वडोदरा, 28 जनवरी (भाषा) वडोदरा में भगवान रणछोड़ जी की वार्षिक शोभायात्रा का हिस्सा रही पीतल की एक पुरानी तोप का 28 वर्ष बाद सफल परीक्षण किया गया। मंदिर के पुजारी की याचिका पर अदालत के आदेश के तहत ऐसा किया गया।
याचिका में, परंपरा का हवाला देते हुए तोप के उपयोग की अनुमति मांगी गई थी। हालांकि, अब यह दीवानी अदालत पर निर्भर करता है कि वार्षिक दिवाली शोभायात्रा के दौरान तोप से गोले दागने की अनुमति दी जाएगी या नहीं।
तोप से गोले दागने की यह परंपरा बड़ौदा के गायकवाड़ राजवंश से जुड़ी हुई है। एक दुर्घटना के कारण वर्ष 1996 के बाद से इस परंपरा का पालन किया जाना रोक दिया गया था।
मामले में ‘कोर्ट कमिश्नर’ के रूप में नियुक्त किए गए वरिष्ठ वकील कौशिक भट्ट ने कहा कि तब से तोप का उपयोग नहीं किया गया क्योंकि इसे दागे जाने पर कुछ लोग घायल हो गए थे। इसके बाद भगवान रणछोड़ जी महाराज मंदिर के पुजारी ने प्रतिबंध हटाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
परंपरागत रूप से दिवाली पर वार्षिक शोभायात्रा के दौरान मंदिर के प्रमुख देवता भगवान रणछोड़ जी को सलामी देने के लिए इस तोप का इस्तेमाल किया जाता था।
भट्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान वरिष्ठ दीवानी न्यायाधीश ए.आर. पटेल की अदालत ने अधिकारियों से फोरेंसिक (एफएसएल) अधिकारियों, पुलिस और एक वरिष्ठ वकील की उपस्थिति में तोप का परीक्षण करने का निर्देश दिया था ताकि यह साबित किया जा सके कि यह तोप उपयोग के लिए सुरक्षित है या नहीं।
वडोदरा के नवलखी मैदान में बीचों-बीच शनिवार को गोला-बारूद भरकर तोप को रखा गया और मंदिर के पुजारी जनार्दन दवे ने अगरबत्ती के जरिये इसे दागा। परीक्षण के बाद एफएसएल अधिकारी ने तोप का निरीक्षण किया।
भट्ट ने कहा कि परीक्षण की एक रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर यह आदेश दिया जाएगा कि तोप का आगे इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं।
भाषा जितेंद्र सुभाष
सुभाष
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
