रायपुर, 18 जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से कामकाज नहीं किए जाने की जिम्मेदारी लेते हुए इस विभाग के प्रभार से त्याग पत्र दिया है और पूछा कि यह ‘अनुशासनहीनत’ कैसे है?
सिंहदेव ने सोमवार को पीटीआई-भाषा से बातचीत के दौरान कहा कि उनका दिल्ली जाने का कार्यक्रम है और उन्होंने आलाकमान से मिलने का समय मांगा है। उन्होंने कहा, “यदि मुलाकात होगी तब वर्तमान घटनाक्रम की जरूर बात होगी।”
सिंहदेव से पूछा गया कि क्या उन्होंने जो भी किया उसे वह अनुशासनहीनता मानते हैं, तो उन्होंने कहा, ”अपनी बात रखना अनुशासनहीनता कैसे होगी? केंद्र के मंत्री आकर मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर टिप्पणी करते हैं कि इसमें काम नहीं हुआ है। इसकी जिम्मेदारी मैंने अपने ऊपर ली है और विभाग से त्यागपत्र दिया है। इसमें अनुशासनहीनता कैसी?… मैंने तो सरकार का ही बचाव किया है। यदि मेरे विभाग में काम नहीं हो रहा है तब उसकी जिम्मेदारी मैंने ली है।”
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा था कि उन्हें सिंहदेव के त्यागपत्र की कोई जानकारी नहीं है।
इस पर सिंहदेव ने कहा कि शनिवार को त्याग पत्र भेजा गया था, लेकिन मुख्यमंत्री का दफ्तर बंद होने की वजह से इसे ई-मेल किया गया तथा बाद में फिर से पत्र वाहक के हाथ इस्तीफा भेजा गया।
मंत्री ने बताया, ” त्यागपत्र देने के बाद मुख्यमंत्री जी से आज विधानसभा में मुलाकात हुई लेकिन इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है। न ही उनका फोन आया है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस विषय पर मुख्यमंत्री से बात हो सकती है तब उन्होंने कहा कि बेहतर परिस्थिति की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।
मुख्यमंत्री के साथ कथित मनमुटाव के बाद सिंहदेव ने शनिवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से इस्तीफा दे दिया था।
राज्य में सिंहदेव के इस्तीफे के बाद नए राजनीतिक हालात के बारे में जब रविवार को मुख्यमंत्री से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से मंत्री के इस्तीफे की जानकारी मिली है और त्याग पत्र मिलने के बाद वह इस पर विचार करेंगे।
वहीं कांग्रेस के छत्तीसगढ़ मामलों के प्रभारी पुनिया ने कहा था कि उन्होंने इस मुद्दे पर पार्टी महासचिव के सी वेणुगोपाल, राज्य के मुख्यमंत्री बघेल और सिंहदेव से बात की है।
पुनिया ने कहा कि सिंहदेव ने मुख्यमंत्री से उन्हें पंचायत विभाग के प्रभार से मुक्त करने का अनुरोध किया है और बघेल को अनुरोध पत्र मिलने के बाद इस मुद्दे का समाधान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री बघेल को भेजे अपने त्यागपत्र में सिंहदेव ने कहा है, ”जन-घोषणा पत्र की विचारधारा के अनुरूप महत्वपूर्ण विषयों को दृष्टिगत रखते हुए, मेरा यह मत है कि विभाग के सभी लक्ष्यों को समर्पण भाव से पूर्ण करने में वर्तमान परिस्थितियों में स्वयं को असमर्थ पा रहा हूं। अतएव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के भार से मैं अपने आप को पृथक कर रहा हूं। आपने मुझे शेष जिन विभागों की जिम्मेदारी दी है, उन्हें अपनी पूर्ण क्षमता और निष्ठा से निभाता रहूंगा।”
सिंहदेव ने त्यागपत्र में राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना की स्थिति, विभाग और शासन के कामकाज, पंचायत विस्तार (अनुसूचित क्षेत्र) अधिनियम ( पेसा कानून) को लेकर बनाए गए नियमों में बदलाव और मनरेगा का कार्य करने वाले रोजगार सहायकों की हड़ताल से उपजी स्थिति के संबंध में चिंता जाहिर की गई है।
सिंहदेव के इस्तीफे के बाद रविवार शाम को मुख्यमंत्री के सरकारी निवास पर विधायक दल की बैठक हुई थी। इस बैठक में सिंहदेव मौजूद नहीं थे। कांग्रेस के नेताओं के मुताबिक बैठक में विधायकों ने सिंहदेव के इस कदम पर नाराजगी जताई थी।
कांग्रेस विधायक दल की लगभग दो घंटे तक चली बैठक के बाद राज्य के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अधिकांश विधायकों ने सिंहदेव के त्याग पत्र पर सवाल उठाए हैं।
मंत्री ने बताया, ”कांग्रेस विधायक दल की बैठक के दौरान विधायकों ने पार्टी के राज्य प्रभारी पीएल पुनिया के सामने अपनी बात रखी। पुनिया जी आलाकमान के प्रतिनिधि हैं।”
भाषा संजीव संजीव नोमान
नोमान
नोमान
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
