Wednesday, 25 May, 2022
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पुलिस बनने का सपना था- हालात ने झारखंड के महाराज को बना दिया नक्सली, पढ़ें पूरी कहानी उसी की जुबानी

झारखंड पुलिस ने उसे हजारीबाग के ओपन जेल में भेज दिया है. यहां वह अपने परिवार के साथ भी रह सकता है. परिवार के लोग बाहर भी आ जा सकते हैं.

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रांची: ‘साल 2007 की बात है. मैं मैथ ऑनर्स का छात्र था. सेकेंड ईयर की पढ़ाई चल रही थी. पुलिस में भर्ती होना चाहता था, इसलिए कालेज के दौरान एनसीसी से भी जुड़ा था. ताकि बहाली के वक्त मुझे अतिरिक्त अंक मिल जाएं. उसी दौरान मेरी मां जो कि एक आंगनबाड़ी सेविका थी, को चबूतरा निर्माण के विवाद के लेकर, जान से मारने के लिए गांव के कुछ लोगों ने सुपारी ले लिया. अकेला बेटा, क्या करता.’

‘मैंने कई लोगों से मदद मांगी. लेकिन किसी से नहीं मिली. इस दौरान पार्टी (भाकपा-माओवादी) के कुछ लोगों से संपर्क किया और मदद करने की बात कही. वो लोग मेरी मां को मारने आए, लेकिन उस वक्त उसके मौजूद न रहने के कारण वह बच गईं. मैं डटकर खड़ा रहा. लेकिन बाद के विवाद में मुझे जेल जाना पड़ा और पुलिस में बहाल होने का सपना टूट गया.’

ये सब बताते हुए महाराज प्रमाणिक के चेहरे पर पश्चाताप का कोई भाव नहीं था. महाराज पर झारखंड पुलिस ने 10 लाख रुपए का ईनाम रखा था. बीते शुक्रवार 21 जनवरी को आईजी अमोल वी होमकर के सामने दोपहर 2 बजे उसने एके-47, दो मैग्जीन, 150 कारतूस और दो वायरलेस के साथ सरेंडर कर दिया.

भाकपा माओवादी में जोनल कमांडर पद पर रहने वाले महाराज प्रमाणिक ने दिप्रिंट को बताया कि 2009 में जेल से निकलने के बाद वह एरिया कमांडर रामविलास लोहरा के संपर्क में आया. उसने संगठन के ही डेविड और मार्शल टूटी से उसकी मुलाकात कराई. यहां से वह सीधे संगठन से जुड़ गया.

अपने तेज दिमाग, सौंपे गए काम को करने के तरीके से वह संगठन में तेजी से जगह बनाने लगा. 2011 में उसकी मुलाकात कुंदन पाहन से हुई. उसे एरिया कमांडर बना दिया गया. इसी दौरान उसे उस वक्त के माओवादी प्रमुख कोटेश्वर राव को झारखंड से बंगाल सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी मिली. जिसे उसने बखूबी निभाया. इसके बाद उसे सब-जोनल कमांडर बना दिया गया.

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2009 से 2021 तक यानी पूरे 14 साल तक उसके आतंक का आलम ये रहा कि सरेंडर के वक्त पुलिस ने प्रेस रिलीज पत्रकारों को दिया, उसमें महाराज के ऊपर कुल 119 मामले दर्ज हैं. वर्तमान में वह सेंट्रल कमेटी सदस्य और एक करोड़ रुपए के ईनामी अनल दा की टीम का हिस्सा था.


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कहां, कैसे और कौन देते हैं ट्रेनिंग

आगे वो बताता है, ‘इस दौरान हथियार चलाने की ट्रेनिंग के अलावा आइडियोलॉजिकल ट्रेनिंग भी दी जाती थी. हथियार चलाने, लड़ाई के विभिन्न तरीकों की ट्रेनिंग कभी एक जगह कैंप लगाकर नहीं दिया गया. यह चलायमान हुआ करता था. हम बस एक बात जानते थे कि पूंजीवादी व्यवस्था को खत्म करना है. इसका समर्थन करने वाला हरेक व्यक्ति, राजनीतिक दल हमारा दुश्मन है. पहली गोली, पहला दुश्मन के फार्मूले को ही जीवन भर अपनाता रहा.’

‘हां जब विचारधारा के प्रशिक्षण की बात आती थी तो साल में एक बार कई इलाकों के माओवादी एक जगह जुटते थे, उन्हें आंध्र प्रदेश, मणिपुर, दिल्ली से आए लोग पढ़ाते थे. इनके नाम नहीं पता, क्योंकि इनके नाम बदल दिए जाते थे. क्या इस दौरान जीएन साईबाबा, रोना विल्सन आदि के नाम सुने थे या इनसे मिले थे? महाराज बताता है, इन लोगों के नाम सुने थे. इनके लिखे लेखों को हमें पढ़ने को दिया जाता था.’

जीएन साईंबाबा साल 2014 से जेल में बंद हैं. फिलहाल नागपुर सेंट्रल जेल में बंद साईबाबा पर माओवादियों से संबंध रखने और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे आरोप हैं.

वहीं रोना विल्सन भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में जेल में बंद हैं.

