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Wednesday, 7 January, 2026
होमदेशहरियाणा DGP ओपी सिंह ने विदाई पत्र में टेनीसन का किया ज़िक्र, 2026 में ‘अपराध बढ़ने’ की दी चेतावनी

हरियाणा DGP ओपी सिंह ने विदाई पत्र में टेनीसन का किया ज़िक्र, 2026 में ‘अपराध बढ़ने’ की दी चेतावनी

अपने पूर्व सहयोगियों से अलग, जो केवल आधिकारिक माध्यमों तक सीमित रहते थे, सिंह ने अपने कार्यकाल में पुलिस बल और कई बार जनता से भी सोशल मीडिया पर साझा किए गए पत्रों के जरिए संवाद किया.

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गुरुग्राम: बुधवार को अपने पद के आखिरी दिन हरियाणा के डीजीपी ओ.पी. सिंह ने वही किया, जो वे अपने कार्यकाल के दौरान नियमित रूप से करते आए हैं—एक खुला पत्र लिखना.

अपने विदाई पत्र में 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी ने अंग्रेज़ी कवि अल्फ्रेड टेनीसन का ज़िक्र किया, उस पुलिस बल की तारीफ की, जिसका वे तीन दशक से अधिक समय तक हिस्सा रहे और बल से अधिक मानवीय बनने की अपील की. इसके बाद उन्होंने एक कड़ी चेतावनी भी दी—वर्ष 2026 में राज्य में अपराध दर बढ़ेगी.

सिंह का पत्र “हरियाणा पुलिस के मेरे प्रिय जवानों और अधिकारीगण” से शुरू होता है. उन्होंने यह पत्र सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जो डीजीपी बनने के करीब तीन महीने बाद से उनका पसंदीदा संवाद माध्यम रहा है.

उन्होंने लिखा, “इस यात्रा ने मुझे हर रूप में सभी से जोड़ा है” और अल्फ्रेड टेनीसन की कविता ‘यूलिसिस’ की पंक्ति उद्धृत की—“मैं उन सभी का हिस्सा हूं, जिनसे मैं मिला हूं.”

पत्र लिखने वाले डीजीपी

सिंह ने 14 अक्टूबर को असामान्य परिस्थितियों में पुलिस बल की कमान संभाली थी. 7 अक्टूबर को आईपीएस अधिकारी वाई. पूरण कुमार की कथित आत्महत्या से राज्य पुलिस हिल गई थी. तत्कालीन पुलिस प्रमुख शत्रुजीत सिंह कपूर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें अवकाश पर भेज दिया गया.

पद संभालने के सिर्फ दो दिन बाद ही सिंह ने एक रहस्यमयी दोहे के साथ पत्र लिखने की शुरुआत की—“अगर मेरा दोस्त किसी से विश्वासघात करे, तो मुझे शर्म आती है.”

खुले पत्र लिखना उनकी पहचान बन गया. इन पत्रों के जरिए सिंह ने अपने बल और कई बार जनता से भी संवाद किया, जबकि उनके पूर्ववर्ती अधिकारी केवल आधिकारिक माध्यमों तक सीमित रहते थे.

पहले पत्र के बाद उन्होंने पुलिस बल को थानों में आने वाले लोगों का चाय और अखबार से स्वागत करने की सलाह दी. अपने ऐसे ही कई पत्रों में से एक में ओपी सिंह ने फिटनेस चुनौती भी दी—“पांच मिनट में एक किलोमीटर दौड़ो, नहीं तो ज़िंदगी में पीछे रह जाओगे.”

‘अपराध बढ़ेंगे’

हिंदी में लिखे अपने विदाई संदेश में सिंह का कानून-व्यवस्था पर आकलन खास रहा. उन्होंने कहा कि 2025 में हरियाणा में पिछले वर्ष की तुलना में आपराधिक घटनाएं कम रहीं, लेकिन उन्होंने साफ चेतावनी दी कि 2026 में इनकी संख्या काफी बढ़ेगी.

