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Saturday, 28 March, 2026
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महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री रामदास कदम ने शिवसेना से इस्तीफा दिया

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मुंबई, 18 जुलाई (भाषा) उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना को झटका देते हुए वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री रामदास कदम ने सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया और दावा किया उनका लगातार ‘अपमान’ किया जाता रहा जबकि उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री रहने के दौरान व्यस्त रहे।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे को पत्र लिखकर कदम ने ‘शिवसेना नेता’ के तौर पर इस्तीफा दे दिया।

अपने पत्र में, कदम ने 2019 के चुनाव के बाद शिवसेना के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस के साथ गठबंधन पर अपनी नाराज़गी व्यक्त की, और इस गठजोड़ को उन्होंने शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे के विचारों के साथ विश्वासघात बताया।

रत्नागिरी जिले के रहने वाले कदम 1990 में पहली बार विधानसभा के सदस्य बने थे और तीन बार विधायक रहे।

उन्होंने 2005 में शिवसेना का नेता नियुक्त किया गया था। वह 2005-2009 के दौरान महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। वह 2010 में पहली बार विधान परिषद के सदस्य बने और 2015 फिर से एमएलसी चुने गए।

कदम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-शिवसेना (2014-2019) की गठबंधन सरकार में पर्यावरण मंत्री थे।

जब नवंबर 2019 में ठाकरे की अगुवाई में महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार बनी तो कदम को मंत्री पद नहीं दिया गया और वह नाराज़ बताए जा रहे थे। एमवीए सरकार जून 2022 में गिर गई थी।

उन्हें राज्य विधान परिषद के सदस्य के तौर पर एक और कार्यकाल के लिए पिछले साल टिकट नहीं दिया गया था।

पिछले महीने शिवसेना विधायक एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी के 39 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी।

रामदास कदम के बेटे योगेश कदम, रत्नागिरी जिले की दपोली सीट से विधायक हैं और वह भी शिंदे के गुट में शामिल हो गए थे।

शिंदे ने 30 जून को मुख्यमंत्री पद की और भाजपा नेता देवेंद्र फड़णवीस ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

रामदास कदम ने ठाकरे को लिखे पत्र में कहा, “ मेरे विधायक पुत्र योगेश और मेरा लगातार अपमान किया गया और आप मुख्यमंत्री बनने के बाद हमेशा व्यस्त रहते थे। मुझे दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना नेता नियुक्त किया था। हालांकि, मुझे एहसास हुआ कि उनकी मृत्यु के बाद इस पद का कोई मतलब नहीं है।”

उन्होंने कहा, “ जब आप राकांपा और कांग्रेस के साथ सरकार बना रहे थे तो मैंने आपसे हाथ जोड़कर अनुरोध किया था कि ऐसा न करें। दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने हमेशा कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई लड़ी, यह उनके विचारों के साथ विश्वासघात होगा।”

रामदास कदम ने कहा कि ठाकरे के राकांपा और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद से वह आहत महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “उस समय आपने मेरी बात नहीं सुनी। आज भी मैं आहत होता हूं। अगर शिवसेना सुप्रीमो होते, तो मुझे अपने जीवन में यह दिन नहीं देखना पड़ता।”

भाषा नोमान नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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