बीते एक साल में झारखंड में बोयदा पाहन, बैलुन सरदार, सूरज सरदार, रायमुनी, जीवन कंडूलना, प्रकाश गोप जैसे माओवादियों ने सरेंडर किया है. आखिर क्या वजह रही है सरेंडर करने की. पूर्व में सरेंडर कर चुके इन माओवादियों ने दिप्रिंट को बताया था कि जंगल में माओवादियों के शीर्ष नेताओं द्वारा हमारा शोषण होता है. महिलाओं के साथ अत्याचार होता है. हमें बताया गया कि हम व्यवस्था परिवर्तन के लिए लड़ रहे हैं. लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा. हम केवल पुलिस के साथ मुठभेड़ और लेवी वसूलने में लगे रहते हैं.

महाराज प्रमाणिक ने भी लगभग इन्हीं बातों को दोहराया. उसने बताया कि, ‘पुलिसकर्मियों को गोली मारने के बाद मुझे बहुत अफोसस होता था. खासकर तब जब कोई आदिवासी परिवार का पुलिसकर्मी हो. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में अब पहले जैसा सपोर्ट नहीं मिल रहा है. नए लड़ाके बहुत कम शामिल हो रहे हैं. हालांकि अभी भी हमें राशन गांव वालों से ही मिलता है. लेकिन उसके पैसे हम गांव वालों को दे देते हैं.’

खुद को झारखंड पुलिस के हवाले करने वाले महाराज प्रमाणिक | फोटो- दिप्रिंट

कहां से होती है सलाना 5 करोड़ की वसूली

लेवी वसूली के बारे में उसका कहना था कि, झारखंड के पांच जिले जमशेदपुर, चाईबासा, सरायकेला-खरसांवा, खूंटी और रांची से साल में लगभग पांच करोड़ रुपए वसूली होती है. ये विभिन्न कंपनियों, ठेकेदार आदि से वसूला जाता था. ‘सबको पता होता था कि देना है, हम जाते थे और लेकर आते थे. जरूरत भर का पैसा हम रखते थे, बाकि ऊपर भेज देते थे. जो पैसा हम रखते थे, साल के अंत में उसका हिसाब हमें देना होता था. ऊपर के लोग पैसों का क्या करते थे, इसकी मुझे जानकारी नहीं, न ही हमें ये पूछने का अधिकार होता था.’

पोलित ब्यूरो मेंबर और संगठन में नंबर दो की हैसियत रखने वाले प्रशांत बोस की गिरफ्तारी के बाद उनकी जगह कौन लेगा. इस सवाल के जवाब में महाराज प्रमाणिक ने बताया कि, ‘ज्यादा तो जानकारी नहीं, लेकिन संभावना है कि प्रमोद मिश्रा उनकी जगह लेंगे. झारखंड के संगठन में गिरिडीह जिले के लोगों का दबदबा है. इससे बाकी जिलों के नक्सलियों के बीच समय-समय पर असंतोष भी पैदा होता रहता है. वहीं झारखंड के लोगों को इस बात की शिकायत हमेशा से रही कि हमें बाहर के राज्यों के लोग ज्यादा निर्देश देते हैं. खुद तो लड़ाई में शामिल होते नहीं है, हम लोग मारे जाते हैं.’

बीते साल 12 नवंबर को प्रशांत बोस को उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ झारखंड में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद माओवादियों ने पर्चा जारी कर उन्हें राजनीतिक बंदी की हैसियत देने, उनके बेहतर इलाज के लिए बाहर भेजने और उन्हें रिहा करने की अपील वाला पर्चा जारी किया था. फिलहाल उनके समर्थन में माओवादी प्रतिरोध (21-26 जनवरी) सप्ताह मना रहे हैं. 21 जनवरी की रात गिरिडीह जिले में दो मोबाइल टावर को उड़ा दिया गया है.

महाराज के मुताबिक कुछ और नक्सली सरेंडर करने की सोच रहे हैं. आने वाले समय में स्पेशल एरिया कमेटी मेंबर विमल यादव (25 लाख ईनाम) सहित बड़ी संख्या में लोग संगठन छोड़ सकते हैं. हालांकि अपुष्ट जानकारी के मुताबिक वह पुलिस के संपर्क में आ चुका है. इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी उससे संबंधित जानकारी हासिल करने में लगे हुए हैं.

घटनाएं जिनमें महाराज प्रमाणिक शामिल था, उसके मुताबिक 2010 में नरसिंह इस्पात कंपनी पर हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत. 2018 में मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी की मौत, 2019 में पुलिस दल पर हमले में दो दर्जन पुलिसकर्मी घायल, इसी साल रायसिंदरी इलाके में आईडी ब्लास्ट में 15 पुलिसकर्मी घायल, 2020 में मुखबिरी के आरोप में दो लोगों की हत्या, 2021 में आईईडी ब्लास्ट से तीन झारखंड जगुआर के जवानों की मौत हो गई.

फिलहाल, झारखंड पुलिस ने उसे हजारीबाग के ओपन जेल में भेज दिया है. यहां वह अपने परिवार के साथ भी रह सकता है. परिवार के लोग बाहर भी आ जा सकते हैं.

(आनंद दत्त स्वतंत्र पत्रकार हैं)


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