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Friday, 28 February, 2025
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भारतीय विज्ञान संस्थान को मिला 425 करोड़ रुपये का अनुदान

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बेंगलुरु, 18 फरवरी (भाषा) भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) को 425 करोड़ रुपये का अनुदान देने वाले बागची और पार्थसारथी दंपतियों का कहना है कि यह परमार्थ कार्य करने, दूसरों के लिए जरूरत महसूस करने और संसाधनों को साझा करने की एक पहल है।

बेंगलुरु स्थित आईआईएससी मुख्यालय ने सुष्मिता और सुब्रतो बागची तथा राधा और एन एस पार्थसारथी के साथ एक साझेदारी की है, जिसके तहत बागची-पार्थसारथी नामक एक अस्पताल की स्थापना की जाएगी।

आईआईएससी के निदेशक-प्रोफेसर गोविंदन रंगराजन ने बताया, ‘‘बागची और पार्थसारथी दंपति सामूहिक रूप से 800 बिस्तरों की बहु-विशिष्ट सुविधा वाले इस गैर-लाभकारी अस्पताल के निर्माण में मदद के लिए 425 करोड़ रुपये दान करेंगे। आईआईएससी को इससे पहले इतनी बड़ी राशि किसी निजी व्यक्ति की ओर से कभी अनुदान में नहीं मिली है।’’

सुब्रतो बागची और एन एस पार्थसारथी माइंडट्री के सह-संस्थापक हैं, जो बेंगलुरु स्थित एक सूचना प्रौद्योगिकी सेवा और परामर्श कंपनी है।

सुष्मिता बागची ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘यह दान देने के बारे में नहीं है जितना कि यह परमार्थ कार्य करने के बारे में है। परोपकारी होने का सार दूसरों के लिए सहानुभूति रखना है। दूसरों के लिए जरूरत महसूस करना। संवेदनशील होना। ये ऐसे मूल्य हैं जो हमारे दोनों परिवार के माता-पिता द्वारा हमारे भीतर बचपन में ही विकसित किए गए थे।“

उन्होंने कहा ‘‘हमने छोटे-छोटे तरीकों से उनके नक्शे-कदम पर चलते हुए इसका पालन किया। 1990 के दशक में जब हम अमेरिका में रहते थे, तो समाज में हर कोई अहम मुद्दों के साथ जिस तरह से जुड़ता है, उससे हम बहुत प्रभावित हुए। जिस तरह से वे स्वयंसेवा और मदद करते हैं… वह लाजवाब है। हमारे भारत लौटने पर, इससे हमें संस्थानों से जुड़ने में मदद मिली।’’

राधा पार्थसारथी ने कहा कि वे लंबे समय से छोटे-मोटे तौर पर परमार्थ कार्यों में शामिल रही हैं।

राधा ने कहा, ‘‘हालांकि, यह पहली बार है जब हम आईआईएससी जैसी संस्था में इतना बड़ा परोपकारी योगदान दे रहे हैं।’’

राधा ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हम मानते हैं कि इन संसाधनों को नियति द्वारा हमारे हाथों में रखा गया है और उनका उपयोग ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के तहत लोगों की भलाई के लिए किया जाना है। महामारी ने तात्कालिकता की भावना को आगे बढ़ाया। हमारा इरादा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के लिए इनका उपयोग करना था।’’

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने एक स्नातकोत्तर मेडिकल स्कूल और अस्पताल बनाने की दिशा में आईआईएससी की योजना और दृष्टिकोण के बारे में सुना तो उन्होंने अनुदान देने का फैसला किया।

भाषा रवि कांत मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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