उन्होंने कहा कि जघन्य अपराधों के मामले 2025 में ही पहले के वर्षों की तुलना में बढ़ने लगे हैं और यह रुझान आगे भी जारी रहेगा.
उन्होंने लिखा, “सवाल यह नहीं है कि अपराध होंगे या नहीं, सवाल यह है कि हम उनसे कैसे निपटते हैं” और गिरफ्तारी-केंद्रित पुलिसिंग से हटकर व्यवस्थित और वैज्ञानिक अपराध रोकथाम पर जोर दिया.

विदा ले रहे डीजीपी ने पुलिस बल को सलाह दी कि केवल अपराधियों का पीछा न करें, बल्कि पूरे नेटवर्क को तोड़ें—जिसमें ड्रग कार्टेल, संगठित अपराध गिरोह और मानव तस्करी के नेटवर्क शामिल हैं.

उन्होंने सामुदायिक पुलिसिंग, युवाओं से संवाद, वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण, महिलाओं की सुरक्षा और यहां तक कि पर्यावरण संरक्षण को शामिल करते हुए बहुआयामी रणनीति की वकालत की.

‘सेवानिवृत्ति’, रिटायरमेंट नहीं

सामान्य नौकरशाही विदाई से अलग, सिंह ने “रिटायरमेंट” की जगह “सेवानिवृत्ति” शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि पुलिसिंग का असली मतलब जनता की सेवा है.

उन्होंने कहा, “मुझे ‘रिटायरमेंट’ शब्द से आपत्ति है. मैंने तो सिर्फ इंडियन पुलिस सर्विस नाम की ट्रेन पकड़ी है. यात्रा खत्म नहीं हुई है. मेरा मानना है कि जब तक इंसान जीवित है, तब तक उसे जीवन में कुछ सार्थक करते रहना चाहिए.”

इसके बाद उन्होंने अपने करियर में किए गए कुछ कार्यों का भी जिक्र किया.

उन्होंने लिखा, “जब मैं एसपी, रेंज आईजी, कमिश्नर या डीजीपी था, तब मैंने अपने बल को अपराधियों के पीछे लगाया. खेल निदेशक के रूप में राहगिरी और मैराथन के जरिए लाखों बच्चों को खेलों से जोड़ा, लाखों लोगों को सरकार से जोड़ा और जाति व वर्ग की खाइयों को पाटने का प्रयास किया. नशा विरोधी कार्रवाई, युवाओं से संवाद, साइबर अपराध रोकथाम, अपराध डेटा प्रबंधन, फॉरेंसिक विज्ञान और ग्रीन बिल्डिंग जैसी पहल से हरियाणा देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हुआ.”

उन्होंने कहा कि उन्हें लिखने का शौक है और अब वे इसे अधिक समय दे पाएंगे.

उन्होंने लिखा, “आजादी की असली लड़ाई ऊंची आवाज़ वाले सनकी लोगों और ठगों के आतंक के खिलाफ है. दुर्भाग्य से यह आज भी जारी है. मुझे उम्मीद है कि आप सभी कानून के राज के लिए जनता के संघर्ष में उनके साथ खड़े रहेंगे.”

काव्यात्मक विदाई

उन्होंने कहा कि इंडियन पुलिस सर्विस और हरियाणा पुलिस ही उनकी पहचान हैं, और अब तक जो कुछ भी वे हासिल कर पाए हैं, वह इन्हीं की वजह से है.

सिंह ने अपने पत्र का अंत कबीर दास के दोहे से किया—

“दास कबीर जतन से ओढ़ी, ज्यों-की-त्यों धर दीन्ही चदरिया”

यानी उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां पूरी सावधानी से निभाईं और सेवा की पवित्रता बनाए रखने का प्रयास किया.

वर्ष के आखिरी दिन सिंह की सेवानिवृत्ति के साथ ही राज्य सरकार से जल्द उनके उत्तराधिकारी की घोषणा किए जाने की उम्मीद है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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