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Friday, 24 April, 2026
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सरकार को ‘‘हमारे खिलाफ कुछ मत कहो’’ वाला रवैया नहीं अपनाना चाहिए: सलमान खुर्शीद

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(अतिरिक्त सामग्री के साथ)

(आसिम कमाल)

नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को गिरफ्तार किए जाने के मामले में जर्मनी की आलोचना पर भारत के पलटवार के मद्देनजर रविवार को कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रतिकूल राय के लिए कोई कारण ही नहीं हो तथा उसे ‘‘हमारे खिलाफ कुछ मत कहो’’ वाला रवैया नहीं अपनाना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि सरकार यह सुनिश्चित करने में ‘‘निष्क्रिय’’ रही है कि देश का कानून बिना किसी भय के और बिना भेदभाव के लागू किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि ‘‘हर चीज पर बोलना पसंद करने वाले’’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एकता के बारे में और ‘‘हम दोबारा एकसाथ कैसे आएं’’ इसके बार में क्यों नहीं बोलते।

खुर्शीद ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘ यदि वह ऐसे प्रधानमंत्री होते जो चुप रहते हों, तो अलग बात होती लेकिन वह चुप रहने वाले प्रधानमंत्री नहीं हैं, वह बोलते हैं। तो वह इस बारे में कुछ क्यों नहीं बोल रहे हैं। वह यह क्यों नहीं कहते कि चलिए हम साथ आएं, अगर हम बंटे रहे तो यह देश सफल नहीं हो पाएगा।’’

विपक्ष की एकता और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में उसकी राह के बारे में पूछे जाने पर खुर्शीद ने कहा कि विपक्षी दलों का मुकाबला एक ‘‘बेहद चालक विरोधी’’ से है और अगर उन्होंने जल्दी काम नहीं किया तो वे पिछड़ जाएंगे।

खुर्शीद ने कहा कि इस देश को बचाने के लिए एक साझा मंच बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘‘जो ऐसा करने में नाकाम रहेंगे, इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।’’

कांग्रेस नेता ने जुबैर की गिरफ्तारी और असहमति की आवाज को कथित तौर पर दबाए जाने के मुद्दे पर कहा कि खुले तौर पर बात करना बेहद कठिन होता जा रहा है क्योंकि इसके परिणाम ‘‘अनिष्ट का पूर्वाभास’’ देते हैं।

उन्होंने कहा,‘‘ आपको तत्काल जमानत नहीं मिलती, अगर सभी को उच्चतम न्यायालय जाना पड़े ….तो यह चिंताजनक बात है।’’

जुबैर को गिरफ्तार किए जाने पर जर्मनी की ओर से आलोचना के बारे में तथा यह पूछे जाने पर कि क्या तथ्य खोजने वाले के खिलाफ अथवा कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ कार्रवाई से विदेशों में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है, खुर्शीद ने कहा कि जब भारत को दुनिया से प्रोत्साहन मिलता है तो इसकी सराहना होती है लेकिन जब दुनिया ऐसे मुद्दे उठाती है जो ‘‘हमारे बारे में नकारात्मक होते हैं, तो हमें बहुत बुरा लगता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है कि हमारे आंतरिक मामलों में दखल मत दो। यह सही है, मैं कह सकता हूं, मैं भी सरकार में रहा हूं और सरकार में रहते हुए हमने भी यही रुख अपनाया था कि हम नहीं चाहते कि दुनिया हमारे आंतरिक मामलों में दखल दे।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘ तथ्य यह है कि दुनिया बदल रही है, दूसरे देशों में क्या हो रहा है, हम इसके बारे में राय रखते हैं, उसी प्रकार हमारे देश में क्या हो रहा है वे भी राय रखते हैं। अगर हम नहीं चाहते कि कोई प्रतिकूल राय बने, तो इसके लिए हमें अपना अच्छा पक्ष दिखाना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए की प्रतिकूल राय के लिए कोई कारण ही नहीं हो।’’

