Thursday, 20 January, 2022
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फेसबुक रिसर्च ने बताई थी भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ ‘भड़काऊ कंटेंट’ की बात, WSJ जांच में ख़ुलासा

WSJ रिपोर्ट में कहा गया है कि फेसबुक को अपनी सेवाओं को, भारत में सांप्रदायिक दरार से जोड़े जाने की इतनी अधिक ‘चिंता’ है, कि उसने रिसर्चर्स को दर्जनों यूज़र्स से इंटरव्यू करने के लिए भेज दिया.

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नई दिल्ली: दि वॉल स्ट्रीट जर्नल की 23 अक्तूबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक के अंदरूनी दस्तावेज़ बताते हैं कि कंपनी को इस बात की जानकारी है कि उसके एप्स -फेसबुक और व्हाट्सएप का इस्तेमाल भड़काऊ सामग्री फैलाने के लिए किया जा रहा है, जिसका मक़सद ख़ासतौर पर मुसलमानों को निशाना बनाना है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि फेसबुक को अपनी सेवाओं को भारत में सांप्रदायिक दरार पैदा करने से जोड़े जाने की इतनी अधिक ‘चिंता’ है, कि उसने रिसर्चर्स को दर्जनों यूज़र्स से इंटरव्यू करने के लिए भेज दिया.

उसके बाद फेसबुक रिसर्चर्स को पता चला कि भारत में हिंदू और मुसलमान दोनों यूज़र्स कहते हैं कि उन्हें बड़ी मात्रा में ऐसी सामग्री का सामना करना पड़ता है, जो फेसबुक और व्हाट्सएप पर टकराव, नफरत, और हिंसा को प्रोत्साहित करती है.’

डब्लूएसजे रिपोर्ट में कहा गया है कि नफरत भरी इस सामग्री में कोविड फैलाने के लिए ‘मुसलमानों को दोषी’ ठहराने और ऐसे दावे करने की मिसालें शामिल हैं कि ‘मुसलमान देश पर अपना क़ब्ज़ा करने के लिए, हिंदू महिलाओं को शादी के लिए निशाना बना रहे हैं.’

डब्लूएसजे लेख में फेसबुक की जिन अंदरूनी रिपोर्ट्स का हवाला दिया गया है, उनमें दावा किया गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े यूज़र्स, समूहों, और पेजेज़ पर, हिंदी और बंगाली में पोस्ट की गई ज़्यादातर सामग्री को, तकनीकी सीमाओं के चलते कभी फ्लैग नहीं किया जाता और ये भी दावा किया गया है कि राजनीतिक संवेदनशीलताओं के चलते, ग्रुप को हटाने के लिए नामित नहीं किया गया है.

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आरएसएस सत्तारूढ़ बीजेपी का वैचारिक स्रोत है, और पीएम नरेंद्र मोदी को बरसों तक संगठन के साथ काम करने के लिए जाना जाता है.

डब्लूएसजे के अनुसार रिपोर्ट उस सीरीज़ का हिस्सा है, जिसमें फेसबुक की ‘विफलताओं’ और ‘उनसे निपटने में उसकी अनिच्छा या असमर्थता’ की जांच करने की कोशिश की गई है. अमेरिका स्थित पेपर ने पिछले साल एक और रिपोर्ट जारी की थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि अपने सबसे बड़े बाज़ार में व्यवसायिक चिंताओं के चलते, फेसबुक इंडिया हेट स्पीच के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रही, जिनमें एक स्पीच सत्तारूढ़ बीजेपी के एक नेता की भी थी.

फेसबुक ने, जिसकी अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के साथ, हेट स्पीच को प्रचारित करने की क्षमता को लेकर जांच बढ़ रही है, ने उस समय आरोपों से इनकार किया था.

डब्लूएसजे के अनुसार, 23 अक्तूबर के लेख के जवाब में फेसबुक ने कहा कि जिन रिपोर्ट्स का हवाला दिया जा रहा है, वो बिल्कुल प्रारंभिक नेचर की हैं.

डब्लूएसजे की ओर से संपर्क किए जाने पर, फेसबुक प्रवक्ता एण्डी स्टोन ने ‘हिंदू राष्ट्रवादी समूहों’ की गतिविधि पर कोई टिप्पणी नहीं की. लेकिन डब्लूएसजे रिपोर्ट में उनका ये कहते हुए हवाला दिया गया है कि एक सावधान, कठोर, और बहु-विषयक प्रक्रिया के बाद ही, फेसबुक किसी व्यक्ति या संगठन को बैन करती है’.

स्टोन ने कहा कि कुछ अंदरूनी रिपोर्ट्स में आगे के विचार-विमर्श के लिए सुराग़ दिए गए थे और उनमें कोई नीतिगत सिफारिशें शामिल नहीं थीं.

