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Wednesday, 7 January, 2026
होमदेशहरियाणा के मंत्री अनिल विज ने किया 1,500 करोड़ रुपये के ‘घोटाले’ का खुलासा

हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने किया 1,500 करोड़ रुपये के ‘घोटाले’ का खुलासा

अनिल विज के आदेश पर हुई जांच में 2.21 लाख मजदूर पंजीकरण में से सिर्फ 14 हज़ार ही सही पाए गए. सरकारी लाभ हड़पने के लिए पूरे-के-पूरे गांवों का फर्जी पंजीकरण किया गया.

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गुरुग्राम: जब हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने इस साल की शुरुआत में राज्य के भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड का एक सामान्य ऑडिट कराने का आदेश दिया, तब शायद उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि इससे हाल के समय का सबसे बड़ा कल्याण घोटाला सामने आ सकता है.

अनिल विज ने दिप्रिंट को बताया, अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच 13 जिलों में जारी किए गए करीब 6 लाख वर्क स्लिप्स में से 5.46 लाख से ज्यादा, यानी 91 प्रतिशत से अधिक, फर्जी निकले.

उन्होंने बताया कि 2.21 लाख मजदूर पंजीकरण में से शारीरिक जांच (फिजिकल वेरिफिकेशन) के बाद सिर्फ 14,240 ही सही पाए गए.

बाकी क्या थे? ‘फर्जी’ मजदूरों का एक बड़ा जाल, फर्जी पंजीकरण और उन सरकारी योजनाओं की योजनाबद्ध लूट, जो हरियाणा के सबसे कमजोर मजदूरों की मदद के लिए बनाई गई थीं. विज के अनुसार, इस संदिग्ध घोटाले का शुरुआती अनुमान: 1,500 करोड़ रुपये.

बाकी नौ जिलों की जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी है.

विज ने मंगलवार को दिप्रिंट को बताया कि जुलाई में उन्होंने तीन श्रम निरीक्षकों को निलंबित कर दिया था. पंचकूला स्थित हरियाणा भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के सचिव द्वारा कराई गई जांच में वे कथित तौर पर फर्जी वर्क स्लिप या प्रमाणपत्रों को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार पाए गए.

उन्होंने कहा, “कम समय में हजारों मजदूरों का सत्यापन किया गया था, जिससे मुझे शक हुआ.”

विज ने कहा, इसके बाद सभी जिलों में जांच के आदेश दिए गए, जिसे संबंधित डिप्टी कमिश्नरों को करना था. अब तक 13 जिलों की रिपोर्ट आ चुकी है, जो घोटाले की ओर इशारा करती है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके विभाग ने कोई एफआईआर दर्ज की है, तो विज ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी से मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री पर निर्भर है कि वह मामले को पुलिस या किसी अन्य राज्य या केंद्रीय एजेंसी को सौंपें.

विज ने कहा कि इस “घोटाले” से जुड़े कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं और गहरी जांच की ज़रूरत है: बड़े पैमाने पर पंजीकरण कराने वाले बिचौलिये कौन थे, उन्होंने मजबूर आवेदकों और भोले-भाले ग्रामीणों से फर्जी दस्तावेजों के लिए कितना पैसा लिया, क्या ठेकेदार भी फर्जी वर्क सर्टिफिकेट देने में शामिल थे, और यह सब कितने समय से चल रहा था?

सबसे अहम सवाल यह है कि इतनी बड़ी धोखाधड़ी बिना किसी को भनक लगे कैसे चलती रही?

विज ने कहा कि मामले की जांच होने के बाद इन सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे.

विज ने बताया कि इस घोटाले का तरीका बेहद सीधा था. कई मामलों में पूरे-के-पूरे गांवों को निर्माण मजदूर के रूप में पंजीकृत कर दिया गया. इनमें किसान, दुकानदार, गृहिणियां, छात्र और ऐसे लोग भी शामिल थे जिन्होंने कभी जिंदगी में ईंट तक नहीं उठाई थी.

इन ‘फर्जी मजदूरों’ को फिर वर्क स्लिप दी गई, जिसमें बताया गया कि उन्होंने 90 दिन का निर्माण कार्य किया है. इससे वे कई तरह की कल्याण योजनाओं के लिए पात्र हो गए. औसतन, हर एक “मजदूर” मातृत्व सहायता, शिक्षा अनुदान, शादी सहायता, पेंशन, दुर्घटना मुआवजा और कई अन्य मदों में करीब 2.5 लाख रुपये तक के लाभ ले सकता था.

विज ने कहा, “जो लोग पात्र नहीं हैं, वे लाभ उठा रहे हैं. यह सीधी लूट है, जिससे सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.” इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से उच्च-स्तरीय जांच कराने की सिफारिश करने की घोषणा की.

रैकेट कैसे काम करता था

कथित घोटाला ढीली निगरानी, मिलीभगत और बिना सही जांच व्यवस्था के वर्क स्लिप्स के डिजिटलीकरण के कारण पनपता हुआ दिखाई देता है.

