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Wednesday, 7 January, 2026
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बांग्लादेश में हिंदू पत्रकार की गोली मारकर हत्या, किराना दुकान के मालिक पर धारदार हथियारों से हमला, मौत

ये हत्याएं बांग्लादेश में भीड़ हिंसा और निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों में बढ़ोतरी के बीच हुई हैं, जिनमें से कई में अल्पसंख्यक समुदायों के लोग शामिल हैं.

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नई दिल्ली: पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों के बीच 38-वर्षीय एक हिंदू व्यक्ति की जेसोर में गोली मारकर हत्या कर दी गई. वहीं, नरसिंदी जिले में एक किराना दुकान के मालिक पर धारदार हथियारों से हमला किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई.

मृतक की पहचान राणा प्रताप बैरागी के रूप में हुई है. वह नरैल से प्रकाशित स्थानीय अखबार ‘दैनिक बीडी खबर’ के कार्यवाहक संपादक भी थे. यह जानकारी बांग्ला भाषा के दैनिक अखबार प्रोथोम आलो की रिपोर्ट में दी गई है.

स्थानीय खबरों के मुताबिक, किराना दुकान के मालिक शरत मणि चक्रवर्ती पर नरसिंदी जिले में रात करीब 10 बजे धारदार हथियारों से हमला किया गया. बाद में उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

पहले मामले में, चश्मदीदों ने बताया कि हमलावर सोमवार को मोटरसाइकिल पर आए, बैरागी से थोड़ी बहस की और फिर बेहद नज़दीक से गोली चला दी, इसके बाद मौके से फरार हो गए. पुलिस ने घटनास्थल से सात खाली कारतूस बरामद किए. बाद में अधिकारियों ने पुष्टि की कि पीड़ित के सिर में कई गोलियां मारी गई थीं और उसका गला भी काटा गया था.

स्थानीय अखबारों में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि तीन लोगों ने बैरागी को उसकी आइस फैक्ट्री से बुलाया और एक निजी क्लिनिक के सामने पास की गली में ले जाकर उसे गोली मार दी.

अधिकारियों ने बताया कि वे जांच कर रहे हैं कि यह हत्या प्रतिबंधित पूर्वो बंगाल कम्युनिस्ट पार्टी के अंदरूनी विवाद से जुड़ी है या नहीं. उन्होंने बैरागी को इस समूह का “सक्रिय सदस्य” बताया. पुलिस ने कहा कि उसके खिलाफ पहले दो थानों में चार आपराधिक मामले दर्ज थे, हालांकि, उनके बारे में तुरंत जानकारी नहीं मिल सकी.

दैनिक बीडी खबर के संपादकों ने कहा कि बैरागी पर पहले कानूनी मामले थे, लेकिन वह उनमें बरी हो चुका था. अखबार के न्यूज़ एडिटर अबुल कासेम के हवाले से कहा गया, “मैं नहीं कह सकता कि इस हत्या की वजह क्या थी.”

यह हत्या बांग्लादेश में भीड़ हिंसा और निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों में बढ़ोतरी के बीच हुई है, जिनमें से कई में अल्पसंख्यक समुदायों के लोग शामिल हैं. बीते दो हफ्तों में, पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में कई हिंदू पुरुषों को पीट-पीटकर या जिंदा जलाकर मार दिया गया है.

पिछले हफ्ते, शरियतपुर जिले में खोकन चंद्र दास की भीड़ द्वारा हमला किए जाने और आग लगा दिए जाने के बाद मौत हो गई. दिसंबर में, राजबाड़ी जिले में अमृत मंडल को पीट-पीटकर मार डाला गया था और मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की भी इसी तरह हत्या की गई थी. भीड़ ने दास के शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी थी.

इस बीच, मानवाधिकार संगठन मानवाधिकार संस्कृति फाउंडेशन (MSF) ने अपनी 2025 की रिपोर्ट में कहा कि पिछले साल बांग्लादेश की मानवाधिकार स्थिति राजनीतिक हिंसा और भीड़ हिंसा में तेज बढ़ोतरी से प्रभावित रही.

MSF के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में राजनीतिक हिंसा की 599 घटनाओं में 5,604 लोग प्रभावित हुए. इनमें 86 लोगों की मौत हुई और 5,518 लोग घायल हुए, जिनमें 97 लोग गोली लगने से घायल हुए थे.

बांग्लादेश में फरवरी में चुनाव होने हैं. यह चुनाव राजनीतिक अस्थिरता के माहौल में हो रहे हैं और जुलाई 2024 में छात्र आंदोलन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद देश में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में कार्यवाहक प्रशासन चल रहा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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