Thursday, 20 January, 2022
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हर जगह कचरा, दलदल बनी सड़कें, UP के फिरोज़ाबाद में हैं एक संक्रमित शहर के सभी लक्षण

अगस्त के अंत में शुरू हुए पांच बीमारियों के प्रकोप- मुख्यत: डेंगू ने- UP के फिरोज़ाबाद में 60 से अधिक जानें ले ली हैं. यहां के निवासियों और अधिकारियों के बीच साफ-सफाई एक बड़ी चिंता है.

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फिरोज़ाबाद: फिरोज़ाबाद शहर के बीच से गुज़रते 8 किलोमीटर लंबे सीवेज ड्रेन रहना नाला के दोनों ओर झुग्गी बस्तियां हैं. ड्रेन की दुर्गंध यहां की हवा में भरी है, और भारी बारिशों ने ज़्यादातर कच्ची सड़कों को दलदल में तब्दील कर दिया है.

झुग्गी बस्तियों के बीच ज़मीन के कुछ ख़ाली टुकड़ों पर, बारिश के पानी ने तालाब बना दिए हैं, और इन जलाशयों के किनारों पर स्थानीय लोगों द्वारा फेंके गए कचरे के ढेर हैं. सुअर, गाएं और कौए, इस कचरे में भोजन तलाशते रहते हैं, और भारी संख्या में मक्खियां और मच्छर भिनभिनाते रहते हैं.

दिप्रिंट ने पिछले हफ्ते शहर की जिन तीन बस्तियों- सुदामा नगर, महादेव नगर, और ठारपूठा का दौरा किया, वहां कचरा और जलभराव एक आम नज़ारा है.

थारपुथा की कच्ची सड़कें बारिश के कारण दलदल में तब्दील | शुभांगी मिश्रा/ दिप्रिंट

ठारपूठा के निवासियों का कहना था कि अकेले उन्होंने पांच बीमारियों- डेंगू, मलेरिया, स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पिरोसिस और वायरल बुख़ार- के इस प्रकोप में 10-12 बच्चे गंवा दिए हैं, जिसने एक महीने से शहर को हिलाकर रखा हुआ है.

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 20 अगस्त के बाद से, जब इस प्रकोप को पहली बार एक ऐसी रहस्यमयी बीमारी के रूप में पहचाना गया, जो मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित कर रही है, अब तक 63 मौतें हो चुकी हैं.

अधिकारियों ने प्रकोप के प्रमुख चालक के रूप में डेंगू की पहचान की है, जो एक वेक्टर जनित रोग है, और जो अधिकारियों के अनुसार अब उतार पर है. बच्चों के सबसे अधिक प्रभावित होने का संबंध, डेंगू के डी2 स्ट्रेन से जोड़ा गया है, जिसे ज़िला अधिकारी ‘बहुत विषैला और ज़्यादा ख़तरनाक बताते हैं’.

डेंगू मच्छरों के काटने से फैलता है, और रोकथाम की सलाह में मच्छरों से सुरक्षा पर ज़ोर दिया जाता है.

डब्लूएचओ गाइडलाइन्स में सलाह दी जाती है, कि ‘पर्यावरण प्रबंधन और परिवर्तन के ज़रिए’ मच्छरों को अंडे देने की जगह तक जाने से रोका जाए. इनके अंतर्गत ‘ठोस कचरे का सही निस्तारण, मानव-निर्मित कृत्रिम आवासों को हटाना जहां पानी रुकता हो, पानी को ढक कर रखना, हर सप्ताह घरेलू पानी की टंकियों को ख़ाली करके साफ करना, और बाहर रखी पानी की टंकियों पर, उपयुक्त कीटनाशक छिड़कना आदि शामिल हैं’.

निवासियों तथा अधिकारियों के साथ बातचीत में, प्रकोप के कारणों की व्याख्या में बार बार, इन दिशा-निर्देशों के कथित उल्लंघन का हवाला दिया गया, और दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर उंगली उठाई.

लेकिन, ज़िला अधिकारी स्वीकार करते हैं कि इस प्रकोप का माहौल बनने के पीछे, प्रशासन का कोविड महामारी पर अधिक ध्यान देना, आंशिक रूप से ज़िम्मेदार हो सकता है.

