नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) चालीस वर्षों से अधिक समय तक सेवा दे चुके एक सेवानिवृत्त स्टेशन मास्टर ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से सभी स्टेशनों के ‘फर्स्ट-एड बॉक्स’ में अनुपयोगी दवाओं के बदले जीवन रक्षक दवाएं रखने की अपील की है, ताकि यात्रियों को समय पर और प्रभावी उपचार मिल सके।
मध्य रेलवे जोन के पूर्व स्टेशन मास्टर वीरेंद्र कुमार पालीवाल ने वैष्णव को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘भारतीय रेलवे के विभिन्न स्टेशनों और कार्यालयों में रखे जाने वाले अनिवार्य प्राथमिक चिकित्सा बक्सों की व्यापक समीक्षा एवं आधुनिकीकरण की तत्काल आवश्यकता है।’’
उन्होंने दावा किया, ‘जीवन रक्षक सुविधा होने के बावजूद, दुर्भाग्य से स्वतंत्रता के बाद से इस प्रणाली पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है और न ही इसे वैज्ञानिक रूप से अद्यतन किया गया है।’
उन्होंने वैष्णव से अनुरोध किया कि वह उनके प्रस्ताव को रेल मंत्रालय द्वारा एक जनवरी को शुरू की गई ’52 सप्ताह में 52 सुधार’ पहल में शामिल करें।
पालीवाल ने तर्क दिया कि हालांकि उनके पूरे करियर में ‘डायजेपाम टैबलेट’ जैसी दवाओं का इस्तेमाल एक बार भी नहीं किया गया, लेकिन ‘एंटीसेप्टिक’ के रूप में एकमात्र सोफ्रामाइसिन क्रीम की उपलब्धता पर्याप्त नहीं रही है।
पालीवाल ने कहा, ‘‘भारतीय रेलवे में लगभग 40 वर्षों की सेवा के अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर, मैं यह बताना चाहता हूं कि प्राथमिक चिकित्सा किट में वर्तमान में शामिल कुछ दवाएं या तो अप्रचलित हैं या वास्तविक आपात स्थितियों में व्यावहारिक रूप से अनुपयोगी हैं।’’
पालीवाल ने यह भी कहा कि यदि किसी दवा को प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ मरीज को नहीं दी जा सकती है, तो उसे शामिल करने का कोई खास उद्देश्य नहीं रह जाता है और उसे हटाने के बारे में समीक्षा की जा सकती है।
उन्होंने दिल के दौरे की आपात स्थिति में जीवन रक्षक दवाओं की अनुपलब्धता पर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा, ‘‘रेलवे परिसर में प्रतिदिन लाखों यात्रियों का आवागमन होता है। कर्मचारी तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं।’’
पूर्व स्टेशन मास्टर ने कहा, ‘‘हृदय रोग संबंधी बुनियादी आपातकालीन दवाओं की समय पर उपलब्धता से पेशेवर चिकित्सा सहायता पहुंचने से पहले सैकड़ों अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।’’
संपर्क करने पर पालीवाल ने कहा कि उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर प्राथमिक चिकित्सा बक्सों के समय के अनुरूप आधुनिक बनाने के संबंध में चिकित्सा विशेषज्ञों और रेलवे चकित्सकों से परामर्श किया तथा उनके सुझावों के आधार पर, उन्होंने रेल मंत्री को पत्र लिखने का फैसला किया, क्योंकि इस मुद्दे पर ‘तत्काल ध्यान’ देने की आवश्यकता है।
भाषा
राजकुमार सुरेश
सुरेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
