अहमदाबाद, आठ जनवरी (भाषा) गुजरात में सत्ताधारी भाजपा के पांच विधायकों ने बृहस्पतिवार को सरकारी अधिकारियों पर निर्वाचित प्रतिनिधियों के सुझावों की अनदेखी करते हुए अपनी मनमर्जी से काम करने का आरोप लगाया और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से हस्तक्षेप की मांग की।
पटेल को लिखे एक पत्र में इन विधायकों ने आरोप लगाया कि वडोदरा जिले के अधिकारी आम जनता की दुर्दशा को नजरअंदाज कर रहे हैं और जमीनी हकीकतों पर विचार किए बिना सरकार के सामने एक “सुंदर तस्वीर” पेश कर रहे हैं।
वडोदरा जिले के इन विधायकों में दाभोई विधायक शैलेश मेहता, सावली से केतन इनामदार, वाघोडिया से धर्मेंद्रसिंह वाघेला, कर्जन का प्रतिनिधित्व करने वाले अक्षय पटेल और पादरा विधायक चैतन्यसिंह जाला शामिल हैं।
मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में इन भाजपा नेताओं ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए दावा किया कि उनका रवैया सरकार की छवि को धूमिल कर रहा है।
विधायकों ने गांधीनगर में पटेल के निजी सचिव को पत्र सौंपा।
उन्होंने एक पत्र में लिखा, “वर्तमान में, राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था ठप हो गई है। ऐसा लगता है कि जनता की दुर्दशा इस व्यवस्था के कानों तक नहीं पहुंच रही है। एक आम आदमी के लिए सरकारी दफ्तर से छोटा-मोटा काम करवाना भी किसी युद्ध लड़ने जैसा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारी और उनके कनिष्ठ अधिकारी मनमाने ढंग से व्यवहार कर रहे हैं और गैर-पेशेवर रवैया प्रदर्शित करते हैं तथा अक्सर मनमर्जी के आधार पर कार्य कर रहे हैं।
पत्र में कहा गया है कि कलेक्टर, जिला विकास अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और पुलिस आयुक्त जैसे अधिकारी जमीनी हकीकत या लोगों की समस्याओं को जाने बिना वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान “सुंदर तस्वीर” पेश करते हैं।
विधायकों ने आरोप लगाया, “सरकार से तथ्य छिपाए जा रहे हैं। प्रशासन मनमाने ढंग से चलाया जा रहा है क्योंकि ये अधिकारी खुद को जनता और निर्वाचित प्रतिनिधियों से ऊपर समझते हैं, जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है।”
विधायकों ने दावा किया कि उनके द्वारा सुझाए गए कार्य नहीं किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “इसके अलावा, अगर लोग अपना काम करवाने के लिए हमारी मदद मांगते हैं तो अधिकारी नाराज हो जाते हैं। ऐसी मानसिकता प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए उपयुक्त नहीं है।”
विधायकों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे ऐसे अधिकारियों को जनता के हित में निर्णय लेने के लिए कहें।
उन्होंने यह भी मांग की कि अधिकारियों को जन प्रतिनिधियों द्वारा सुझाए गए कार्यों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कहा कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
गांधीनगर में मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र सौंपने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए केतन इनामदार ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने का आग्रह करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि समन्वय बैठकों के दौरान स्थानीय स्तर पर बार-बार अपनी बात रखने के बावजूद कोई बदलाव नहीं हुआ था।
उन्होंने आरोप लगाया, “अधिकारी विधायकों की बात तक नहीं सुनते। वे मनमाने फैसले लेते हैं। आम जनता अपने काम करवाने के लिए दर-दर भटक रही है। अधिकांश समय ये अधिकारी लोगों की समस्याओं को हल करने के बजाय बैठकों में व्यस्त रहते हैं। स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।”
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प्रशांत नरेश
नरेश
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