क्योंकि, केंद्र सरकार के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम पोर्टल के अनुसार- जहां हर ज़िले को अनिवार्य रूप से हर हफ्ते बीमारियों के प्रकोप पर ताज़ा आंकड़े देने होते हैं- ज़िले से पिछले तीन वर्षों में इन पांच में से किसी एक बीमारी के प्रकोप की ख़बर नहीं मिली थी.

‘हमें सफाई चाहिए’

दिप्रिंट की टीम जब एक सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र सुदामा नगर में पहुंची, जहां का 30 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दौरा किया था, तो नगर पालिका के वर्कर्स एक प्लॉट की सफाई कर रहे थे, जहां बहुत सारा कचरा पड़ा था. स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले 15-20 दिनों से, सफाई का काम नियमित रूप से चल रहा है.

सुदामा नगर में किया जा रहा है एंटी लार्वा दवा का छिड़काव | शुभांगी मिश्रा/ दिप्रिंट

लेकिन, महादेव नगर और ठारपूठा के निवासियों का कहना था, कि प्रकोप फैलने के बाद से उन्होंने केवल एक बार फॉगिंग और छिड़काव किए जाते हुए देखा है.

महादेव नगर के एक निवासी 72 वर्षीय चोखे लाल ने कहा, ‘मैंने तो इस इलाक़े में कभी किसी झाड़ू वाले को भी नहीं देखा है, मच्छर-मार दवाओं वालों की तो बात ही छोड़िये, और मैं पिछले पांच साल से यहां रह रहा हूं’.


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‘मेरा घर इस प्लॉट के बिल्कुल बग़ल में है जिसमें पानी भरा हुआ है, और वो इतना बड़ा है कि उसे आप एक झील कह सकते हैं. डेंगू के इतने गंभीर प्रकोप के बाद भी, हमने अभी तक यहां कोई कार्रवाई नहीं देखी है’.

ठारपूठा में, स्थानीय निवासी भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे- 24 सितंबर को जब ये रिपोर्टर वहां पहुंची, तो उनकी हड़ताल को चार दिन हो चुके थे. उनकी मांग थी सफाई.

एक स्थानीय निवासी 25 वर्षीय विकी यादव ने कहा, ‘ये नगर निगम का वार्ड 32 है और इस इलाक़े में बिल्कुल कोई विकास नहीं हुआ है. कच्ची सड़कें दलदल बन गई हैं, जलभराव इतना ख़राब है कि कॉलोनी के पीछे का एक ख़ाली प्लॉट तालाब बन गया है, और वहां से पानी के बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है’.

‘इसकी वजह से इलाके में डेंगू फैल गया है. मैं आपसे बताता हूं कि कम से कम 10 बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं, और हम 10-12 बच्चों को खो चुके हैं. लेकिन इतनी मौतों और तबाही के बाद भी, अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है’.

25 सितंबर को विधायक मनीष असीजा ने उन्हें एक लिखित आश्वासन दिया, कि वो इलाक़े का विकास कराएंगे, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने हड़ताल बंद कर दी.

इसी तरह के मसले तब भी सामने आए, जब दिप्रिंट की टीम ने पिछले हफ्ते, फिरोज़ाबाद के दो गांवों- नगला अमान और ननला मवासी का दौरा किया. रहना नाले के अलावा एक और ड्रेन है, जो फिरोज़ाबाद शहर के बीच बहता है- बम्बा नाला- और दोनों में ही पूरे शहर का सीवेज बहता है.

नगर आयुक्त प्रेरणा शर्मा ने कहा कि ज़िले में ड्रेन्स के पानी को सीवेज कंट्रोल प्लांट्स में साफ किया जाता है, और हर साल बारिश के मौसम से पहले, ड्रेन्स को साफ भी कराया जाता है. लेकिन, उन्होंने कहा कि लोग पानी के अंदर प्लास्टिक का कचरा फेंकते हैं, जो किनारों पर जमा हो जाता है.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, ‘चूंकि लोगों को ड्रेन के अंदर प्लास्टिक वस्तुएं फेंकने की आदत है…इसलिए वो बहुत नियमित रूप से उसके किनारों पर जमा होती रहती हैं. बीमारियों के प्रकोप के बाद भी हमने ड्रेन की सफाई कराई, लेकिन उसमें हमें गाद नहीं बल्कि प्लास्टिक और दूसरा कचरा तैरता हुआ मिला’.

