Saturday, 26 November, 2022
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आईआईटी मंडी का स्टार्टअप हरित प्रौद्योगिकी से इस्पात मिल के कचरे से बनाता उपयोगी सामान

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नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी), मंडी में शुरू स्टार्ट अप हरित प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहा है जो कम ऊर्जा, बिजली या भट्टी का इस्तेमाल किए बिना इस्पात कारखाने से निकलने वाले कचरे को उपयोगी उत्पाद में तब्दील कर रहा है और यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है।

उल्लेखनीय है कि इस्पात मिल से भारी मात्रा में कचरा निकलता है और इसका अधिकतर हिस्सा लैंडफिल (कूड़ा फेंकने के स्थान) में फेंक दिया जाता है जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है।

जम्मू-कश्मीर के स्टार्ट अप ‘ग्रीन टेक’ जिसकी स्थापना सतिंदर नाथ गुप्ता और उनके बेटे संदीप गुप्ता ने की है, निष्कर्षण धातु विज्ञान का इस्तेमाल पर्यावरण के प्रदूषण से निपटने के लिए करता है।

अधिकारियों के मुताबिक टीम स्वच्छ प्रदाह तकनीक का इस्तेमाल अधिक लौह अंश वाले कचरे को अलग करने के लिए करती है जिसका इस्तेमाल जहाजरानी, पत्थर तोड़ने वाले संयंत्र, तेल और गैस संयंत्र और बिजली उत्पादन संयंत्र जैसे उद्योगों में दोबारा किया जा सकता है।

संदीप ने ‘पीटीआई-भाषा’से कहा, ‘‘हम निष्कर्षण धातु विज्ञान का इस्तेमाल कर चक्राकार अर्थव्यवस्था मॉडल पर काम कर रहे हैं जहां पर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम हो और स्थायी कचरा प्रबंधन भी हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जो तरीका हमने विकसित किया है वह कम ऊर्जा खर्च करता है, बिजली या भट्ठी का इस्तेमाल नहीं करता और शत प्रतिशत प्रदूषण मुक्त है, इसमें न्यूनतम ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन होता है। अंत में उत्पाद पिघली अवस्था में होता है जिसमें लोहे का अंश 99.6 प्रतिशत होता है और इसे बाद में अन्य धातुओं से मिलाया जाता है ताकि उच्च गुणवत्ता वाला इस्पात या मिश्र धातु बनायी जा सके जिनका इस्तेमाल विभिन्न उद्योगों में होता है।’’

उन्होंने बताया कि ग्रीन टेक का दृष्टिकोण है कि हरित गुणवत्तायुक्त इस्पात उत्पादन का निर्माण उच्च प्रौद्योगिकी के साथ बनाया जाए और साथ ही भारत और दुनिया में ठोस कचरा प्रबंधन में अग्रणी बना जाए।

टीम ने हिमाचल प्रदेश में स्थायी संयंत्र स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जो अग्रणी कंपनियों जैसे अल्ट्राटेक, एसीसी और अम्बुजा सीमेंट को सेवाएं देगी।

भाषा धीरज नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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