नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत की असली ताकत इस बात में है कि भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाला देश न रहे, बल्कि खुद नई तकनीक बनाए. उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भारत को दुनिया की टॉप-3 सुपरपावर बनाने का लक्ष्य है.
ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की उनकी AI नीति तीन स्तंभों—सार्वभौमिकता, समावेश और नवाचार—पर आधारित है. उन्होंने कहा कि भारत के AI मॉडल दुनिया भर में इस्तेमाल होंगे और अरबों लोगों को उनकी अपनी भाषा में सेवाएं देंगे, जिससे लाखों उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा होंगी.
प्रधानमंत्री ने कहा कि AI के जरिए भारत डिजिटल सदी का अपना कोड खुद लिखेगा. IndiaAI मिशन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि तकनीक भारत के मूल्यों के अनुरूप हो और देश को जिम्मेदार AI लीडर के रूप में स्थापित करे.
उन्होंने कहा कि AI लोगों की नौकरियां छीनने वाला नहीं, बल्कि अवसर बढ़ाने वाला होगा. सरकार युवाओं को AI के भविष्य के लिए तैयार करने के लिए बड़े स्तर पर स्किलिंग और री-स्किलिंग कार्यक्रम चला रही है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टैनफोर्ड ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 में भारत तीसरे स्थान पर रहा, जो AI रिसर्च, टैलेंट और अर्थव्यवस्था में देश की मजबूत स्थिति को दिखाता है. India AI Impact Summit 2026 भी वैश्विक AI एजेंडा तय करने में भारत की भूमिका को मजबूत करेगा.
एक अन्य बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि AI भारत के IT सेक्टर को खत्म नहीं कर रहा, बल्कि उसे बदल रहा है. उन्होंने कहा कि AI की मदद से भारत का IT सेक्टर 2030 तक 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
उन्होंने बताया कि IndiaAI मिशन के तहत देश में मजबूत AI इकोसिस्टम बनाया जा रहा है. सरकार हेल्थकेयर, कृषि, शिक्षा और सस्टेनेबल सिटीज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बना रही है और स्किलिंग के लिए राष्ट्रीय केंद्र स्थापित किए गए हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि भारत का IT सेक्टर सिर्फ सेवाएं देने तक सीमित न रहे, बल्कि AI प्रोडक्ट, प्लेटफॉर्म और समाधान बनाने में भी दुनिया का नेतृत्व करे. AI क्षेत्र में 200 अरब डॉलर से अधिक निवेश की संभावना है, जिससे भारत की तकनीकी ताकत और मजबूत होगी.
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