कल्याण बोर्ड के नियमों के अनुसार, निर्माण मजदूरों को नियोक्ताओं के सत्यापन के जरिए कम से कम 90 दिन के काम का सबूत देना होता है. वर्क स्लिप, जो इस रोजगार की पुष्टि करने वाला दस्तावेज है, सभी लाभ पाने का मुख्य रास्ता है.

यह जांच करीब चार महीने पहले शुरू हुई थी और अब तक 13 जिलों को कवर कर चुकी है: करनाल, रेवाड़ी, नूंह, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, झज्जर, पलवल, पानीपत, रोहतक, सोनीपत, पंचकूला, सिरसा और कैथल.

इन जिलों में ही 5,99,758 वर्क स्लिप जारी की गईं, लेकिन मंत्री के अनुसार, जांच में सिर्फ 53,249 ही सही पाई गईं.

शुरुआती गड़बड़ियां हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी में हुई जांच के दौरान सामने आईं. इसके बाद विज ने सभी डिप्टी कमिश्नरों को आदेश दिया कि वे श्रम विभाग के अधिकारियों और तीन अन्य अधिकारियों को मिलाकर जिला समितियां बनाएं, ताकि शारीरिक जांच की जा सके.

असली मजदूरों के लिए बने लाभ

इस धोखाधड़ी के केंद्र में जो योजनाएं थीं, वे अच्छे इरादे से बनाई गई थीं. हरियाणा के निर्माण मजदूर, जो कार्यबल का सबसे असुरक्षित वर्ग हैं, कल्याण बोर्ड में पंजीकरण के बाद कई तरह के लाभ पाने के हकदार हैं.

एक महिला मजदूर को मातृत्व लाभ के रूप में 36,000 रुपये मिलते हैं और उसके पति को पितृत्व अवकाश के लिए 21,000 रुपये मिलते हैं. उनके बच्चों को सालाना 8,000 से 20,000 रुपये तक की शिक्षा सहायता, 51,000 रुपये तक की मेधावी छात्रवृत्ति और तकनीकी पाठ्यक्रमों की पूरी फीस की भरपाई मिलती है. बेटियों की शादी के लिए 1.01 लाख रुपये की सहायता, महिला मजदूर की अपनी शादी के लिए 50,000 रुपये और इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने के लिए 50,000 रुपये की मदद दी जाती है.

चिकित्सा सहायता, दिव्यांग पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, 5.15 लाख रुपये तक का दुर्घटना मुआवजा—सूची बहुत लंबी है. इसमें तीर्थ यात्रा और अपने मूल स्थान की यात्रा का खर्च भी शामिल है.

असली निर्माण मजदूरों के लिए, जिनमें से कई मौसमी रूप से पलायन करते हैं और रोज कमाकर खाते हैं, ये लाभ उनकी ज़िंदगी बदल सकते हैं.

जैसे-जैसे सत्यापन जारी है, विज ने नए पंजीकरण पर आपात ब्रेक लगा दिया है और हरियाणा के SARAL केंद्रों को आवेदन लेना बंद करने के लिए कहा गया है.

SARAL (Simple, All Inclusive, Real Time, Action Oriented, Long lasting पोर्टल) केंद्र हरियाणा में एक ऐसा मंच हैं, जहां नागरिक 44 विभागों से जुड़ी 545 योजनाओं और सेवाओं के लिए एक ही प्लेटफॉर्म पर आवेदन कर सकते हैं और सेवाओं का लाभ ले सकते हैं.

सेवा का अधिकार की समय-सीमाएं फिलहाल निलंबित कर दी गई हैं. सीएम विंडो, जन संवाद, केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS), हरियाणा मानवाधिकार आयोग और हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग जैसे शिकायत मंचों को इस बारे में सूचना दे दी गई है.

मौजूदा पेंशनधारकों पर इसका असर नहीं पड़ा है और मृत्यु, दुर्घटना और अंतिम संस्कार सहायता से जुड़े दावों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है. लेकिन बाकी सभी के लिए, जांचकर्ता जब मलबा खंगाल रहे हैं, तब बोर्ड लगभग पूरी तरह ठप पड़ा है.

मंत्री जवाबदेही को लेकर सख्त हैं. विज ने कहा, “किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं होगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.”

इसमें सिर्फ ‘फर्जी लाभार्थी’ ही नहीं, बल्कि वे अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं जिन्होंने कथित तौर पर इस धोखाधड़ी को संभव बनाया, वे निरीक्षक जिन्होंने जांच नहीं की, वे सत्यापनकर्ता जिन्होंने सत्यापन नहीं किया, और वे बोर्ड सदस्य भी, जिनकी नियुक्तियां खुद विज के मुताबिक अनियमित थीं.

यह पहली बार नहीं है जब हरियाणा की कल्याण व्यवस्था के साथ खेल किया गया हो. 2016 में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों से जुड़ा सामाजिक सुरक्षा पेंशन घोटाला सामने आया था.

हाल ही में हरियाणा सरकार ने विधानसभा को बताया था कि उसने लगभग 11 लाख परिवारों के बीपीएल कार्ड रद्द कर दिए हैं, यह कहते हुए कि उन्होंने गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को मिलने वाले लाभ पाने के लिए अपनी आय कम दिखाकर फर्जीवाड़ा किया था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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