नयी दिल्ली, 22 दिसंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के सरकार के दृष्टिकोण को साकार करने में जन सेवक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और कहा कि मुख्य ध्यान विकास को जमीनी स्तर तक ले जाने पर केंद्रित किया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने भारतीय रक्षा लेखा सेवा (आईडीएएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों के एक समूह को संबोधित करते हुए कहा कि युवा अधिकारियों की युवा ऊर्जा और नवोन्मेषी सोच राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने उनसे ‘सेवा भाव’ और ‘कर्तव्य बोध’ को अपना मार्गदर्शक मंत्र बनाने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा, “देश 2047 तक विकसित भारत बनने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में इस सपने को साकार करने में सिविल सेवकों की अहम भूमिका होगी।”
राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि विकास समावेशी विकास और अंतिम छोर तक पहुंचने पर केंद्रित होना चाहिए।
भारतीय रक्षा लेखा सेवा के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह सेवा भारतीय सशस्त्र बलों और संबद्ध संगठनों के वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि रक्षा सेवाओं के लेखा एवं वित्तीय प्राधिकरण के रूप में, अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय सशस्त्र बलों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझना और आत्मसात करना चाहिए। राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि सशस्त्र बलों की परिचालन तत्परता सुनिश्चित करने के लिए विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता, सतर्कता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि सार्वजनिक धन करदाताओं के परिश्रम से अर्जित योगदान का प्रतिनिधित्व करता है।
एक अधिकारी प्रशिक्षु द्वारा विकसित भारत की यात्रा में सिविल सेवकों से अपेक्षाओं के बारे में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए, उन्होंने उनसे नवोन्मेषी बने रहने, आधुनिक प्रौद्योगिकियों के अनुकूल होने, अपने काम में उत्साह दिखाने, सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने और प्रशासन में नैतिक होने का आग्रह किया।
भाषा अमित माधव
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