन पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री की यह दोहरी भूमिका अधिकारियों को स्थानीय नेतृत्व के बजाय भोपाल से आने वाले निर्देशों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करती है.
स्थानीय पार्षदों का कहना है कि भागीरथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई को लेकर उन्होंने कई हफ्ते पहले ही नगर निगम अधिकारियों से शिकायत की थी, इससे पहले कि इस वजह से 10 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों अन्य अस्पताल पहुंच गए.
बीजेपी पार्षद कमल वाघेला ने पिछले हफ्ते दिप्रिंट से कहा, “हम कई महीनों से इस मुद्दे (पानी की गंदगी) को लेकर शिकायत कर रहे थे, लेकिन यहां के अधिकारी हमारी कॉल तक नहीं उठाते और हमारी शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते.” इंदौर बीजेपी नेताओं के मुताबिक, मुख्यमंत्री सहित वरिष्ठ नेता पानी संकट पर पार्टी की प्रतिक्रिया तय करने में सीधे तौर पर शामिल थे.
इंदौर बीजेपी के एक सूत्र ने कहा, “हर महीने मोहन यादव इंदौर आते हैं क्योंकि वह प्रभारी मंत्री हैं. अब इन स्थानीय नेताओं को बलि का बकरा बना दिया गया है, लेकिन किसी को यह पूछना चाहिए कि ये अधिकारी इंदौर के नेताओं की बात क्यों नहीं सुन रहे थे. शायद वे भोपाल की सुन रहे हैं.”
सूत्र ने आगे कहा, “यह घटना प्रशासन की गंभीर चूक है. जैसे ही शिकायतें आने लगी थीं, रोकथाम के कदम उठाए जाने चाहिए थे. जान का नुकसान किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है.”
भागीरथपुरा की स्थिति के बाद विजयवर्गीय को केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया गया. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मकसद संकट पर पार्टी की सार्वजनिक बयानबाजी को व्यवस्थित करना और यह सुनिश्चित करना था कि नेताओं के बयान सरकार के आधिकारिक रुख के अनुरूप हों.
इसके बाद विजयवर्गीय इंदौर लौटे, जहां उन्होंने स्थानीय नेताओं और अधिकारियों से मुलाकात की, जिससे स्थिति पर सख्त राजनीतिक निगरानी का संकेत मिला.
विपक्ष का हमला तेज़
इस घटना ने बीजेपी के “ट्रिपल-इंजन” शासन मॉडल पर विपक्ष के हमले तेज कर दिए हैं. “ट्रिपल-इंजन” से मतलब है—केंद्र में सरकार, मध्य प्रदेश में सरकार और इंदौर नगर निगम पर बीजेपी का नियंत्रण.
स्थानीय नेताओं की शिकायतों को आधार बनाते हुए कांग्रेस प्रवक्ता हर्ष जैन ने मांग की कि बीजेपी नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए.
जैन ने कहा, “बीजेपी नेता खुद अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे, उनकी कॉल तक नहीं उठा रहे, जबकि राज्य में ‘ट्रिपल-इंजन’ सरकार है. ऐसे में अधिकारियों के साथ-साथ बीजेपी नेताओं को भी सस्पेंड किया जाना चाहिए.”
भागीरथपुरा जल प्रदूषण संकट के बाद छह वरिष्ठ नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. इसमें इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाना और अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया समेत अन्य को निलंबित करना शामिल है.
4 जनवरी को कांग्रेस कार्यकर्ताओं का एक समूह भागीरथपुरा प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचा था, लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोक दिया और काले झंडे दिखाए.
समूह में शामिल एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने कहा, “हम वहां सिर्फ परिवार वालों से मिलने गए थे, लेकिन बीजेपी ने हंगामा किया और हमें रोक दिया. हम परिवारों से मिल सकते हैं, है ना? लेकिन वे माहौल खराब करना चाहते थे.”

हालांकि, बीजेपी के एक कार्यकर्ता ने कहा कि कांग्रेस वहां राजनीति करने आई थी, “वे यहां के नहीं हैं, बाहर से आए हैं. वे सिर्फ शांति भंग करना चाहते थे.”
भागीरथपुरा के निवासियों ने कहा कि संकट के बाद राजनीतिक ध्यान कम हो गया है, जबकि औद्योगिक कॉलोनी के 120 लोग अभी भी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि यह संकट पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का खेल बन गया है और इस बात की कोई साफ जानकारी नहीं है कि आखिर इस त्रासदी को रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी.
भागीरथपुरा के निवासी मनोज ने कहा, “दोनों पार्टियां राजनीति कर रही हैं, हमारे इलाके का नाम खराब हो रहा है. कोई भी परिवारों की मदद नहीं कर रहा, सब अपने फायदे के लिए यहां आए हैं.”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पिछले हफ्ते एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि इंदौर में जो हुआ, वह लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम की विफलता है.
पटवारी ने कहा, “इंदौर कभी देश भर में सफाई के लिए जाना जाता था, आज भागीरथपुरा में हुई मौतों की वजह से चर्चा में है. यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी है. कांग्रेस हर वार्ड में बैठकें करेगी, लोगों से संवाद करेगी, मृतकों को श्रद्धांजलि देगी और नगर निगम की विफलताओं को उजागर करेगी.”
उन्होंने आगे कहा, “मैं नागरिकों से—चाहे उनकी विचारधारा कुछ भी हो, अपील करता हूं कि जब भ्रष्टाचार उनके घरों तक पहुंच जाए, तो विपक्ष को मजबूत करें. हम विपक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे और पूरे राज्य में पानी के भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था के ऑडिट की मांग करेंगे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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