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Saturday, 28 March, 2026
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पश्चिम एशिया संकट पर अनौपचारिक मंत्री समूह की पहली बैठक आज, राजनाथ सिंह करेंगे अध्यक्षता

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए निरंतर निगरानी और रणनीति में जरूरत के अनुसार बदलाव जरूरी है.

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज शाम अनौपचारिक मंत्री समूह की पहली बैठक की अध्यक्षता करेंगे.

केंद्र सरकार इस संघर्ष की स्थिति को लेकर लगातार समीक्षा बैठकें कर रही है और लोगों को भरोसा दिलाया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है. विदेश मंत्रालय पश्चिम एशिया के हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है और वहां मौजूद भारतीय नागरिकों को हर संभव सहायता देने की तैयारी में है.

इससे पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के साथ वर्चुअल बैठक की थी. इस बैठक में पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम और उसके भारत पर संभावित प्रभाव को देखते हुए राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई.

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों के सुझावों की सराहना की और कहा कि बदलती स्थिति से निपटने में ये सुझाव अहम भूमिका निभाएंगे. उन्होंने आगे आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्कता, तैयारी और समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया.

पश्चिम एशिया की स्थिति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को पहले भी ऐसे वैश्विक संकटों से निपटने का अनुभव है. उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र और राज्यों के मिलकर “टीम इंडिया” के रूप में काम करने को याद किया, जिससे सप्लाई चेन, व्यापार और आम जीवन पर असर को कम किया गया था. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भी यही सहयोग और समन्वय भारत की सबसे बड़ी ताकत है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए निरंतर निगरानी और रणनीति में जरूरत के अनुसार बदलाव जरूरी है. उन्होंने बताया कि 3 मार्च से एक अंतर-मंत्रालयी समूह रोजाना हालात की समीक्षा कर रहा है और समय पर फैसले ले रहा है. सरकार की प्राथमिकता आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग व सप्लाई चेन को मजबूत करना है.

प्रधानमंत्री ने राज्यों की अहम भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि फैसलों को लागू करने का काम राज्य स्तर पर होता है. उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच लगातार संवाद, जानकारी साझा करने और संयुक्त फैसले लेने की जरूरत बताई ताकि समय पर और बेहतर तरीके से कदम उठाए जा सकें.

बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार इस संकट से निपटने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि रसोई गैस (LPG) की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने और पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाने जैसे सकारात्मक कदम उठाए गए हैं. उन्होंने इस स्थिति से निपटने के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई.

कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने मौजूदा स्थिति पर प्रस्तुति दी और राज्यों को हालात से निपटने के लिए जरूरी कदमों और सुझावों की जानकारी दी.

मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की. उन्होंने इस संकट के दौरान अलग-अलग देशों से प्रधानमंत्री की कूटनीतिक बातचीत की भी प्रशंसा की, जिससे विदेशों में रह रहे भारतीयों के हित सुरक्षित रहें.

राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया कि देश में पेट्रोल, डीजल और LPG की पर्याप्त उपलब्धता है और जरूरी सामान की सप्लाई बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है.

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच भी फोन पर बातचीत हुई, जिसमें इस संघर्ष पर चर्चा की गई.

मुख्यमंत्रियों ने ईंधन पर उत्पाद शुल्क कम करने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे वैश्विक अनिश्चितता के बीच लोगों को राहत मिलेगी. उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कमर्शियल LPG आवंटन को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर संकट से पहले के स्तर के 70 प्रतिशत तक करने के फैसले का भी स्वागत किया.

मुख्यमंत्रियों ने भरोसा दिलाया कि वे केंद्र सरकार के साथ मिलकर बदलती स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए काम करते रहेंगे.

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