नई दिल्ली: गोवा के बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब के मालिकों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) बैंक खातों में पैसों के लेन-देन, क्लब चलाने का लाइसेंस लेने के लिए कथित जालसाजी और विदेश भेजी गई रकम की जांच कर रहा है. पिछले महीने इसी नाइटक्लब में आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई थी. हादसे के लिए जिम्मेदार माने जा रहे कई अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है.
शुक्रवार को जांच एजेंसी की कई टीमों ने क्लब मालिक गौरव और सौरभ लूथरा से जुड़े गोवा और नई दिल्ली के आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. अरपोरा-नागोआ पंचायत के सचिव रघुवीर बागकर और पूर्व सरपंच रोशन रेडकर के यहां भी छापे मारे गए.
सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी की एक टीम ने यूके नागरिक सुरिंदर कुमार खोसला के परिसर पर भी छापा मारा. यहां बर्च बाय रोमियो लेन जिस ज़मीन पर बना था, उस खजाना ज़मीन (वेटलैंड) को कथित तौर पर अवैध तरीके से व्यावसायिक उपयोग में बदलने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच की जा रही है.
लूथरा भाई फिलहाल इस आग मामले में गोवा पुलिस की हिरासत में हैं. आग लगने के बाद 5 और 6 दिसंबर की मध्यरात्रि में वे थाईलैंड भाग गए थे, जहां से उन्हें डिपोर्ट किया गया. इस हादसे में मरने वालों में नाइटक्लब के किचन स्टाफ की संख्या सबसे ज्यादा थी.
ईडी के सूत्रों ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच गोवा पुलिस द्वारा दर्ज दूसरी एफआईआर से जुड़ी है, जिसमें नाइटक्लब चलाने के लिए ट्रेड लाइसेंस और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) हासिल करने में जालसाजी का आरोप लगाया गया है.
गोवा की स्थानीय अदालत में लूथरा भाइयों की ओर से पेश हुए वकील ए.वी. पथिरन ने इन आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों ने किसी भी सरकारी विभाग से एनओसी के लिए संपर्क नहीं किया था और उन्हें अपने स्टाफ द्वारा की गई किसी भी कथित धोखाधड़ी की जानकारी नहीं थी.
स्वास्थ्य विभाग की शिकायत
ईडी ने 17 दिसंबर को दर्ज उस एफआईआर के आधार पर कार्रवाई शुरू की, जो बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब के अधिकृत प्रतिनिधियों के खिलाफ जानबूझकर और बेईमानी से उत्तरी गोवा के कैंडोलिम स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से एनओसी तैयार कराने के आरोप में दर्ज की गई थी.
गोवा पुलिस की यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 336 (2&3) (जालसाजी), 338 (कीमती प्रतिभूतियों, वसीयत या प्राधिकरण दस्तावेजों की जालसाजी), 340(2) (जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का बेईमानी से असली के रूप में इस्तेमाल), 318 (4) (संपत्ति या कीमती सुरक्षा की डिलीवरी के लिए धोखाधड़ी से प्रेरित करना) और 3(5) (आपराधिक कृत्य के लिए साझा मंशा) के तहत दर्ज की गई है. यह शिकायत स्वास्थ्य अधिकारी ने दर्ज कराई थी, जिसमें उनके हस्ताक्षर की जालसाजी का आरोप लगाया गया है.
आरोप है कि इस तरह से हासिल किया गया स्वास्थ्य विभाग का लाइसेंस बाद में आबकारी विभाग में जमा कर ट्रेड लाइसेंस लिया गया.
स्वास्थ्य अधिकारी ने आरोप लगाया कि नाइटक्लब के अधिकृत व्यक्तियों द्वारा जो एनओसी जमा की गई थी, वह असल में उत्तरी गोवा के कैलंगुट में स्थित एक अन्य रेस्टोरेंट के नाम से जारी की गई थी.
उन्होंने अपनी पुलिस शिकायत में कहा, “हमारे रिकॉर्ड की आंतरिक जांच से यह पुष्टि होती है कि हमारे विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठान या व्यक्ति को कोई ऐसी एनओसी जारी नहीं की है. यह दस्तावेज जाली है और इस पर किया गया हस्ताक्षर फर्जी/अनधिकृत है.”
ईडी के सूत्रों ने बताया कि छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों के आधार पर जमीन के रूपांतरण से जुड़े सभी रिकॉर्ड की जांच की जाएगी.
एक अधिकारी ने कहा, “एनओसी और अन्य दस्तावेजों में जालसाजी को देखते हुए, जिनके आधार पर आबकारी विभाग से ट्रेड लाइसेंस लिया गया, पूरा व्यवसाय और उससे हुई कमाई अपराध से अर्जित आय के दायरे में आती है.”
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की “गहन” जांच में वे लेन-देन भी सामने आएंगे जो वास्तविक हैं, जैसे कर्मचारियों को वेतन भुगतान, करों का भुगतान आदि.
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