चंडीगढ़: गुरुवार को हिसार में एक व्यक्ति के पास से तीन अवैध पिस्तौल, छह मैगजीन और 25 ज़िंदा कारतूस मिले. पुलिस का कहना है कि इनमें से एक पिस्तौल तुर्किए में बनी जिगाना थी. पांच हफ्तों में हिसार में मिली यह चौथी जिगाना पिस्तौल थी.
इसके अलावा, इसी कंपनी की पिस्तौल का इस्तेमाल अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोली चलाने, पंचकूला में बीजेपी नेता नरेंद्र लुबाना के भाई रतन लुबाना पर हुए हमले और जांचकर्ताओं के मुताबिक, हाल के समय में देश में हुई कुछ सबसे चर्चित हत्याओं में भी किया गया. पुलिस का कहना है कि गैंगस्टर और शूटर अब इस पिस्तौल का नाम लेकर मांग करते हैं.
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा के पैतृक गांव गंगवा के पास पुलिस की अपराध जांच एजेंसी (सीआईए) की एक टीम ने गुप्त सूचना मिलने के बाद हिसार के रहने वाले शुभम को पकड़ा. शुभम के खिलाफ आज़ाद नगर थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. 29 अक्टूबर को जारी एक प्रेस नोट के मुताबिक, पुलिस हथियारों के बारे में पता लगाने के लिए उसकी रिमांड मांगेगी.
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए शूटर हर बार पुलिस को एक ही कहानी बताते हैं. उनका कहना है कि ये हथियार मध्य प्रदेश से आते हैं. वहां बुरहानपुर, धार, खरगोन, बड़वानी और सेंधवा से एक नेटवर्क काम करता है. आरोप है कि इन इलाकों में तुर्की की पिस्तौलों की नकल को स्थानीय स्तर पर जोड़कर बनाया और बेचा जाता है.
जिगाना तुर्किए की हथियार बनाने वाली कंपनी टीआईएसएएस की सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौलों की एक सीरीज़ है. टीआईएसएएस का पूरा नाम ट्राब्जोन सिलाह सनायी ए. एस. है. यह कंपनी दुनिया भर में छोटे हथियार बनाने के लिए जानी जाती है.
जिगाना क्यों?
आखिर यह पिस्तौल भारत में अपराधियों की पहली पसंद क्यों बन गई है? हरियाणा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसकी तीन वजहें हैं: यह ठीक से काम करती है, इसे आसानी से छिपाया जा सकता है और इसकी अच्छी पहचान है. उन्होंने कहा कि सस्ती देसी पिस्तौल गलत समय पर फंस सकती है या उससे गोली नहीं चल सकती. जबकि सुपारी लेकर हत्या करने वाले शूटर के लिए ऐसा जोखिम उठाना संभव नहीं है.
इसके उलट, अपराधियों के बीच जिगाना की पहचान ऐसी पिस्तौल के रूप में है जो फंसती नहीं है और कई बार गोली चलाने के बाद भी गर्म नहीं होती. इसका आकार भी छोटा है, इसलिए इसे बिना किसी का ध्यान खींचे ले जाया जा सकता है.
इसके बाद इसकी पहचान का मामला आता है. अधिकारी ने बताया कि जब भी किसी बड़े मामले में जिगाना का इस्तेमाल होता है, तो जेल की बैरकों और गैंग के बीच होने वाली बातचीत में इसकी चर्चा फैल जाती है. इसके बाद अगला शूटर भी यही हथियार चाहता है.
इसकी कीमत भी अब रुकावट नहीं रही है. असली जिगाना की कीमत 7 लाख से 8 लाख रुपये तक हो सकती है, लेकिन मध्य प्रदेश में जोड़ी गई पिस्तौल 2 लाख से 4 लाख रुपये में खरीदी जाती है और फिर 5 लाख से 7 लाख रुपये में बेची जाती है.

