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Friday, 29 August, 2025
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भारत एवं जापान ने ग्रीन हाउस गैसों को कम करने के लिए संयुक्त ऋण व्यवस्था प्रणाली को अंतिम रूप दिया

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नयी दिल्ली, 29 अगस्त (भाषा) भारत और जापान ने पेरिस समझौते के तहत कार्बन क्रेडिट व्यापार पर एक साथ काम करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस कदम से भारत को अपने जलवायु लक्ष्यों के लिए धनराशि और प्रौद्योगिकी हासिल करने में मदद मिल सकती है तथा द्विपक्षीय संबंध भी मजबूत होंगे।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि उसने पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत संयुक्त ऋण तंत्र (जेसीएम) पर जापान के साथ सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए हैं।

मंत्रालय ने कहा कि यह घटनाक्रम ‘‘जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा पेरिस समझौते के कार्यान्वयन में एक और मील का पत्थर है।’’

इस समझौते पर इस माह के आरंभ में हस्ताक्षर किए गए थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी जापान यात्रा के दौरान भारत-जापान सहयोग की विषयवस्तु ‘‘बेहतर भविष्य के लिए हरित ऊर्जा पर बल’’ के तहत इसका विशेष तौर पर जिक्र किया।

संयुक्त ऋण व्यवस्था (जेसीएम) जापान द्वारा शुरू की गई एक द्विपक्षीय प्रणाली है, जिसका उद्देश्य विकासशील देशों को निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सहायता प्रदान करना है। उसके तहत समझौते से जुड़े दोनों देश उत्सर्जन न्यूनीकरण ऋणों को साझा करते हैं।

यह पुराने स्वच्छ विकास तंत्र से अलग है क्योंकि यह दोनों भागीदारों को केवल मेजबान और दाता के बजाय सह-कार्यान्वयनकर्ता मानता है।

मंत्रालय ने कहा कि जेसीएम के तहत परियोजनाओं को निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के माध्यम से समर्थन मिलेगा।

इसमें कहा गया है,‘‘जेसीएम इन निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों से जुड़ी परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए निवेश के प्रवाह एवं प्रौद्योगिकी सहायता को प्रोत्साहित करेगा जिसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण सहयोग शामिल है।’’

मंत्रालय ने कहा कि भारत ने 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन इस बदलाव के लिए महंगी प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता होगी जिनके वास्ते व्यवहार्यता अंतर निधि की आवश्यकता होगी।

भाषा राजकुमार माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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