धर्मशाला/शिमला, चार दिसंबर (भाषा) हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने राज्य के नगर निगमों के महापौर और उप महापौर को पूरे पांच साल के कार्यकाल तक पद पर बने रहने की अनुमति प्रदान करने वाले विधेयक को बृहस्पतिवार को पारित कर दिया।
हिमाचल प्रदेश नगर निगम (द्वितीय संशोधन विधेयक) 2025, जिसमें महापौर और उप महापौर के कार्यकाल को ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने का प्रस्ताव किया गया था, को चर्चा के लिए सदन में पेश किया गया। सदन में विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति में इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
धर्मशाला में जोरावर स्टेडियम के पास अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) कार्यकर्ताओं पर एक दिन पहले हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायकों ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा से बहिर्गमन किया।
यह विधेयक उस अध्यादेश की जगह लेगा जिसे कांग्रेस शासित शिमला नगर निगम के महापौर और उपमहापौर के ढाई साल के कार्यकाल की अवधि समाप्त होने से पहले राज्यपाल द्वारा जारी किया गया था।
विधेयक के अनुसार, अगर कोई महापौर अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा दे देता है या किसी अन्य कारण से पद रिक्त हो जाता है, तो उप महापौर कार्यभार संभालेंगे और एक महीने के भीतर नया महापौर चुना जाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल ने 25 अक्टूबर को महापौर और उप महापौर का कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ा दिया था। इस फैसले के पीछे के कारणों की व्याख्या करते हुए, एक कैबिनेट मंत्री ने कहा था कि ढाई साल का कार्यकाल ‘खरीद-फरोख्त’ की आशंका को उत्पन्न करता है, जबकि पंचायती राज संस्थाओं में कार्यकाल पांच साल का होता है।
भाषा यासिर पवनेश
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