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Tuesday, 10 February, 2026
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इंदौर पेयजल त्रासदी : मन्नतों के बाद जन्मी लड़की की मौत, 76 वर्षीय पुरुष ने भी दम तोड़ा

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इंदौर (मध्यप्रदेश), 10 फरवरी (भाषा) देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप के बाद लगातार हो रही मौतों के कारण इस क्षेत्र के घरों में विलाप के स्वर थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

ताजा मामलों में दो साल की लड़की और 76 वर्षीय पुरुष के दम तोड़ने के बाद उनके परिजनों ने उनकी मौत के लिए दूषित पेयजल की आपूर्ति को जिम्मेदार ठहराया है।

दोनों मामलों को मिलाकर स्थानीय लोगों ने दिसंबर के आखिर में शुरू हुए इस प्रकोप में अब तक कुल 35 लोगों की मौत का दावा किया है।

भागीरथपुरा में रहने वाली सोनम प्रजापति ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उनकी दो वर्षीय बेटी सिया को दूषित पानी पीने से 27 दिसंबर को दस्त की समस्या हुई थी।

उन्होंने बताया, ‘‘इलाज के बाद मेरी बेटी की सेहत में सुधार हुआ था। हालांकि, कुछ दिन बाद उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई और हमने उसे अस्पताल में भर्ती कराया जहां उसने मंगलवार सुबह दम तोड़ दिया।’’

शोक में डूबी मां ने आंसुओं पर काबू पाने की कोशिश करते हुए कहा,‘‘मेरी बेटी कई मन्नतों के बाद पैदा हुई थी। भगवान ने मेरी बेटी को मुझसे छीन लिया।’’

भागीरथपुरा में कई सालों तक निजी विद्यालय संचालित करने वाले शालिग्राम ठाकुर (76) की मौत के बाद उनके घर में भी मातम पसरा है।

ठाकुर के बेटे कपिल ने बताया,‘‘दूषित पेयजल के कारण उल्टी-दस्त की समस्या के कारण मेरे पिता को दो जनवरी को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो अस्पताल बदलने के बाद भी उनकी तबीयत सुधर नहीं सकी और चिकित्सकों ने जवाब दे दिया। आखिरकार हम अपनी मर्जी से उन्हें सोमवार को घर ले आए और इसके दो घंटे बाद उन्होंने आखिरी सांस ली।’’

उन्होंने बताया कि उनके पिता उन मरीजों में शामिल थे जिनके हाल-चाल जानने के लिए लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी 17 जनवरी को शहर के निजी अस्पताल पहुंचे थे।

कपिल ने कहा,‘‘मेरे पिता की मौत के बाद प्रशासन के किसी भी नुमाइंदे ने मुझसे अब तक संपर्क नहीं किया है।’

भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों की मौत के वास्तविक आंकड़े को लेकर शुरुआत से ही विरोधाभासी स्थिति बनी हुई है। स्थानीय अधिकारी इस आंकड़े के बारे में स्थिति स्पष्ट करने से बच रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के विशेषज्ञों की एक समिति भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त के प्रकोप के कारण जान गंवाने वाले सभी लोगों का ‘डेथ ऑडिट’ (मौत के कारण की जांच) कर रही है।

राज्य सरकार ने इस समिति की रिपोर्ट मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में 27 जनवरी को पेश की थी।

रिपोर्ट में संभावना जताई गई थी कि भागीरथपुरा में 16 लोगों की मौत का संबंध इस इलाके में दूषित पेयजल के कारण फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से हो सकता है।

उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग अदालत के आदेश पर दूषित पेयजल मामले की न्यायिक जांच कर रहा है।

भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के दौरान जिन मरीजों की मौत हुई है, उनमें से ज्यादातर लोग निम्न और मध्यम आय वर्ग के हैं।

राज्य सरकार ने इस प्रकोप के दौरान जान गंवाने वाले 20 से ज्यादा लोगों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है।

अधिकारियों का दावा है कि इनमें से कुछ लोगों की मौत दूसरी बीमारियों और अन्य कारणों से भी हुई है, लेकिन सभी मृतकों के परिवारों को मानवीय आधार पर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

भाषा

हर्ष रवि कांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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