आयुक्त ने कहा कि खुले हुए ड्रेन्स के अंदर मच्छर पैदा नहीं होते, क्योंकि उनका पानी बहता रहता है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा पानी पर लार्वा-विरोधी समाधान के तौर पर, बीटीआई (बैसिलस थुरिंजियंसिस की उप-जाति इज़राइलेंसिस- मिट्टी में जैविक या प्राकृतिक तरीक़े से पाए जाने वाले बेक्टीरिया) और कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है.

फिरोज़ाबाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी दिनेश कुमार प्रेमी ने कहा, कि लोगों द्वारा घरों में ग़लत ढंग से पानी जमा करना भी इस प्रकोप के पीछे एक कारण है. उन्होंने आगे कहा कि फिरोज़ाबाद के अधिकतर घरों में, हर दिन केवल एक घंटे के लिए पाइप से पानी आता है, जिसकी वजह से लोग घरों में बड़ी मात्रा में पानी जमा करते हैं.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, ‘डेंगू मच्छर घर के अंदर रहता है. आमतौर पर इसका जीवन 10 दिन का होता है, और ये पूरे परिवार को संक्रमित कर सकता है तथा प्रजनन भी कर सकता है, जिससे फिर पूरा इलाक़ा संक्रमित हो सकता है. फिरोज़ाबाद शहरी इलाक़े में लोग 200 लीटर तक की बड़ी टंकियों में पानी जमा करते हैं, जो अकसर खुली रहती हैं जिनमें लार्वा पैदा होता है और संक्रमण फैलाता है’.

लेकिन वो इस सीज़न डेंगू नियंत्रण के रोकथाम उपायों में हुई संभावित कोताहियों को स्वीकार करते नज़र आए. प्रेमी के अनुसार, ‘हो सकता है’ कि कोविड पर ज़्यादा ध्यान देने के कारण, ज़िले की नगर पालिकाएं समय पर ड्रेन्स की सफाई न कर पाई हों, या इस मॉनसून सीज़न में डेंगू तथा मलेरिया के बारे में जागरूकता न फैला पाई हों.

लेकिन, उन्होंने ये भी कहा कि इस साल बारिशें भी ज़्यादा भारी, छिटपुट, और बेमौसमी रही हैं, जिसने प्रकोप के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में, अहम भूमिका निभाई है.

नियंत्रण के उपाय चल रहे हैं

ये पूछे जाने पर, कि प्रकोप पर नियंत्रण के लिए प्रशासन क्या क़दम उठा रहा है, नगर आयुक्त शर्मा ने कहा कि वो लार्वा-विरोधी दवाओं का छिड़काव करा रहे हैं, और पूरे शहर में फॉगिंग करा रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि निगम ने पूरे शहर के तालाबों में, मच्छरों को खाने वाली 25,000 मछलियां छोड़ी हैं, और बहुत सी जगहों से पंपों के ज़रिए, जमा हुआ पानी बाहर निकलवाया है.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, ‘निगम ने 25 प्लॉट्स साफ कराए हैं, जिनमें प्रकोप के बाद से कचरा पड़ा हुआ था, और 450 अतिरिक्त कर्मी प्रभावित इलाक़ों में सफाई के काम के लिए तैनात किए हैं. निगम ने इन इलाक़ों में मच्छर भगाने वाली क्रीम ऑडोमॉस की 25,000 ट्यूबें बटवाईं हैं’.

सुदामा नगर में एक ताजा चित्रित डेंगू जागरूकता संदेश | शुभांगी मिश्रा/ दिप्रिंट

सीएमओ प्रेमी ने कहा कि चिकित्सा विभाग पांच-चरणों के एक कार्यक्रम के ज़रिए, इस प्रकोप का मुक़ाबला कर रहा है, जिसमें घर-घर जाकर सर्वे, बुख़ार का लक्ष्ण दिखा रहे लोगों का इलाज, स्रोत को घटाना जिसका मतलब है कि घरों के अंदर पानी के कूलर्स तथा टंकियां साफ करना, और जमा किए हुए उस पानी में लार्वा-विरोधी दवा छिड़कना, जो पीने के लिए नहीं है.

प्रेमी ने कहा कि अगर कहीं डेंगू का एक भी मरीज़ मिलता है, तो वो आसपास के 50 घरों का सर्वे करते हैं, और फॉगिंग तथा लार्वा-विरोधी दवा के छिड़काव का अभियान भी चला रहे हैं.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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