नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर सुनवाई 18 फरवरी तक के लिए मंगलवार को स्थगित कर दी जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित पश्चिम बंगाल सरकार पर कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मामले में आई-पैक कार्यालय और उसके निदेशक के परिसरों पर की गई छापेमारी के दौरान बाधा डालने का आरोप लगाया गया है।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायामूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल के अस्वस्थ होने की जानकारी मिलने के बाद मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस पर सहमत हुए।
न्यायालय ने 15 जनवरी को कहा था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री द्वारा ईडी की जांच में कथित रूप से ‘‘बाधा’’ डालने का मामला ‘‘बेहद गंभीर’’ है।
न्यायालय ने इस बात की समीक्षा करने पर भी सहमति जताई थी कि क्या किसी राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी गंभीर अपराध के मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं।
न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में उन ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा दी थी जिन्होंने कथित कोयला घोटाले की जांच के सिलसिले में आठ जनवरी को ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा था।
शीर्ष अदालत ने राज्य पुलिस को छापेमारी की कार्रवाई की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने मुख्यमंत्री बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार और शीर्ष पुलिस अधिकारियों को ईडी की उन याचिकाओं पर नोटिस जारी किया था जिनमें आई-पैक परिसर में छापेमारी में बाधा डालने के आरोप में उनके खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच का अनुरोध किया गया है।
ईडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री तलाशी स्थलों पर पहुंचीं और आई-पैक परिसर से दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सहित ‘‘महत्वपूर्ण’’ सबूत अपने साथ ले गईं तथा उन्होंने जांच में बाधा डाली और हस्तक्षेप किया।
राज्य में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
भाषा खारी सिम्मी
सिम्मी
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