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नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) भारत ने बृहस्पतिवार को अपना 74 वां गणतंत्र दिवस मनाया। साथ ही, राजपथ का नाम बदले इसे कर्तव्य पथ किए जाने के बाद पहली बार यहां परेड़ आयोजित की गई।
पिछले साल राजपथ का नाम बदलने के साथ-साथ इसे संवारा भी गया है।
भारत 26 जनवरी, 1950 गणतंत्र बना था और 1951 से, इस ऐतिहासिक पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। इसे सितंबर 2022 की शुरुआत तक आधिकारिक तौर पर राजपथ के नाम से जाना जाता था।
केंद्र सरकार ने इसका नाम बदल दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 सितंबर को राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के सड़क के इस हिस्से-कर्तव्य पथ- का उद्घाटन किया। इस साल की गणतंत्र दिवस परेड आयोजित होने के साथ ही दिल्ली के ऐतिहासिक क्षेत्र और उससे जुड़े इतिहास का भी एक पन्ना भी पलट गया।
भारत में स्वतंत्रता के बाद के युग में पले-बढ़े लोगों के लिए, राजपथ गणतंत्र दिवस समारोह का पर्याय बन गया था। ऐसा वार्षिक औपचारिक परेड के चलते था जो हर 26 जनवरी को आयोजित की जाती थी, जिसमें कई राष्ट्राध्यक्ष और अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां कार्यक्रम में प्रमुख मेहमान के रूप में शामिल होते थे। हालांकि 26 जनवरी, 2023 कई मायनों में भारत के लिए एक साधारण और असाधारण दोनों तरह का दिन था।
सामान्य रूप से यह एक और गणतंत्र दिवस समारोह था, लेकिन एक तरह से असाधारण भी था क्योंकि आयोजन स्थल को लिखित रूप में और कार्यक्रम के कमंटेटर एवं कई अन्य लोगों द्वारा मौखिक रूप से ‘कर्तव्य पथ’ के रूप में उल्लेखित किया गया।
पिछले साल सितंबर में केंद्र सरकार द्वारा राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किये जाने पर लोगों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रिया आई थी। विद्वानों और इतिहासकारों के एक वर्ग ने इसकी आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि यह ‘इतिहास को मिटाने का एक प्रयास’ है।
राजपथ के उद्घाटन के दिन, मोदी ने कहा था कि राजपथ भारत की ‘गुलामी’ का प्रतीक है और इसे अब इतिहास के हवाले कर दिया गया है। उन्होंने पुनर्निर्मित मार्ग जनता को समर्पित किया था और इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक प्रतिमा का अनावरण भी किया था।
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने पहले कहा था कि नया खंड पैदल चलने वालों के अधिक अनुकूल होगा। मंत्रालय के अनुसार ऐसा इसलिए क्योंकि पथ के किनारे जो ‘बजरी’ रेत थी, उसकी जगह नया लाल ग्रेनाइट पत्थर बिछा दिया गया है।
भाषा अमित पवनेश
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