नई दिल्ली: गुरुग्राम पुलिस ने एक पूर्व सैन्य अधिकारी के उस आरोप को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि शहर में शराब पीकर गाड़ी चलाने की जांच के दौरान कुछ ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने उनके और उनके परिवार के साथ “अपमानजनक और परेशान करने वाला व्यवहार” किया.
गुरुग्राम के डीसीपी (ट्रैफिक) प्रतीक गहलोत के अनुसार, मामले की शुरुआती जांच में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की ओर से किसी तरह के दुर्व्यवहार या गलत व्यवहार के सबूत नहीं मिले हैं. 46-वर्षीय रिटायर्ड आर्मी मेजर हेमेंद्र कुमार सिंह, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में सेवा दी है, ने दिप्रिंट को बताया कि यह घटना 6 जून की रात करीब 11:55 बजे हुई. वह अपने परिवार के साथ साइबर सिटी स्थित साइबर हब में डिनर करने के बाद घर लौट रहे थे.
उन्होंने कहा कि रास्ते में ट्रैफिक पुलिस टीम ने उन्हें ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट के लिए रोका.
सिंह ने कहा, “मैंने टेस्ट कराने के लिए सहमति दे दी थी, लेकिन मशीन में फूंक मारने से पहले मैंने नई डिस्पोजेबल स्ट्रॉ मांगी, क्योंकि मशीन में लगी स्ट्रॉ दब गई थी, काफी घिसी हुई लग रही थी और पहले इस्तेमाल की हुई दिखाई दे रही थी. हैरानी की बात है कि मेरी यह मांग ठुकरा दी गई और मुझे वही स्ट्रॉ इस्तेमाल करने को कहा गया. मशीन में 91 mg/100 ml की रीडिंग दिखाई गई.”
उन्होंने कहा कि उन्होंने बिल्कुल भी शराब नहीं पी थी और इसलिए नई स्ट्रॉ के साथ दोबारा टेस्ट कराने की मांग की.
“निष्पक्ष तरीके से दोबारा टेस्ट कराने की बजाय मुझे एक इंटरसेप्टर वाहन के पास भेज दिया गया, जहां इंस्पेक्टर ब्रह्मदत्त प्रकाश बैठे थे.”
उन्होंने कहा, “मेरी बार-बार की मांग के बावजूद टीम ने चालान की प्रक्रिया शुरू कर दी. जब मैं डिजीलॉकर के जरिए अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिखाने की कोशिश कर रहा था, तब उन्होंने मेरा मोबाइल फोन ले लिया. टेस्ट प्रक्रिया को लेकर मेरी आपत्तियों का समाधान होने से पहले ही चालान की एंट्री की जा रही थी.”
सिंह ने कहा कि उन्होंने खुद को पूर्व सैन्य अधिकारी बताया और कहा कि वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे हैं. उन्होंने फिर से नई स्ट्रॉ के साथ निष्पक्ष टेस्ट कराने की मांग की.
उनके अनुसार, “इंस्पेक्टर ब्रह्मदत्त प्रकाश ने कार के अंदर से जवाब दिया और जहां तक मुझे ठीक याद है, उन्होंने कहा—‘मैं तेरी अफसरगिरी निकालता हूं आज.’”
रिटायर्ड मेजर ने दिप्रिंट से कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी पत्नी, मेरी 9 और 14 साल की दो बेटियां और मुझे उन लोगों के हाथों इतना अपमान और परेशानी झेलनी पड़ेगी, जिन्हें कानून लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है.”
गुरुग्राम पुलिस को दी गई शिकायत में सिंह ने कहा कि इस घटना से वह काफी आहत और परेशान हैं.
सिंह ने जम्मू और कश्मीर में काउंटरटेररिज्म ऑपरेशन में देश की सेवा की है और बाद में एक प्रोफेशनल करियर बनाया है. सिंह IIM अहमदाबाद और UCLA एंडरसन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, USA के एल्युम्नस हैं.
देर रात की परेशानी
सिंह के परिवार द्वारा रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में हरियाणा पुलिस की एक वैन सड़क पर खड़ी दिखाई देती है. वीडियो में सिंह पुलिसकर्मियों से कहते सुनाई देते हैं, “आपने मेरा गलत चालान किया है.” इसके बाद वह ट्रैफिक कर्मियों को बताते हैं कि उन्होंने स्थानीय पुलिस को बुलाया है.
