अहमदाबाद, नौ मार्च (भाषा) गुजरात के मोरबी कस्बे में एक पुल के टूटने के चार महीने बाद राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय को बताया कि इसने शहरी क्षेत्रों के छोटे-बड़े सभी पुलों के निरीक्षण व रखरखाव के संबंध में एक विस्तृत और समान नीति बनाई है।
इस पुल के टूटने से 135 लोगों की मौत हुई थी।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए जे देसाई और न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव की पीठ के समक्ष पेश हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा कि इसने नगरपालिकाओं और नगर निगमों के तहत आने वाले क्षेत्रों के छोटे-बड़े पुलों के निरीक्षण और रखरखाव के संबंध में एक सरकारी संकल्प (जीआर) छह मार्च को जारी किया था।
उच्च न्यायालय उस जनहित याचिका पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहा था जिसे 30 अक्टूबर को मच्छू नदी पर बने झूला पुल हादसे को लेकर दायर किया गया है।
गुजरात उच्च न्यायालय से सरकार ने कहा कि इसने संरचनाओं का निरीक्षण साल में दो बार करने के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित की है। यह निरीक्षण बरसात के मौसम से पहले और बाद में (मई और अक्टूबर) में किया जाएगा।
हलफनामें में कहा गया है कि निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करने का काम कम से कम उप अधिशासी अभियंता स्तर के अधिकारी करेंगे और उसके आधार पर अधिशासी अभियंता इन संरचनाओं की भौतिक रूप से जांच करेंगे।
राज्य प्रशासन ने कहा कि पुलों को पहुंची किसी क्षति पर समय से निर्देश देने और उपचारात्मक कदम उठाने के लिए भी निरीक्षण किया जाएगा।
सरकार ने पुलों का निरीक्षण करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किये हैं। सरकार ने इसके पहले कहा था कि शहरी विकास विभाग के अंतर्गत 461 पुल हैं जिनमें से 398 के मरम्मत की कोई जरूरत नहीं है। इन पुलों में राजकोट स्थित दो झूला पुल भी हैं।
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश
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