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Wednesday, 25 February, 2026
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राजौरी में आतंकियों ने 14 घंटे में दो बार हमले किए; सगे भाई-बहन सहित छह लोग मारे गये

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(तस्वीरों के साथ)

राजौरी/जम्मू, दो जनवरी (भाषा) जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकवादियों ने 14 घंटों के अंदर एक ही स्थान पर दूसरी बार हमला किया। सोमवार को हुए एक आईईडी विस्फोट में दो सगे भाई-बहन की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गये।

अधिकारियों के मुताबिक, डांगरी गांव में हुए विस्फोट में सानवी शर्मा (7) और विहान कुमार शर्मा (4) की मौत हो गई। इसी गांव में आतंकवादियों ने रविवार शाम गोलीबारी की थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गये।

स्थानीय लोगों ने बताया कि विस्फोट प्रीतम लाल नाम के व्यक्ति के घर के पास हुआ, जो रविवार शाम हुए आतंकी हमले के पीड़ित हैं। सोमवार सुबह साढ़े नौ बजे मकान में हुए विस्फोट के समय लाल के रिश्तेदार सहित कई लोग थे।

घटना के कारण राजौरी शहर सहित पूरे जिले में प्रदर्शन होने और पूर्ण बंद की स्थिति रहने के बीच पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने घटनास्थल का दौरा किया और कहा कि आईईडी(विस्फोटक उपकरण) विस्फोट का मकसद वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाना था, जो वहां पहुंचने वाले थे।

उन्होंने घोषणा की है कि ग्राम रक्षा समितियों (वीडीसी) को हथियारों से फिर से लैस किया जाएगा। दरअसल, कुछ प्रदर्शनकारी नेताओं और स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि यदि अधिकारियों ने वीडीसी के हथियार वापस नहीं लिये होते तो घटना टाली जा सकती थी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जम्मू कश्मीर इकाई के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधानपरिषद सदस्य विबोध गुप्ता ने आरोप लगाया कि वीडीसी की 60 प्रतिशत बंदूकें वापस ले ली गई हैं।

डीजीपी ने प्रदर्शनकारियों से भी मुलाकात की, जो मृतकों की अंत्येष्टि करने से इनकार कर रहे हैं।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि जम्मू कश्मीर के डांगरी गांव में हुए आतंकी हमले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने इस घटना में मारे गए नागरिकों के परिजनों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और सरकारी नौकरी देने की घोषणा की।

सिन्हा ने एक ट्वीट में कहा, “मैं राजौरी में किए गए कायराना हमले की कड़ी निंदा करता हूं। मैं लोगों को आश्वस्त करता हूं कि इस घृणित कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों का साथ हैं।”

अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक टीम जांच के लिए डांगरी गांव पहुंच गई है।

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, राजौरी के चिकित्सा अधीक्षक महमूद एच बाजर ने गोलीबारी की घटना में चार लोगों की मौत होने की पुष्टि की।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी), जम्मू, मुकेश सिंह ने राजौरी में संवाददाताओं को बताया, “आईईडी एक बैग के नीचे रखा गया था।’’

जम्मू मंडल के आयुक्त रमेश कुमार के साथ घटनास्थल पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि सेना और पुलिस व्यापक तलाशी अभियान चला रही है।

सिंह ने कहा कि स्थानीय लोगों के मुताबिक, हमले में दो आतंकवादी शामिल थे।

राजौरी में हुए हमले के स्थान पर पहुंचे डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा, ‘‘मैं इसलिए आया हूं कि परिवारों के साथ एकजुट होना बहुत जरूरी है। इसलिए कश्मीर जाने के बजाय, मैं सीधे यहां आया। और भी आईईडी लगाये गये हो सकते हैं।’’

डीजीपी प्रदर्शन स्थल पर भी पहुंचे और कहा कि राजौरी के लोगों ने पूर्व में आतंकवाद का बहादुरी से मुकाबला किया है। उन्होंने कहा, ‘‘हत्याओं को लेकर मुझे दुख है। यह दुख का विषय है। यह वीडीसी को मजबूत करने का समय है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कोई बंदूकें वापस नहीं ली जाएंगी…, यदि कुछ बंदूकें ले ली गई हैं तो वे (वीडीसी को) लौटा दी जाएंगी तथा जरूरत पड़ने पर और बंदूकें उपलब्ध कराई जाएंगी।’’

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया, ‘‘शवों का असम्मान नहीं करें और उनकी अंत्येष्टि की जाए।’’

सोमवार की घटना के घायलों में कनाया शर्मा (14), वंशु शर्मा (15), समीक्षा देवी (20), शारदा देवी (38), कमलेश देवी (55) और समीक्षा शर्मा शामिल हैं। इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रविवार के हमले के बारे में सिंह ने कहा कि दो आतंकवादियों ने तीन मकानों पर गोलीबारी की, जिसमें चार लोग मारे गये और छह अन्य घायल हो गये। घायलों की हालत स्थिर है।

शांत जम्मू क्षेत्र में कई वर्षों बाद इस तरह की यह पहली घटना है।

ग्राम सरपंच दीपक कुमार ने कहा कि यह पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से सुरक्षा में गंभीर चूक है। उन्होंने राजौरी में संवाददाताओं से कहा, “यह सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गंभीर सुरक्षा चूक है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोग सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं। प्रशासन को कड़े कदम उठाने चाहिए।”

प्रदर्शनकारियों ने रविवार को मारे गये लोगों के शवों के साथ प्रदर्शन किये और उन्हें डांगरी चौक पर रखा।

उन्होंने उपराज्यपाल से उनसे मिलने आने की मांग की ताकि वे उनके समक्ष अपनी मांगें रख सकें।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उपराज्यपाल आज शाम तक नहीं आते हैं तो वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उनसे मिलने आने तक शवों की अंत्येष्टि नहीं करेंगे।

जम्मू में, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, मिशन स्टेटहुड, शिवसेना और डोगरा फ्रंट ने प्रदर्शन किये।

भाषा

सुभाष माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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