जबलपुर, 29 जून (भाषा) मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने दमोह शहर में एक स्कूल तक पहुंच मार्ग को अवरुद्ध करने वाली पिछले सप्ताह बनाई गई दीवार को गिराने का निर्देश पुलिस विभाग को दिया है।
अदालत ने ‘छात्रों और आम जनता के हित को देखते हुए यह राहत दी।’’
सेंट जॉन्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रधानाचार्य और सचिव सिस्टर सोफी भरत ने बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया कि वे छात्रों के कल्याण के लिए उच्च न्यायालय के आदेश से खुश हैं। पुलिस छात्रों को रास्ता देने पर सहमत हो गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘ अगर 22 जून की रात आठ बजे से 23 जून की सुबह पांच बजे के बीच रात में बनाई गई दीवार को गिरा दिया जाता है तो हमारी शुक्रवार से स्कूल फिर से खोलने की योजना है।’
उन्होंने कहा कि दीवार ने जबलपुर सूबे के तहत ‘सर्वाइट सिस्टर्स सोसाइटी’ द्वारा संचालित स्कूल को 23 जून से ऑनलाइन होने के लिए मजबूर कर दिया है। स्कूल में नर्सरी से 12वीं कक्षा तक 2,210 छात्र हैं।
पुलिस विभाग के मुताबिक उसने अपनी जमीन पर दीवार बनाई है हालांकि, इससे स्कूल तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया।
दमोह के पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया, ”हम उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने जा रहे हैं। अदालत ने एक महीने का समय दिया है। हम छात्रों को उनके अध्ययन स्थल में प्रवेश का रास्ता देने जा रहे हैं। स्कूल में एक वैकल्पिक प्रवेश द्वार है।’’
न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकल पीठ ने बुधवार को कहा, ‘‘छात्रों और आम जनता के हित को देखते हुए, मैं प्रतिवादियों (मप्र सरकार, दमोह कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और पुलिस आवास आयोग) को निर्देश दे रहा हूं कि वे छात्रों को 30 दिनों की अतिरिक्त अवधि के लिए स्कूल पहुंचने की सुविधा प्रदान करें।’’
इस बीच, उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता भूमि पर अधिकार का दावा करते हुए दीवानी मुकदमा दायर कर सकता है और सक्षम अदालत के समक्ष निषेधाज्ञा के लिए भी आवेदन कर सकता है।
भाषा दिमो मनीषा शोभना
शोभना
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