scorecardresearch
Wednesday, 1 April, 2026
होमदेशआम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और वकील एच.एस. फूलका भाजपा में शामिल

आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और वकील एच.एस. फूलका भाजपा में शामिल

Text Size:

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व नेता एच. एस. फूलका बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।

वह खासकर इस बात के लिए जाना जाता है कि उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों का प्रतिनिधित्व किया था।

फूलका का भाजपा में शामिल होने को पार्टी के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार को सत्ता से हटाने की तैयारी कर रही है।

फूलका केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, भाजपा महासचिव तरुण चुघ, पार्टी की पंजाब इकाई के प्रमुख सुनील जाखड़ और पार्टी मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी की उपस्थिति में पार्टी में शामिल हुए।

फूलका का भाजपा में स्वागत करते हुए पुरी ने कहा, “उनके शामिल होने से पार्टी और पंजाब में हमारे प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।”

उन्होंने फूलका के शामिल होने को न्याय और जवाबदेही के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया। उन्होंने दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने में उनके योगदान का उल्लेख किया।

फूलका ने कहा कि भाजपा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए उनकी कानूनी लड़ाई में साथ दिया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के शासन में पंजाब जिन चुनौतियों का सामना कर रही है उनका समाधान केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा ही सकती है।

फूलका ने कहा, “प्रधानमंत्री ने सिख मुद्दों में व्यक्तिगत रुचि दिखाई है। 1984 के दंगों पर मेरे काम के कारण उन्होंने हमेशा मेरे प्रयासों की सराहना की है।”

उन्होंने कहा कि मदन लाल खुराना, सुषमा स्वराज और विजय कुमार मल्होत्रा ​​जैसे नेताओं ने इस मुद्दे का समर्थन किया और भाजपा, विशेष रूप से दिल्ली में, इस मुद्दे को ऐसे लड़ा जैसे यह उनका अपना मुद्दा हो।

फूलका ने कहा,‘‘चूंकि भाजपा ने इस मुद्दे पर बहुत कुछ किया, इसलिए मैंने भी अपनी तरफ से यथासंभव योगदान दिया। मैंने बिना कोई पद संभाले पार्टी की कानूनी टीम का नेतृत्व किया। 2003 से 2013 तक, निर्वाचन आयोग में अपने पद से इस्तीफा देने के बाद, मैंने चुनावों में उनके कानूनी प्रयासों का मार्गदर्शन किया। इसीलिए मैंने औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है।’’

फूलका ने 2014 का लोकसभा चुनाव पंजाब के लुधियाना से ‘आप’ उम्मीदवार के रूप में लड़ा था लेकिन वह कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू से हार गए थे। बिट्टू अब भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री हैं।

फूलका ने 2017 में पंजाब की दाखा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। वह 2017 में करीब तीन महीने तक पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे।

इसके बाद उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों की पैरवी करने के लिए यह पद छोड़ दिया।

बुधवार को फूलका ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल होना उनकी ‘गलती’ थी।

उन्होंने कहा, “2014 में, भ्रष्टाचार के खिलाफ बढ़ते आक्रोश को देखते हुए, मुझे लगा था कि यह पार्टी देश को बदलने के लिए आई है। लेकिन अंदर जाकर मुझे एहसास हुआ कि हालात अलग हैं। उनसे जुड़ना एक गलती थी।”

पंजाब को लेकर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य कई संकटों का सामना कर रहा है।

फूलका ने कहा, ‘‘आज पंजाब की हालत देखकर मुझे दुख और अपराधबोध होता है कि मैं अब तक इससे दूर रहा। स्थिति बेहद गंभीर है—कानून व्यवस्था की समस्या, जबरन वसूली, व्यापक भ्रष्टाचार, नशीली दवाओं का सेवन और गहरा कृषि संकट। यदि पंजाब को पटरी पर वापस लाना है तो वह केवल भाजपा ही कर सकती है।’’

सन 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस को निशाना बनाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ये हत्याएं कांग्रेस के शासनकाल के दौरान हुईं और एक बड़ी साजिश का हिस्सा थीं।

भाषा

राजकुमार रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments