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Thursday, 19 March, 2026
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से प्रमुख कृषि क्षेत्रों को बाहर रखा जाए : किसान संगठन

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नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के बैनर तले किसानों ने बृहस्पतिवार को मांग की कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि, दुग्ध और कुक्कुट क्षेत्रों को बाहर रखा जाए। इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि शुल्क-मुक्त आयात से घरेलू उत्पादक तबाह हो जाएंगे।

एक बयान के अनुसार, यहां रामलीला मैदान में आयोजित किसान पंचायत में यह मांग की गई, जिसमें देश भर के हजारों किसानों ने भाग लिया।

किसान नेताओं ने कहा कि यदि अमेरिका से कृषि उत्पादों को आयात शुल्क के बिना घरेलू बाजार में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, तो प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय किसानों के लिए ‘‘मृत्यु का फरमान’’ साबित होगा।

उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ खुली बहस की इच्छा भी व्यक्त की और सरकार से चर्चा के लिए तिथि, समय और स्थान तय करने का आग्रह किया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सभा नयी मांगें रखने के लिए नहीं बल्कि सरकार को वर्षों से किसानों को दिए गए आश्वासनों की याद दिलाने के लिए आयोजित की गई। किसान नेताओं ने कहा कि वे अपनी चिंताओं को सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक पहुंचाने के लिए एकत्र हुए।

बयान में कहा गया है कि सभा के बाद, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री कार्यालय गया और वहां देश भर के गांवों में विभिन्न कृषि मुद्दों पर पारित प्रस्तावों को सौंपा।

नेताओं ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर पूर्व प्रतिबद्धताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि एमएसपी पर कानूनी गारंटी की सिफारिशों का पहले समर्थन किया गया था, लेकिन वे अभी तक लागू नहीं हुई हैं।

किसान नेताओं ने आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि सरकार द्वारा एमएसपी नहीं मिलने के कारण देश के किसानों को 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

बयान के अनुसार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई किसान नेता इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

भाषा अविनाश माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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