उन्होंने कहा कि सरकार को इस बारे में ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि ‘‘हमारे खिलाफ कुछ मत कहो’’ वाला रवैया अपनाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘ आप एक दुनिया में रहते हैं, आपको दुनिया के नियमों के अनुसार चलना होगा जिसमें आपकी भी साझेदारी है और अगर कहीं कुछ गलत होता है, तो हमारे पास उसे गलत कहने का उतना ही अधिकार है।’’

इसके उदाहरण में उन्होंने कहा कि यूक्रेन के बूचा में जो हुआ क्या भारत ने नहीं कहा कि वह गलत था और उसकी पूरी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि रूस शिकायत कर सकता था कि यह उसका सैन्य अभियान है और भारत उसमें हस्तक्षेप कर रहा है।

खुर्शीद ने कहा, ‘‘आप अकेले नहीं रहते हैं । आप एक सामूहिक विश्व में रहते हैं और सामूहिक विश्व में आपको इस बारे में संवेदनशील रहना होता है कि लोग आपकी गतिविधियों को कैसे देखते हैं। ’’

हालांकि, उन्होंने कहा कि आंतरिक मामलों में प्रत्यक्ष रूप से दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए और यह एक ऐसा सिद्धांत है जिसे भारत को बनाये रखना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मुझे लगता है कि कुछ सीमाएं हैं जिसके अंदर हमें विश्व की राय के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। ’’

उल्लेखनीय है कि जर्मनी के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बुधवार को ज़ुबैर के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के संदर्भ में कहा था कि पत्रकार जो कहते हैं और लिखते हैं, उसके लिए उन्हें सताया नहीं जाना चाहिए और उन्हें जेल में बंद नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने जर्मनी की आलोचना को खारिज करते हुए कहा था कि देश की न्यायपालिका की स्वतंत्रता सर्वविदित है और ‘‘तथ्यों को जाने बिना’’ की गईं टिप्पणियां ‘‘अनुपयोगी’’ होती हैं तथा इनसे बचना चाहिए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था, “ यह अपने आप में आंतरिक मुद्दा है। मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि मामले में न्यायिक प्रक्रिया चल रही है और मैं नहीं समझता कि यह मेरे लिए या किसी अन्य के लिए उस मामले पर टिप्पणी करना उचित होगा जो अदालत में लंबित है।”

खुर्शीद ने अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में नाकाम रहने को लेकर भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने में नाकाम रही है कि देश के कानून का इस्तेमाल बगैर भय या पक्षपात के किया जाए।

यह पूछे जाने पर कि पैगंबर मोहम्मद के बारे में भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नुपुर शर्मा की विवादित टिप्पणी को लेकर खाड़ी देशों की कड़ी प्रतिक्रिया ने क्या विदेशों से नकारात्मक प्रतिक्रिया की प्रवृत्ति शुरू कर दी है, खुर्शीद ने कहा, ‘‘आप इसे कड़ी प्रतिक्रिया कह सकते हैं या आप इसे एक ऐसी प्रतिक्रिया कह सकते हैं जिसे आप अनिश्चित काल के लिए टाल नहीं सकते हैं, कभी ना कभी आपके मित्रों को भी शर्मिदंगी झेलनी पड़ेगी और उन्हें मुखर होना होगा क्योंकि उनके खुद के निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां के लोगों को उन्हें संतुष्ट करना पड़ेगा।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘वे अपनी आंखों पर पट्टी नहीं बांध सकते क्योंकि वे भी जवाबदेह हैं। आखिरकार उन्हें बोलना पड़ेगा। ’’

शर्मा की टिप्पणियों पर खाड़ी देशों में प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं का जिक्र करते हुए खुर्शीद ने कहा कि यह एक बहुत विशेष मामला है क्योंकि जो कुछ कहा गया उसने उन देशों में लोगों को धर्म के मामले में सीधे तौर पर प्रभावित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें अपने नागरिकों की चिंताओं को दूर करने के लिए समय पर जवाब देना चाहिए था। आप इसके लिए क्यों इंतजार करें कि कहीं और से कोई और व्यक्ति आपको जवाब देने को कहे।’’

भाषा

सुभाष नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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