“टेस्ट में इस्तेमाल किए गए पाइप पहले से इस्तेमाल किए हुए थे. यह गलत चालान है.” वीडियो में उनकी पत्नी और दोनों बेटियां भी दिखाई देती हैं.
सिंह ने कहा कि इसके बाद अधिकारी ने पुलिस टीम को बिना दोबारा टेस्ट कराए चालान की प्रक्रिया पूरी करने को कहा, “बात करने का तरीका और मंशा दोनों ही साफ तौर पर अपमानजनक और शत्रुतापूर्ण थे.”
इसके बाद, सिंह के अनुसार, इंस्पेक्टर ब्रह्मदत्त प्रकाश की मौजूदगी में दो अधिकारियों ने दोबारा टेस्ट किया. इस बार मशीन में रीडिंग 13 mg/100 ml आई.
उन्होंने कहा, “मेरे जोर देने पर दूसरा री-टेस्ट भी किया गया और उसमें भी रीडिंग 13 mg/100 ml ही आई.” सिंह का कहना है कि उन्हें मशीन की रीडिंग की फोटो लेने या परिणाम को आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड करने की अनुमति नहीं दी गई.
इसके बाद परिवार ने स्थानीय पुलिस को फोन किया, लेकिन तब तक ट्रैफिक पुलिसकर्मी वहां से जा चुके थे. सिंह ने “संवेदनशीलता की कमी” का आरोप लगाया. मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित सिंह ने कहा कि सैन्य सेवा के दौरान लगी चोटों के कारण उन्हें सेवा-संबंधी दिव्यांगता है और लंबे तनाव व देरी ने उनकी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया.
उन्होंने कहा, “मैंने मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस से अनुरोध किया कि किसी सरकारी अस्पताल में मेरा मेडिकल परीक्षण कराया जाए, ताकि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित जांच के जरिए मामले का अंतिम रूप से निपटारा हो सके.”
“उन्होंने मदद करने में असमर्थता जताई और कहा कि मैं खुद जांच करा लूं. मैंने बताया कि अगर ऐसी जांच को सबूत के रूप में इस्तेमाल करना है, तो इसे उचित कानूनी प्रक्रिया और पुलिस के समन्वय में कराया जाना चाहिए. इसके बावजूद कोई मदद नहीं की गई,” सिंह ने आरोप लगाया.
गुरुग्राम पुलिस ने दुर्व्यवहार से इनकार किया
डीसीपी (ट्रैफिक) प्रतीक गहलोत ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट के लिए पुलिस आयुक्त की ओर से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की गई है.
उन्होंने कहा कि एसओपी के अनुसार उन सड़कों पर हर सप्ताह शराब पीकर वाहन चलाने की जांच अभियान चलाया जाता है, जहां ऐसे मामलों की संभावना अधिक होती है. यह अभियान खास तौर पर बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को रात 10 बजे से 1 बजे तक चलाया जाता है.
उन्होंने कहा कि एसओपी के तहत जांच के दौरान जोनल अधिकारी के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा पहनना अनिवार्य है, ताकि चालान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और पूरी जांच की रिकॉर्डिंग हो सके. इसके अलावा, हर चालक के टेस्ट के लिए अल्कोहल सेंसर मशीन में नया पाइप/माउथपीस इस्तेमाल किया जाता है. गहलोत ने कहा कि टेस्ट केवल एक बार किया जाता है. मामले में लगाए गए आरोपों पर गहलोत ने स्पष्ट किया कि एसीपी (ट्रैफिक मुख्यालय एवं हाईवे) सतपाल यादव जांच कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “जांच के शुरुआती निष्कर्षों के अनुसार, ट्रैफिक जोनल अधिकारी द्वारा शराब जांच अभियान के दौरान रिकॉर्ड की गई बॉडी-वॉर्न कैमरा फुटेज की समीक्षा की गई. इस समीक्षा में पाया गया कि चालक का चालान मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत किया गया, क्योंकि अल्कोहल सेंसर में रीडिंग 91 आई थी.”
गहलोत ने आगे कहा, “इसके अलावा, ऐसी कोई भी सामग्री या सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस के किसी अधिकारी या कर्मचारी ने चालक या उसके परिवार के साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार या गलत व्यवहार किया हो.”
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