नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि एल नीनो की स्थिति के कारण इस वर्ष मानसून कमजोर रहने की आशंका है. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे किसानों की आय पर दबाव पड़ सकता है. हालांकि, सरकार को भरोसा है कि पर्याप्त बफर स्टॉक होने के कारण देश में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं होगी.
माइंडमाइन समिट 2026 के 16वें संस्करण के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि प्रतिकूल मौसम अभी भी अर्थव्यवस्था के लिए एक जोखिम बना हुआ है और नीति निर्माता कमजोर मानसून की संभावना को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “एल नीनो के प्रभाव के कारण मुझे लगता है कि हम बहुत अच्छे मानसून की उम्मीद नहीं कर रहे हैं और उसी के अनुसार तैयारी कर रहे हैं.”
खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता से इनकार करते हुए सीतारमण ने माना कि यदि बारिश कम हुई या असमान रूप से हुई तो किसानों की आय प्रभावित हो सकती है.
उन्होंने कहा, “हमारे पास पर्याप्त बफर स्टॉक है. पिछले साल से हमने भंडार बनाए रखा है, इसलिए खाद्यान्न की कमी नहीं होनी चाहिए, लेकिन किसानों पर इसका असर पड़ेगा क्योंकि इस साल उनकी आय पर दबाव रहेगा.”
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मौसम में बदलाव के कृषि उत्पादन, महंगाई और ग्रामीण मांग पर असर को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं.
सीतारमण ने कहा कि मानसून को लेकर अनिश्चितता भारत के लिए हर साल एक चुनौती रहती है. इसमें सूखे जैसे हालात से लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में असमान बारिश तक का जोखिम शामिल है.
वित्त मंत्री ने मानसून की चुनौती को भारत के सामने मौजूद व्यापक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से भी जोड़ा.
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, शिपिंग और बीमा लागत में वृद्धि, विदेशी मुद्रा की जरूरत और महत्वपूर्ण आयातित वस्तुओं की आपूर्ति में बाधाएं भी चिंता का विषय हैं.
उन्होंने कहा कि भारत का बड़ा घरेलू बाजार और बढ़ती खपत देश को कुछ सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन भारत अभी भी आयातित कच्चे माल और मध्यवर्ती उत्पादों पर निर्भर है, जिनकी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ रहा है.
वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता का उदाहरण देते हुए सीतारमण ने उर्वरकों की आपूर्ति में हाल में आए उतार-चढ़ाव का उल्लेख किया.
उन्होंने कहा कि उर्वरकों के बड़े निर्यातक देशों ने घरेलू भंडार बढ़ाने के लिए निर्यात कम कर दिया था, जिससे कमी की आशंका पैदा हो गई थी. बाद में लगभग एक साल के अंतराल के बाद चीन के फिर से उर्वरक निर्यात शुरू करने से स्थिति में सुधार आया.
उन्होंने कहा, “एक सप्ताह कोई चुनौती होती है, अगले सप्ताह उसका समाधान हो जाता है, लेकिन नई चुनौतियां सामने आ जाती हैं.” उन्होंने कहा कि सरकारों को तेजी से बदलती परिस्थितियों के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए.
सीतारमण ने भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) और डेटा सेंटर हब के रूप में उभरने को लेकर भी सकारात्मक टिप्पणी की.
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र आने वाले दशक में रोजगार और निवेश का बड़ा स्रोत बनने वाला है.
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर ऐसी नीतियां तैयार कर रही है, जिनसे डेटा सेंटर और GCC में निवेश आकर्षित किया जा सके. उन्होंने इन्हें “तुरंत रोजगार पैदा करने वाले निवेश” बताया.
सीतारमण के अनुसार अब GCC और डेटा सेंटर केवल बेंगलुरु, हैदराबाद और नोएडा जैसे पारंपरिक तकनीकी शहरों तक सीमित नहीं हैं.
उन्होंने कहा, “पहले केवल बेंगलुरु, कुछ हद तक हैदराबाद और नोएडा थे. अब मंगलुरु जैसे शहर और कई दूसरे टियर-2 शहर भी डेटा सेंटर के केंद्र बन रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि राज्यों में तेजी से फैल रहा डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर भारतीय तकनीशियनों और युवाओं की बढ़ती संख्या की वजह से संभव हो रहा है, जो इस क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार खुद को तेजी से ढाल रहे हैं.
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