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Friday, 30 January, 2026
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मशहूर गायिका वाणी जयराम का निधन

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(फोटो के साथ)

चेन्नई, चार फरवरी (भाषा) लोकप्रिय हिंदी गीत ‘बोले रे पपीहरा’ सहित 19 भाषाओं में 10,000 से अधिक गाने गा चुकीं मशहूर गायिका वाणी जयराम का शनिवार को निधन हो गया। हाल में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित करने की घोषणा की गई थी।

वह 77 वर्ष की थीं और शहर के एक अपार्टमेंट में अकेली रहती थीं। पुलिस ने वाणी जयराम के रिश्तेदारों की मौजूदगी में घर का दरवाजा तोड़ा और उन्हें मृत पाया।

पुलिस ने कहा कि जयराम के माथे पर चोट का निशान मिला और जांच जारी है। गायिका की घरेलू सहायिका ने बताया कि जयराम के पति की पहले ही मौत हो गई थी और उनकी कोई संतान नहीं है।

पचास से अधिक वर्षों के अपने लंबे और शानदार करियर में उन्होंने हिंदी फिल्म गुड्डी (1971) के ‘बोले रे पपीहरा’, तमिल फिल्म ‘अपूर्वा रागंगल’ (1975) के ‘येझु स्वरंगालुक्कुल’ और फिल्म ‘दीर्गा सुमंगली’ (1974) के ‘मल्लीगई एन मन्नान मयंगम’ जैसे कई यादगार गीत गाए। पूर्व मुख्यमंत्री और अपने समय की शीर्ष स्टार जे जयललिता के लिए भी वाणी जयराम ने गीत गाये थे।

तमिलनाडु के वेल्लोर में जन्मीं जयराम विभिन्न भाषाओं की बहुमुखी गायिका थीं। उन्होंने तमिल, मलयालम, हिंदी, तेलुगु और कन्नड़ सहित 19 भाषाओं में 10,000 से अधिक गाने गाए।

गायिका के निधन पर शोक जताते हुए मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा कि उन्होंने पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा के बाद हाल में उन्हें बधाई दी थी। स्टालिन ने अपने शोक संदेश में कहा, ‘‘यह दुखद है कि वह पद्म भूषण सम्मान पाने से पहले ही चली गईं।’’

तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन ने भी जयराम के निधन पर शोक व्यक्त किया। संगीतकार और गायिका महती ने कहा, ‘‘वह जमीन से जुड़ी और विनम्र थीं। उनमें अन्य संगीतकारों की प्रतिभा की सराहना करने जैसे दुर्लभ गुण थे।’’

गायिका की घरेलू सहायिका हमेशा की तरह शनिवार को काम पर आई। हालांकि, बार-बार कॉलबेल दबाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। उसने तुरंत गायिका के रिश्तेदारों को सूचित किया, जिन्होंने पुलिस को सूचना दी।

गायिका के घर में घरेलू सहायिका के रूप में पिछले 10 वर्षों से काम करने वालीं मलारकोड़ी ने कहा कि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी नहीं थी।

महिला ने कहा, ‘‘वह पद्म भूषण सम्मान के लिए बधाई देने को लेकर आने वाले मेहमानों और शुभचिंतकों की अगवानी में व्यस्त थीं। काफी फोन आ रहे थे और उन्होंने सभी कॉल का जवाब दिया और उन सभी को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उनको बधाई दी। वह अकेली रहती थीं।’’

भाषा आशीष माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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