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Saturday, 17 January, 2026
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हजार करोड़ रुपये से अधिक के अवैध लेन-देन में बैंक अधिकारी समेत 19 के खिलाफ प्राथमिकी

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नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने साइबर अपराध और अन्य अवैध गतिविधियों से अर्जित एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के लेन-देन के मकसद से ‘म्यूल’ खाते खोलने के आरोप में पंजाब एंड सिंध बैंक के एक शाखा प्रमुख तथा 18 अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी की प्रारंभिक जांच में जाली दस्तावेजों का उपयोग करके ऐसी कंपनियों के नाम पर 13 ‘म्यूल’ खाते खोले जाने का खुलासा हुआ जो अस्तित्व में ही नहीं थी और इसी के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

एजेंसी ने पाया कि कई व्यक्तियों ने राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित बैंक की राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय शाखा में खाते खोलने के लिए जाली केवाईसी दस्तावेज, फर्जी किरायानामा और अन्य सहायक फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे। तब इस शाखा के प्रमुख विकास वाधवा थे।

एजेंसी ने प्राथमिकी में आरोप लगाया, ‘‘उक्त खाते अज्ञात बैंक अधिकारियों की मिलीभगत और आपराधिक साजिश से खोले गए थे।’’

‘म्यूल’ खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं जिसका इस्तेमाल अपराधी, खाताधारक की जानकारी से या जानकारी के बगैर, अवैध धन प्राप्त करने, धन अंतरित करने या उसे वैध बनाने के लिए करते हैं।

एजेंसी ने प्राथमिकी में आरोप लगाया है, ‘‘फर्जी कंपनियों के नाम पर इन चालू खातों को खोलने में सुविधा प्रदान करने के लिए बैंक अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से स्थल का दौरा करने के बाद रिपोर्ट तैयार की और व्यवसाय किए जाने का झूठा सत्यापन किया था।’’

केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि जिन 13 कंपनी के नाम पर ये चालू खाते खोले गए थे, वे अस्तित्व में ही नहीं थी और कागजी तौर पर इनका उपयोग सिर्फ जाली दस्तावेजों के जरिए केवल चालू खातों को खोलने तथा इनका (खातों का) इस्तेमाल किए जाने के लिए किया गया था।

सीबीआई ने कहा, ‘‘इन खातों का इस्तेमाल बाद में साइबर अपराध और अन्य अवैध गतिविधियों से प्राप्त धनराशि के लेन-देन के लिए किया गया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि इसमें शामिल लेनदेन की राशि लगभग 1084.00 करोड़ रुपये है।’’

भाषा यासिर पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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