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Friday, 14 June, 2024
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हुबली ईदगाह में कड़ी सुरक्षा के बीच हुई गणेशोत्सव की शुरुआत, कल देर रात आया था कोर्ट का फैसला

जिला प्रशासन ने तीन दिन तक यहां पूजा करने की इजाजत दे दी है. ईदगाह मैदान में किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं.

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नई दिल्ली: कर्नाटक उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के कुछ घंटे बाद ईदगाह मैदान में कड़ी सुरक्षा के बीच बुधवार को गणेशोत्सव की शुरुआत की गई.

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम सेना प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने अपने समर्थकों के साथ भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की और पूजा-अर्चना की.

मुतालिक ने पूजा पंडाल में पत्रकारों से कहा, ‘कानूनी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए हमने पूजा-अर्चना की. कुछ असामाजिक तत्वों ने हमें रोकने की कोशिश, लेकिन फिर भी हमने पूजा की जो न केवल हुबली के लोगों के लिए बल्कि पूरे उत्तरी कर्नाटक के लिए खुशी की बात है.’

मुतालिक ने कहा कि हिंदू समुदाय लंबे समय से इसका सपना देख रहा था, जिसे उन्होंने एक ‘ऐतिहासिक’ क्षण बताया.

मुतालिक के अनुसार, जिला प्रशासन ने तीन दिन तक यहां पूजा करने की इजाजत दे दी है. ईदगाह मैदान में किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं.

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गौरतलब है कि मंगलवार को देर रात हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय ने धारवाड़ नगर आयुक्त के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें शहर के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी उत्सव आयोजित करने की अनुमति दी गई थी.

कर्नाटक के हुबली-धारवाड़ नगर निगम(एचडीएमसी) ने यहां ईदगाह मैदान में तीन दिनों के लिए गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति देने का फैसला किया था.

हुबली-धारवाड़ के महापौर इरेश अचंतगेरी ने निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ चली लंबी बैठक के बाद सोमवार देर रात इस फैसले की घोषणा की. उन्होंने बताया कि यह फैसला नगर निकाय द्वारा इस मुद्दे पर गठित सदन की समिति की अनुशंसा पर लिया गया.

महापौर ने कहा, ‘सदन की समिति ने कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लेने के बाद गणेश उत्सव की अनुमति देने की अनुशंसा की थी। इसे उत्सव को अनुमति देने के पक्ष में 28 और विरोध में 11 ज्ञापन मिले थे.’

उन्होंने बताया कि समिति की रिपोर्ट और विस्तृत चर्चा के बाद तीन दिन के लिए गणेश उत्सव की अनुमति देने का फैसला किया गया। महापौर ने बताया कि छह संगठनों ने गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनमुति मांगी थी, जिनमें से एक को चुना गया और बाकी से सद्भावनपूर्वक तरीके से उत्सव मनाने में सहयोग करने का अनुरोध किया गया.

गौरतलब है कि नगर निगम ने यह फैसला कांग्रेस पार्षदों के विरोध के बावजूद लिया है.

अधिकाारियों ने बताया कि एक विवाद के बाद उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार मुस्लिम समुदाय को इस मैदान में साल में केवल दो बार नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाती है और नगर निगम स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर वहां राष्ट्र ध्वज फहराता है.


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