कोलकाता, 22 दिसंबर (भाषा) पिछले हफ्ते सॉल्ट लेक स्टेडियम में अर्जेंटीना के फुटबॉल दिग्गज लियोनेल मेस्सी के कार्यक्रम के दौरान हुई गड़बड़ी को लेकर दायर तीन जनहित याचिकाओं की सुनवाई सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में समाप्त हो गई। इस कार्यक्रम में दर्शकों ने जमकर उत्पात मचाया था।
याचिकाकर्ताओं ने इस घटना की केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने के साथ-साथ दर्शकों को टिकट की कीमत लौटाने की मांग की है। दर्शकों का एक वर्ग अपने पसंदीदा खिलाड़ी को न देख पाने से नाराज होकर उपद्रव पर उतर आया था। मैदान पर अव्यवस्थित हालात और कुछ लोगों द्वारा मेस्सी के आसपास धक्का-मुक्की किए जाने के कारण कार्यक्रम को समय से पहले समाप्त करना पड़ा, जिससे स्टैंड में बैठे दर्शकों की दृश्यता बाधित हुई थी।
मामले में पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष यह तर्क दिया कि राज्य ने टिकटों की बिक्री नहीं की थी, और यह एक निजी कार्यक्रम प्रबंधन कंपनी द्वारा आयोजित कार्यक्रम था।
उन्होंने दावा किया कि बिधाननगर पुलिस आयुक्त कार्यालय द्वारा जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है और अदालत के समक्ष कहा कि इस घटना के संबंध में राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को कारण बताओ पत्र जारी किया गया है।
इस गड़बड़ी के सिलसिले में कार्यक्रम प्रबंधन कंपनी के मालिक सताद्रु दत्ता को उस दिन के कार्यक्रम के तुरंत बाद, 14 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया गया था।
दत्ता के वकील ने न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन सहित खंडपीठ के समक्ष यह तर्क दिया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि मेस्सी के चारों ओर जमा होकर दर्शकों के देखने में बाधा उत्पन्न करने वाले इतने सारे लोग मैदान में कैसे प्रवेश कर गए, क्योंकि प्रवेश बिंदुओं की जिम्मेदारी पुलिस के पास थी।
उन्होंने आगे कहा कि फुटबॉल के दिग्गज के कार्यक्रम हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली में भी हुए थे और सभी सुचारू रूप से संपन्न हुए थे।
याचिकाकर्ताओं में से एक विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के वकील बिलवादल भट्टाचार्य ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए धन के स्रोत पर सवाल उठाया और अदालत से एक सक्षम केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच का आदेश देने की प्रार्थना की।
एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा गठित जांच समिति न्यायिक आयोग नहीं है और यह एक सामान्य प्रशासनिक समिति है।
राज्य के वकील ने बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना के तुरंत बाद इस गड़बड़ी पर खेद व्यक्त किया था और उनकी सरकार ने उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश और प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों वाली एक समिति का गठन किया था।
भाषा प्रशांत माधव
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