Thursday, 11 August, 2022
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गौ रक्षा अभियान के बावजूद, भारत का गोमांस निर्यात फिर बढ़ा

2015-16 में गौ-मांस के निर्यात में गिरावट आई थी, मॉब लिंचिंग पहली घटना के बाद से गौ-मांस निर्यात पर फिर से काबू पा लिया गया है.

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नई दिल्ली: भारत के बीफ निर्यात में बढ़ोतरी देखी गई है, हालांकि नरेंद्र मोदी सरकार की पिछले साल की बीफ निर्यात में आई गिरावट की तुलना में यह बढ़ोतरी बहुत ही मामूली है. एक प्रमुख ग्लोबल दक्षिणपंथी संगठन के उन दावों के बावजूद दिसमें कहा गया है गौ रक्षकों पर बनाए गए सख्त कानून के बनाए जाने के बावजूद बीफ निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा बीफ़ निर्यातक देश है. यहां बूचड़खाने से केवल भैंस के मांस के निर्यात की अनुमति है गाय का मांस पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

फरवरी में जारी ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में गौरक्षा समूहों द्वारा किए गए हमलों से भारत के बीफ निर्यात में गिरावट देखी गई थी.

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के डाटा के मुताबिक, जोकि वाणिज्य मंत्रालय के अधीन है. यह दर्शाता है कि 2014 में जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली थी तब से बीफ निर्यात में काफी वृद्धि हुई थी.

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वित्त वर्ष 2014-15 में गोमांस का निर्यात 14,75,540 मीट्रिक टन था, जो 10 वर्षों में सबसे अधिक था. 2013-14 में यह निर्यात 13,65,643 मीट्रिक टन था.

हालांकि, यह आंकड़ा इन्हीं वित्तीय वर्षों में कम होता गया और इसमें करीब 11 फीसदी की गिरावट तक देखी गई. इस दौरान निर्यात 13,14,161 मीट्रिक टन तक गिर गया था.

तेजी से गौ-मांस की खपत में गिरावट मॉब लिंचिंग की पहली घटना के साथ हुई. सितंबर 2015 में उत्तर प्रदेश के दादरी जिले के बिसारा गांव में गोहत्या के संदेह पर भीड़ ने मोहम्मद अखलाक की हत्या कर दी थी.

हालांकि, अगले दो वित्तीय वर्षों में बीफ निर्यात में मामूली वृद्धि हुई है. 2016-17 में बीफ़ निर्यात 13,30,013 मीट्रिक टन था – 2015-16 में 1.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई. और 2017-18 में यह आंकड़ा फिर से मामूली रूप से बढ़कर 13,48,225 मीट्रिक टन हो गया. 2016-17 में 1.3 प्रतिशत वृद्धि हुई.

ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘भारत दुनिया में सबसे बड़ा गोमांस निर्यातक है. जो प्रति वर्ष 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का भैंस के मांस निर्यात करता है.’ 2014 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद निर्यात में ज्यादातर गिरावट आई है और उत्तर प्रदेश राज्य में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार द्वारा की गयी कार्रवाई ने शीर्ष मांस उत्पादक राज्य में व्यापार के भविष्य के बारे में और अनिश्चितताओं को जन्म दिया है.

(एचआरडब्ल्यू की रिपोर्ट में अकेले बीफ निर्यात के मूल्य पर डेटा पर निर्भर है और मात्रा पर नहीं.)

मात्रा बढ़ी लेकिन कीमतों में गिरावट आई

एपीडा के आंकड़ों से पता चलता है भले ही 2014 से पहले भारतीय बीफ निर्यात में वृद्धि गति बरकरार नहीं रह सकी हो, लेकिन निर्यात का स्तर मोटे तौर पर स्थिर ही रहा है.

हालांकि, बीफ के मूल्य में गिरावट आई है.

उदाहरण के लिए भले ही 2016-17 में गौ-मांस निर्यात की मात्रा 13,30,013 मीट्रिक टन से बढ़कर 2017-18 में 13,48,225 मीट्रिक टन हो गई हो, वहीं इस अवधि में बीफ निर्यात का मूल्य 26,9303.16 करोड़ रुपये से घटकर 25,988.45 करोड़ रुपये रह गया.

भारतीय निर्यात संगठनों के महाप्रबंधक (फियो ) और सीईओ अजय सहाय ने कहा, हालांकि निर्यात की मात्रा में वृद्धि और मूल्य में समानांतर गिरावट वैश्विक कीमतों में भिन्नता का परिणाम हो सकती है, दोनों के बीच कोई निश्चित संबंध नहीं है.

उन्होंने तर्क दिया, ‘आंकड़ों के कुछ अन्य स्रोत से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में मूल्य और मात्रा दोनों में वृद्धि हुई है’.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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