स्टोन के अनुसार, हेट स्पीच का पता लगाने के लिए फेसबुक काफी प्रयास कर रही है और दुनिया भर में प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री में कमी आ रही है. उन्होंने ये भी कहा कि फेसबुक के पास ऐसी तकनीकी क्षमता है कि वो हिंदी और बंगाली समेत पांच भारतीय भाषाओं में आपत्तिजनक सामग्री का पता लगा सकती है.


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CAA विरोध

डब्लूएसजे ने ख़बर दी कि फेसबुक रिसर्चर्स ने, जुलाई 2020 में भारत में ‘सांप्रदायिक संघर्ष भाग 1’ नामक रिपोर्ट में लिखा कि दिसंबर 2029 के बाद के महीनों में फेसबुक पर (भारत में), भड़काऊ सामग्री में 300 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है.

दिसंबर 2019 वो समय था जब भारत में विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन देखे जा रहे थे जिसे मुसलमानों के प्रति भेदभावपूर्ण बताया गया है.

फरवरी 2020 में दिल्ली में दंगे हो गए, जो सीएए के समर्थकों और विरोधियों के बीच टकराव के बाद भड़क उठे थे. झगड़ों में 50 से अधिक लोग हलाक हो गए.

डब्लूएसजे रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘2020 फरवरी अंत में अफवाहों और हिंसा का आह्वान, ख़ासकर फेसबुक की व्हाट्सएप मैसेजिंग सर्विस पर फैलाया गया, जब रिपोर्ट के मुताबिक़, दिल्ली की सांप्रदायिक हिंसा में 53 लोग मारे गए’.

फेसबुक रिसर्चर्स ने भारत के दर्जनों यूज़र्स का इंटरव्यू किया, जिसमें ‘दिल्ली के एक हिंदू व्यक्ति’ ने कथित रूप से कहा, कि उसे फेसबुक और व्हाट्सएप से जो नियमित संदेश मिलते हैं, ‘वो सब बहुत ख़तरनाक होते हैं’, जिनमें ऐसे मैसेज भी शामिल होते हैं कि ‘हिंदू ख़तरे में हैं, मुसलमान हमें मारने वाले हैं’.

मुम्बई में स्थित एक मुसलमान शख़्स ने रिसर्चर्स से कहा कि फेसबुक पर ‘इतनी ज़्यादा नफरत फैल रही है…ये बहुत डरावना है, वाक़ई में बहुत डरावना है’, उसे अपनी ज़िंदगी भी ख़तरे में लग रही है.

फेसबुक सर्वे में ये भी पता चला कि बहुत से यूज़र्स का मानना है, कि अपने प्लेटफॉर्म पर पाई जाने वाली ‘इस सामग्री को कम करना फेसबुक की ज़िम्मेदारी है’.


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RSS और बजरंग दल

‘विरोधात्मक हानिकारक नेटवर्क्स: भारत केस स्टडी’ नाम से फेसबुक की एक आंतरिक रिपोर्ट में कहा गया है, कि आरएसएस-समर्थक फेसबुक यूज़र्स, लव-जिहाद की साज़िशों और ऐसे दावों के बारे में पोस्ट करते हैं, कि हिंदुओं के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई के तहत, खाने को ‘हलाल करने’ या कोविड-19 फैलाने के लिए, मुस्लिम धर्मगुरू उस पर थूकते हैं.

अंदरूनी दस्तावेज़ का ये कहते हुए हवाला दिया गया है, कि ऐसी भड़काऊ सामग्री के आरएसएस से जुड़ाव के बावजूद, जिसके लिए आमतौर पर ऐसी इकाइयां फेसबुक से प्रतिबंधित हो जातीं, कंपनी ने ‘राजनीतिक संवेदनशीलताओं को देखते हुए’, आरएसएस को अपने प्लेटफॉर्म्स से नहीं हटाया है.

फेसबुक के एक दूसरे दस्तावेज़ में कथित रूप से आरोप लगाया गया कि एक हाशिए के हिंदू दक्षिण-पंथी प्लेटफॉर्म बजरंग दल ने ‘हिंसा आयोजित करने और भड़काने’ के लिए, व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया.

डब्लूएसजे का कहना है कि एक और आंतरिक रिपोर्ट की, इस समूह को हटा देने की सिफारिश के बावजूद, बजरंग दल फेसबुक पर सक्रिय है. उसी रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि बजरंग दल बीजेपी से जुड़ा हुआ है.

डब्लूएसजे की ओर से टिप्पणी के लिए संपर्क किए जाने के बाद, आरएसएस ने कहा कि समूह की गतिविधियों से जुड़े विषयों पर, फेसबुक किसी समय भी उससे संपर्क कर सकती थी, लेकिन उसने नहीं किया. बजरंग दल ने इन आरोपों का खंडन किया, कि उसने फेसबुक पर हेट-स्पीच को बढ़ावा दिया है.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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