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Saturday, 30 September, 2023
होमदेश‘कंस्ट्रक्टिव डिबेट’ के लिए हरियाणा के विधायक बजट की बारीकियों को समझने की ट्रेनिंग लेंगे

‘कंस्ट्रक्टिव डिबेट’ के लिए हरियाणा के विधायक बजट की बारीकियों को समझने की ट्रेनिंग लेंगे

यह ट्रेनिंग सेशन अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता की ओर से लोकसभा को लिखे गए एक पत्र का नतीजा है, जिसमें स्थायी समितियों को बजट की बारीकियों को समझने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत के बारे में कहा गया था.

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चंडीगढ़: सोमवार से हरियाणा के विधायकों को बजट की बारीकियों को समझने के लिए एक प्रशिक्षण सत्र में भाग लेना होगा.

यह एक दिवसीय सत्र, हरियाणा के स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता बकी ओर से 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए अपनी तरह की पहली पहल है, जिसमें पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज (प्राइड) के प्रशिक्षक शामिल होंगे.

प्रशिक्षण सत्र में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित सदन के सभी सदस्य शिरकत करेंगे.

प्राइड लोकसभा सचिवालय के तहत एक संस्था है जिसे 1976 में संसदीय प्रक्रियाओं और प्रणालियों पर सांसदों को प्रशिक्षित करने के मकसद से तैयार किया गया था.

विधानसभा बजट पर बहस से कुछ दिन पहले इस सत्र को आयोजित किया जाएगा, जिसे हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पिछले महीने पेश किया था.

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अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि बजट पर रचनात्मक बहस को बढ़ावा देने के लिए सत्र आयोजित किया जा रहा है.

उन्होंने दिप्रिंट को बताया, ‘यह एक सच्चाई है कि हमारे ज्यादातर विधायक बजट की बारीकियों और इसमें इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली से परिचित नहीं हैं.’ वह आगे कहते हैं, ‘मैंने देखा कि हर साल, बजट बिना किसी रचनात्मक बहस के पारित किया जा रहा है. बजट पर चर्चा के दौरान, अधिकांश विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र की जरूरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर बात करेंगे.’

2023 के हरियाणा बजट सत्र को दो भागों में बांटा गया है. पहला भाग 20-23 फरवरी का था, जब बजट पेश किया गया था. अगला चरण 17-22 मार्च तक होगा.

अध्यक्ष की तरफ से बजट के लिए स्थायी समितियों की घोषणा के एक साल बाद इस तरह के सत्र की शुरुआत की जा रही है.

संसदीय स्थायी समितियों की तरह यह पैनल 17 मार्च को सत्र के दूसरे भाग के शुरू होने से पहले बजट का बारीकी से अध्ययन करेंगे और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे.

गुप्ता ने कहा, ‘पिछले साल पहली बार, मैंने बजट की पड़ताल के लिए संसद की तर्ज पर अनुदान मांगों को आठ विषयगत क्षेत्रों में विभाजित करके विधायकों की आठ स्थायी समितियों का गठन किया था. वे बजट का बारीकी से अध्ययन करेंगे और 17 मार्च से पहले अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे. उस समय सदन बजट सत्र के दूसरे चरण के लिए फिर से बैठक करेगा.’

सदन के 90 सदस्यों – सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी-जननायक जनता पार्टी गठबंधन के साथ-साथ विपक्ष दोनों से – में से 74 स्थायी समितियों में हैं.

गुप्ता ने कहा कि समितियों का गठन हरियाणा विधानसभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के नियम 190 (बी) के तहत किया गया है.


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स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता के नेतृत्व में कई पहल

ट्रेनिंग सेशन गुप्ता की तरफ से लोकसभा को लिखे गए पत्र का परिणाम था. पत्र में उन्होंने लिखा था कि स्थायी समितियों को काम करने में मुश्किलें आ रही है और बजट की बारीकियों को समझने के लिए उन्हें ट्रेनिंग की जरूरत है.

गुप्ता ने दिप्रिंट को बताया, ‘लोकसभा ने विधानसभा सचिवालय के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है और अपनी टीम भेजने पर सहमत हो गई है. टीम में लोकसभा के पूर्व संयुक्त सचिव विनोद कुमार त्रिपाठी, लोकसभा के निदेशक सी. कल्याणसुंदरम और उत्तम चंद भारद्वाज (लोकसभा में अतिरिक्त निदेशक) शामिल होंगे.’

मुलाना से कांग्रेस विधायक वरुण चौधरी ने भी इस पहल का स्वागत किया है.

उन्होंने दिप्रिंट को बताया, ‘यह पहली बार है कि विधानसभा में संसद की तरह स्थायी समितियां होंगी. इससे निश्चित रूप से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि इस तरह के पैनल संसद में कैसे काम करते हैं.’

गुप्ता के 2019 में हरियाणा के स्पीकर बनने के बाद से विधानसभा में इस तरह की कई पहल सामने आई हैं. पिछले जून में गुप्ता ने विधायकों के प्रति सिविल सेवकों द्वारा किसी भी ‘अभद्र और तिरस्कारपूर्ण व्यवहार’ पर लगाम लगाने में मदद के लिए एक प्रोटोकॉल समिति का गठन किया था.

दिसंबर में पैनल ने अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के तीन अधिकारियों को तलब किया. यह उस समय था जब उनके विभागों ने विधायकों द्वारा पूछे गए कुछ सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया था.

विधानसभा के प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली के नियम 45-ए में सरकारी विभागों के लिए 21 दिनों के भीतर विधायकों के सवालों का जवाब देना अनिवार्य है.

एक कांग्रेस विधायक ने दिप्रिंट को बताया, ‘विधानसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के तहत समिति का गठन किया गया है . यह अधिकारियों के व्यवहार की जांच करने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करती है. हालांकि विधानसभा में एक विशेषाधिकार समिति थी, लेकिन विधायकों के प्रति अधिकारियों के तिरस्कारपूर्ण व्यवहार की शिकायतें इसके अंतर्गत नहीं आती थीं और इसलिए अधिकारी शिकायतों के बावजूद बेदाग हो जाते थे.’

एक और पहले में गुप्ता ने एक नियमित शून्यकाल भी सुनिश्चित किया – वह समय जब निर्वाचित प्रतिनिधियों को सदन में प्रश्न उठाने की अनुमति दी जाती है.

विधायक ने कहा, ‘इससे पहले हरियाणा विधानसभा में शून्यकाल का कोई निश्चित समय नहीं था. अगर किसी विधायक के पास मुद्दा है तो वह इसे उठाएगा और शून्यकाल तुरंत समाप्त हो जाएगा. अब हमारे पास शून्यकाल यानी जीरो आवर के लिए एक घंटे का समय है.’

इसके अलावा, विधानसभा  में अब शून्यकाल के लिए पर्चियां चुनकर बोलने का मौका दिया जा रहा है ताकि सभी विधायकों को बोलने का समान अवसर मिल सके.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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