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Friday, 1 March, 2024
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पंजाब-हरियाणा के किसान संगठन दिल्ली तक ट्रैक्टर मार्च की तैयारी में, संयुक्त किसान मोर्चा शामिल नहीं

किसानों की मांगों में उनकी फसलों के लिए एमएसपी की गारंटी, 58 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों के लिए पेंशन योजना, फसल बीमा योजना और लखीमपुर खीरी के किसानों के लिए न्याय शामिल हैं.

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गुरुग्राम: किसान मजदूर मोर्चा के तत्वावधान में हरियाणा और पंजाब में किसान संघ अपनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी सहित अपनी मांगों पर दबाव बनाने के लिए 13 फरवरी को दिल्ली की ओर अपने ट्रैक्टर चलाने के लिए कमर कस रहे हैं.

2020-21 में कृषि आंदोलन का नेतृत्व करने वाले 40 से अधिक किसान संघों के गठबंधन संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली मार्च के आह्वान से खुद को अलग कर लिया है. लेकिन, इसने लोगों से 16 फरवरी को औद्योगिक और क्षेत्रीय हड़ताल और ग्रामीण बंद में भाग लेने की अपील की.

जगजीत सिंह दल्लेवाल की भारतीय किसान यूनियन (एकता सिधूपुर), प्रगतिशील किसान मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह), किसान मजदूर संघर्ष समिति, भारतीय किसान नौजवान यूनियन, पंजाब, किसान मजदूर मोर्चा और कुछ अन्य निकाय पहले से ही एक सप्ताह से अधिक समय से हरियाणा और पंजाब के गांवों में ट्रैक्टर मार्च आयोजित कर रहे हैं.

सोमवार को चंडीगढ़ में किसान नेता डल्लेवाल, रमनदीप सिंह मान और अभिमन्यु कुहाड़ ने मीडिया से कहा कि सरकार ने न तो दिसंबर 2021 में दिल्ली आंदोलन को हटाने के समय किए गए वादों को पूरा किया है और न ही 2014 और 2019 के चुनाव पूर्व वादों का सम्मान किया है.

भारतीय किसान नौजवान यूनियन के अध्यक्ष अभिमन्यु कुहाड़ ने कहा कि हरियाणा और पंजाब के किसान अंबाला के पास शंभू सीमा, सिरसा जिले में डबवाली सीमा और संगरूर के पास खनौरी सीमा से अपना ट्रैक्टर मार्च शुरू करेंगे और दिल्ली की ओर मार्च करेंगे.

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कुहाड़ ने कहा कि अगर सरकार 2006-07 की रिपोर्ट में स्वामीनाथन पैनल द्वारा अनुशंसित सी2 प्लस 50 प्रतिशत (50 प्रतिशत लाभ के साथ फसलों पर व्यापक इनपुट लागत) के फार्मूले के अनुसार एमएसपी की गणना करती है, तो गेहूं का एमएसपी 4,300 से 4,500 रुपये बीच में आएगा. वर्तमान में, 2024-25 विपणन सत्र के लिए गेहूं का एमएसपी 2,275 रुपये प्रति क्विंटल है.

कुहाड़ ने आरोप लगाया, “हालांकि, 2006 से 2014 तक न तो कांग्रेस सरकार ने इस रिपोर्ट को लागू किया, न ही 2014 में सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने किया. 2014 के चुनाव से पहले, नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि यदि वह सत्ता में आते हैं तो वह स्वामीनाथन रिपोर्ट को अपनी सरकार के पहले नीतिगत निर्णय के रूप में लागू करेंगे. हालांकि, मोदी सरकार ने 2015 में सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया कि वह सिफारिशों को लागू नहीं कर सकती.”

दिप्रिंट ने फोन पर मान से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन वह उपलब्ध नहीं थे. बाद में, उन्होंने सोमवार को एक अज्ञात नंबर से कॉल किया और कहा कि वह और साथी किसान नेता सुरक्षा एजेंसियों द्वारा ट्रैक किए जाने से बचने के लिए फोन करने से बच रहे हैं.

उन्होंने कहा कि लखीमपुर खीरी के किसानों के लिए गारंटी और न्याय के रूप में एमएसपी की उनकी मांगों के अलावा, किसान संगठन 58 वर्ष की आयु पार करने वाले किसानों के लिए प्रति माह 10,000 रुपये की पेंशन योजना, एक एकड़ को एक इकाई मानकर सरकारी धन से फसल बीमा योजना और 2020 में किसानों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

दि प्रिंट द्वारा मंगलवार को संपर्क किए जाने पर, भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के अध्यक्ष और 2022 में पंजाब चुनाव लड़ने वाली संयुक्त किसान मोर्चा पार्टी के संस्थापक बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि मोर्चा का प्रस्तावित दिल्ली मार्च से कोई लेना-देना नहीं है.

इसी तरह, हरियाणा में सबसे सक्रिय किसान संगठनों में से एक माने जाने वाले भारतीय किसान यूनियन (चारुनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चारुनी ने कहा कि उनका संगठन न तो 13 फरवरी के दिल्ली मार्च में शामिल था और न ही 16 फरवरी की हड़ताल में शामिल था.

इस बीच, अंबाला पुलिस ने लोगों को बिना पूर्व अनुमति के किसी भी हड़ताल या आंदोलन में भाग लेने के खिलाफ चेतावनी दी है.

‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक मैसेज में, अंबाला के एसपी जशनदीप सिंह रंधावा ने कहा कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ किसान 13 फरवरी को एक आंदोलन में भाग लेने की योजना बना रहे थे. एसपी ने कहा कि बिना अनुमति के आंदोलन में भाग लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

(संपादनः शिव पाण्डेय)
(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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