कई मामलों में सामने आया इस्तेमाल
सिर्फ हिसार में ही करीब पांच हफ्तों में कम से कम चार बार ऐसी पिस्तौल बरामद हुई है. 22 सितंबर को सीआईए मिल गेट की टीम ने सातरोड़ कलां के एक व्यक्ति को दो तुर्किए पिस्तौलों, 75 ज़िंदा कारतूस और तीन मैगज़ीन के साथ गिरफ्तार किया था. इसके बाद सदर पुलिस ने खरड़ अलीपुर के रहने वाले जसबीर उर्फ जस्सू को गिरफ्तार किया. उसके पास से तुर्किए में बनी .32 बोर की जिगाना पिस्तौल मिली, जिसकी कीमत 2.5 लाख रुपये थी. गुरुवार को गंगवा के पास हुई गिरफ्तारी भी इसी तरह का मामला है.
हिसार से दूर भी कई मामलों में इस हथियार का इस्तेमाल सामने आया है. करीब चार महीने पहले पंचकूला में बीजेपी नेता नरेंद्र लुबाना के भाई रतन लुबाना पर गोली चलाने वाले दो शूटरों के पास से पुलिस ने जिगाना पिस्तौल बरामद की थी. पुलिस का कहना है कि ये हथियार रोहित गोदारा गैंग के एक हैंडलर शकील अंसारी ने भेजे थे.
टाइगर श्रॉफ की कार पर गोली चलाने के मामले में भी जिगाना पिस्तौल का इस्तेमाल सामने आया है. मुंबई क्राइम ब्रांच के सूत्रों का कहना है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अनिल पंडित के निर्देश पर आरोपियों ने अमृतसर से 2.5 लाख रुपये में यह पिस्तौल और 20 कारतूस खरीदे थे. पुलिस और जांचकर्ताओं ने इस तरह की पिस्तौल को प्रयागराज में गैंगस्टर अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या और मुंबई में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या से भी जोड़ा है.
भारत में आम नागरिकों के लिए जिगाना और पाकिस्तान में बनी पीएक्स5 जैसी इस तरह की पिस्तौलों पर प्रतिबंध है. हालांकि, भारत में हाल के अपराधों में इस्तेमाल की गई सभी पिस्तौलें जोड़कर नहीं बनाई गई हैं.
हरियाणा पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि मध्य प्रदेश से आने वाली पिस्तौलें भले ही जोड़कर बनाई जाती हैं, लेकिन दिखने में असली जैसी लगती हैं. हालांकि, पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि तुर्की में बनी असली जिगाना पिस्तौलें पंजाब के रास्ते हरियाणा पहुंच रही हैं. इन्हें पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए गिराया जाता है.
जांचकर्ताओं का कहना है कि ऐसे हथियार नेपाल के रास्ते भी देश में आते हैं. इसके बाद दूसरे राज्यों में सक्रिय तस्कर इन्हें आगे पहुंचाते हैं. इनमें मध्य प्रदेश का मालवा और सेंधवा वाला रास्ता भी शामिल है.
दूसरे अधिकारी ने टाइगर श्रॉफ के मामले का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि सोनीपत के आरोपियों में से एक कुणाल को अमृतसर में एक ‘डेड लेटर बॉक्स’ के जरिए जिगाना पिस्तौल दी गई थी. डेड लेटर बॉक्स ऐसी पहले से तय गुप्त जगह होती है, जहां कोई व्यक्ति छिपाकर पैकेट या दस्तावेज रख जाता है और दूसरा व्यक्ति बाद में वहां से उन्हें ले जाता है.
इस पूरे नेटवर्क की मध्य प्रदेश वाली कड़ी को तोड़ना ज्यादा मुश्किल है.
बुरहानपुर के पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी ने दिप्रिंट को बताया कि हाल के दिनों में हरियाणा में जब्त किए गए हथियार कहां से आए, इस बारे में वह कोई टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन उन्होंने पुष्टि की कि उनके इलाके में सिकलीगर नाम का एक समुदाय परंपरागत रूप से अवैध हथियारों के कारोबार से जुड़ा रहा है.
बागरी ने कहा, “हमने कई बार इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से जिगाना पिस्तौल भी बरामद की हैं. हालांकि, वे कई पीढ़ियों से इस कारोबार में शामिल हैं और इलाके के जंगलों में अवैध हथियार भी बनाते हैं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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